सपनों की बारात… कीचड़ में फंसी राह : दूल्हा बाइक से निकला, सिस्टम हुआ बेनकाब

प्रखंड अंतर्गत बरहारा गांव की यह तस्वीर विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है.
हाईटेक सोच वाले जमाने में शादी जैसे मौके पर भी झलक रही मजबूरी
राजेश डेनजील, नवहट्टाप्रखंड अंतर्गत बरहारा गांव की यह तस्वीर विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. जिस गांव में लोग हाई टेक्नोलॉजी के साथ आधुनिक जीवन जीने का सपना देखते हैं, वहीं आज भी बुनियादी सुविधा यानी सड़क के अभाव में जिंदगी बदहाल है. जहां एक ओर शादी-ब्याह में बैंड-बाजे, चमचमाती गाड़ियों की लंबी कतार और शाही अंदाज में दूल्हा अपनी दुल्हन को लेने निकलता है, वहीं इस गांव में एक दूल्हे को अपनी ही शादी के लिए खेतों के कीचड़ और पानी से जूझते हुए बाइक का सहारा लेना पड़ा. यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक करारा तमाचा है.डरहार पंचायत के बरहारा निवासी रविन झा जब अपनी शादी के लिए निकले तो आंखों में खुशी कम और हालात की मजबूरी ज्यादा झलक रही थी. खेतों के बीच, कीचड़ और पानी से भरे रास्तों पर बाइक चलाते हुए उनकी यह तस्वीर अब चर्चा का विषय बन गयी है. बताया जाता है कि पिछले 10 वर्षों से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस इलाके में सड़क निर्माण की बात सिर्फ कागजों में ही सीमित रह गया है. संवेदक की लापरवाही और सिस्टम की अनदेखी ने गांव के लोगों को बदहाली में जीने को मजबूर कर दिया है. यह वीडियो जहां एक ओर लोगों को भावुक कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी व्यवस्था की नाकामी की परतें भी खोल रहा है. सवाल यह है कि आखिर कब तक गांव के लोग ऐसे ही अपने सपनों को कीचड़ में कुचलते देखेंगे.
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लेखक के बारे में
By दीपांकर श्रीवास्तव
दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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