संत लोकनिक अवदान नामक पुस्तक का लोकार्पण

Published at :02 Dec 2015 6:45 PM (IST)
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संत लोकनिक अवदान नामक पुस्तक का लोकार्पण

संत लोकनिक अवदान नामक पुस्तक का लोकार्पण साहित्य अकादमी, नई दिल्ली से हुआ है प्रकाशित प्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालय मंगलवार को साहित्य अकादमी नयी दिल्ली एवं एमएलटी कॉलेज सहरसा की ओर से ‘मैथिली संस्कार गीतों के विविध आयाम’ विषय पर परिसंवाद एवं युवा साहिती कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस मौके पर साहित्य अकादमी के विशेष पदाधिकारी […]

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संत लोकनिक अवदान नामक पुस्तक का लोकार्पण साहित्य अकादमी, नई दिल्ली से हुआ है प्रकाशित प्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालय मंगलवार को साहित्य अकादमी नयी दिल्ली एवं एमएलटी कॉलेज सहरसा की ओर से ‘मैथिली संस्कार गीतों के विविध आयाम’ विषय पर परिसंवाद एवं युवा साहिती कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस मौके पर साहित्य अकादमी के विशेष पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र कुमार देवेश, अकादमी की मैथिली परामर्श मंडल की अध्यक्षा डॉ वीणा ठाकुर, एमएलटी कालेज के प्रधानाचार्य डॉ केपी यादव, चर्चित साहित्यकार डॉ महेन्द्र झा, डॉ धीरेन्द्र नारायण धीर, प्रो राजाराम प्रसाद, प्रो जगदीश नारायण यादव, डॉ रामनरेश सिंह, प्रो कुलानंद झा, प्रो सुभाषचन्द्र यादव ने संयुक्त रूप से ‘मिथिलाक साहित्यिक सांस्कृतिक उत्कर्ष में संत लोकनिक अवदान’ नामक पुस्तक का लोकार्पण किया. पुस्तक साहित्य अकादमी नयी दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गयी है. मिथिला के संतों का है गौरव गानयह पुस्तक उस समय प्रकाशित हुआ है जब सारा देश सहिष्णुता-असहिष्णुता के दौर से गुजर रहा है. ऐसे समय में यह पुस्तक बताता है कि मिथिला सहित संपूर्ण देश में शांति और स्थिरता कैसे कायम हो. भारत संपूर्ण विश्व में शांति प्रिय देश माना जाता रहा है. इसके बहुत कारण हो सकते हैं. परंतु इसके एक महत्वपूर्ण पक्ष को इस पुस्तक के माध्यम से जानने और परोसने का साहस किया गया है. इसमें आध्यात्मिक चेतना को केंद्रित कर संतों और दार्शनिकों की वाणी और उपदेशों के गूढ़ विचारों को संपादक ने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है. इस पुस्तक में मिथिला के गौरव मंडन मिश्र, विदुषी भारती, संत कारू खिरहरि, देवलोक संत लक्ष्मीनाथ गोसांई, महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज जैसे प्रमाणित दार्शनिक और संतों के द्वारा किये गये कृति को सजाया गया है. संपादक डॉ डीएन साह ने पुस्तक का केंद्रीय भाव बताते कहा कि इस भागम-भाग की जिंदगी में अध्यात्म मानव मन को शांत कराता है. यदि अध्यात्म से बहुत लाभ नहीं भी होगा तो हानि नहीं ही होगी. इस प्रकार संतों का महत्व बढ़ जाता है और धरती पर से संतों का अंत नहीं हो सकता है. इस पुस्तक में 20 आलेखों को रखा गया है. जिसमें प्रवृत्ति और निवृत्ति मार्ग के द्वारा जीवन के लक्ष्य तक जाया जा सकता है. एमएलटी कालेज के उपाचार्य डॉ देवनारायण साह द्वारा संपादित यह दूसरी पुस्तक है. फोटो-पुस्तक 6 व 7- लोकार्पित पुस्तक व संपादक डॉ डीएन साह

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