सहरसा की लोक संस्कृति में शामिल है मेला : डीएम

Published at :01 Dec 2015 6:38 PM (IST)
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सहरसा की लोक संस्कृति में शामिल है मेला : डीएम

सहरसा की लोक संस्कृति में शामिल है मेला : डीएम रक्तकाली चौंसठ योगिनी धाम मेला का डीएम ने किया उद्घाटन पहली जनवरी तक चलेगा मेलाप्रतिनिधि, सहरसा सदर जिले के पर्यटन स्थल में शामिल रक्तकाली चौंसठ योगिनी धाम में हर वर्ष लगने वाले मेले का मंगलवार को डीएम विनोद सिंह गुंजियाल ने उद्घाटन किया. एक महीने […]

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सहरसा की लोक संस्कृति में शामिल है मेला : डीएम रक्तकाली चौंसठ योगिनी धाम मेला का डीएम ने किया उद्घाटन पहली जनवरी तक चलेगा मेलाप्रतिनिधि, सहरसा सदर जिले के पर्यटन स्थल में शामिल रक्तकाली चौंसठ योगिनी धाम में हर वर्ष लगने वाले मेले का मंगलवार को डीएम विनोद सिंह गुंजियाल ने उद्घाटन किया. एक महीने तक चलने वाले इस मेले का उद्घाटन करते डीएम ने कहा कि यहां की धार्मिक आस्था व लोक संस्कृति की परंपरा में मेला भी शामिल है. उन्होंने कहा कि मेला आपसी भाईचारे, सहिष्णुता व सौहार्द्र का भी प्रतीक है. त्योहारों की तरह मेले का आयोजन होना स्वस्थ सामाजिक व्यवस्था का प्रमाण है. डीएम ने कहा कि एक माह तक चलने वाले मेले की सफलता के लिए आयोजक या प्रशासन जिम्मेवार नहीं है. बल्कि समाज के प्रत्येक लोगों का दायित्व है. मेला से क्षेत्र के संस्कार व उसकी संस्कृति की झलक मिलती है. मुख्य अतिथि सदर एसडीओ जहांगीर आलम ने कहा कि मेले से मेल-मिलाप की आपसी भावना का परिचय मिलता है. मेले में आने वाले लोगों की हर सुविधा का ख्याल रखा जायेगा. मेला प्रभारी कुमार हीरा प्रभाकर ने मंच का संचालन करते कहा कि 1997 में जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए महायोगिनी मेले की परंपरा को लंबे समय से कमेटी निभाती आ रही है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की देख-रेख व उनके सहयोग से हर साल मेला शहर को नयी पहचान देता आ रहा है. उद्घाटन के मौके पर एसडीपीओ सुबोध विश्वास, डीपीआरओ बिंदुसार मंडल, आइटी मैनेजर लखींद्र महतो, मेला कमेटी के राजेश्वर यादव, बलराम देव, भोला प्रसाद गुप्ता आदि मौजूद थे. फोटो- मेला 7- मेला का उद्घाटन करते डीएम विनोद कुमार गुंजियाल

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