SAHARSA लकड़ी व कोयले के चूल्हे पर बन रहा एमडीएम

Published by :AMIT KUMAR SINH
Published at :03 May 2026 5:15 PM (IST)
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SAHARSA लकड़ी व कोयले के चूल्हे पर बन रहा एमडीएम

आंगनबाड़ी सेंटर तथा सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए एमडीएम का खाना बनाने में रसोइया तथा सहायिका को इन दिनों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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पतरघट, सहरसा से राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट :

क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में संचालित विभिन्न कंपनियों के गैस एजेंसी संचालक द्वारा इन दिनों सरकारी स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों को ससमय गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं करवाये जाने की वजह से आंगनबाड़ी सेंटर तथा सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए एमडीएम का खाना बनाने में रसोइया तथा सहायिका को इन दिनों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गैस की किल्लत से आमजनों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उपभोक्ताओं को बुकिंग के हिसाब से नंबर आने पर गैस एजेंसी द्वारा सिलेंडर उपलब्ध करवाया जाता है. विकल्प के तौर पर लोग लकड़ी तथा कोयले के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है. जबकि क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में इन दिनों शादी विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश सहित अन्य धार्मिक आयोजन का सीजन चरम पर चल रहा है.

गांव-गांव में शुभ लग्न का दौर शुरू

गांव-गांव में शुभ लग्न का दौर शुरू है. लेकिन रसोई गैस की किल्लत ने धार्मिक आयोजनों की रौनक को काफी फीका कर दिया है. गैस सिलेंडर की कमी के कारण अब लोगों को मजबूरन लकड़ी तथा कोयले के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है. शादी वाले घरों में इन दिनों सबसे बड़ी समस्या रसोई गैस की अनुपलब्धता बनी हुई है. जबकि आम उपभोक्ताओं को भी घरेलू उपयोग के लिए भी गैस सिलेंडर बड़ी मुश्किल से मिल पा रहा है. ऐसे में भोज भात के लिए गैस का इंतजाम करना बड़ा मुश्किल सवाल बना रहता है. गैस के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाला कोयला भी अभी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.

गैस बर्नर की जगह जल रहे लकड़ी व कोयले के बड़े-बड़े चूल्हे

गांव-गांव में शुभ लग्न के मौके पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम तथा भोज भंडारे में अब गैस बर्नर की जगह लकड़ी तथा कोयले के बड़े-बड़े चूल्हे जलते नजर आ रहे हैं. गृहिणी रिंकू देवी, शनिचरी देवी, कोमल, पूजा, सहित अन्य ने बताया कि भीषण गर्मी में चूल्हे की आंच पर खाना बनाना काफी कठिन लगता है. लेकिन गैस नहीं मिलने के कारण आमजनों को यहीं एकमात्र विकल्प बचा है. गैस की कमी का असर होटल, रेस्टोरेंट तथा केटरिंग के व्यवसाय पर भी काफी पड़ रहा है. शादी विवाह के इस व्यस्ततम सीजन में ईंधन की किल्लत और बढ़ती लागत ने उनके बजट को बिगाड़ दिया है. खासकर ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है. तेज धूप के बीच सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिट्टी के चूल्हों पर रसोईया द्वारा बनाये जा रहे एमडीएम में रसोईया को गैस के अभाव के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जिसके समाधान के लिए न तो विभाग इस दिशा में कोई संज्ञान ले रहा है और न हीं गैस एजेंसी द्वारा ही इसका कोई समाधान किया जा रहा है. गैस की किल्लत से घरों के साथ साथ छोटे मोटे व्यवसाय पर भी काफी असर पड़ रहा है.

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