सीएम सर, ओवरब्रिज के लिए राज्य के हस्सिे की राशि दीजिए

Published at :21 Nov 2015 6:43 PM (IST)
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सीएम सर, ओवरब्रिज के लिए राज्य के हस्सिे की राशि दीजिए

सहरसा : मुख्यालयसीएम सर, सहरसा के बंगाली बाजार स्थित प्रस्तावित, स्वीकृत व शिलान्यासकृत ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए राज्य सरकार की हिस्सेदारी दीजिए. क्योंकि रेल मंडल के अधिकारियों ने शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट रूप से कह दिया है कि आरओबी निर्माण के लिए रेलवे ने अपना काम पूरा […]

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सहरसा : मुख्यालयसीएम सर, सहरसा के बंगाली बाजार स्थित प्रस्तावित, स्वीकृत व शिलान्यासकृत ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए राज्य सरकार की हिस्सेदारी दीजिए. क्योंकि रेल मंडल के अधिकारियों ने शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट रूप से कह दिया है कि आरओबी निर्माण के लिए रेलवे ने अपना काम पूरा कर दिया है. निर्माण कार्य के लिए रेलवे तैयार है.

अब राज्य सरकार आगे की प्रक्रिया पूरी करे. अपने हिस्से की राशि उपलब्ध कराये. तभी निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा. मुख्यमंत्री जी, साल 2013 में आपने भी तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद शरद यादव के पत्र का उत्तर देते इस स्थ्ल पर ओवरब्रिज की जरूरत बतायी थी एवं फिफ्टी-फिफ्टी के शेयर में राज्य सरकार द्वारा राशि उपलब्ध कराने की स्वीकृति भी दी थी. रेलवे की घोषणा के बाद अब यदि निर्माण कार्य शुरू होने में देरी होती है तो राज्य सरकार के सिर ठिकरा फूटेगा.

शहर के विकास में अवरोध उत्पन्न करने का आरोप लगेगा. 18 साल और तीन शिलान्याससाल 1997 में तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद दिनेश चंद्र यादव के प्रयास से बंगाली बाजार के समपार संख्या 31 ए स्पेशल पर आरओबी निर्माण का प्रस्ताव रखा गया. उस समय रेलमंत्री रहे नीतीश कुमार ने स्वीकृति भी प्रदान कर दी. 10 लाख रुपये के बने प्राक्कलन में मंत्रालय ने रेलवे को प्रथम चरण में दो लाख रुपये का आवंटन भी उपलब्ध करा दिया था.

उसी वर्ष तत्कालीन रेल राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह ने आरओबी का शिलान्यास भी किया. लेकिन अज्ञात कारणों से परियोजना पेंच में फंसती चली गई और समस्या गहराती चली गई. 2005 में बड़ी रेल लाईन के उद्घाटन के समय तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने इसी आरओबी का एक बार फिर शिलान्यास किया. लेकिन काम शुरू नहीं कराया जा सका. गहराती गयी जाम की समस्याट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ने से बंगाली बाजार के फाटक गिरने में भी तेजी आती गई. 24 घंटे में 36 बार फाटक गिरता है.

शहर की गति धीमी होती चली गयी. महाजाम की समस्या गहराती चली गयी. बंगाली बाजार के जाम का असर पूरे शहर पर पड़ने लगा. लेकिन विभाग पर कोई असर नहीं हुआ. 2013 में आरओबी निर्माण ने बड़े आंदोलन का रूप लिया तो सांसद शरद यादव को पहली करनी पड़ी.

उन्होंने सहरसा परिसदन में रेल व राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस संबंध में जानकारी दी. सीएम की स्वीकृति के बाद उन्होंने तत्कालीन रेल राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी के हाथों तीसरी बार शिलान्यास कराया. इस बार शिलान्यास के साथ ही मिट्टी जांच करायी जाने लगी तो लगा कि काम शुरू हो जायेगा.

लेकिन इस जांच के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ. लोग एक बार फिर ठगा महसूस करने लगे. बीते 20 नवंबर को समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम सुधांशु शर्मा ने कहा कि आरओबी निर्माण के लिए रेलवे ने अपनी सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली है. अब पाला राज्य सरकार के जिम्मे है. फोटो- आरओबी 1- बंगाली बाजार के इसी क्रॉसिंग पर बनना है आरओबी(पेज 3 पर लीड लगना है)

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