तीन बच्चों की हुई थी स्टील डेथ व एक का वजन था डेढ़ किलो

Published at :10 Nov 2015 6:34 PM (IST)
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तीन बच्चों की हुई थी स्टील डेथ व एक का वजन था डेढ़ किलो

तीन बच्चों की हुई थी स्टील डेथ व एक का वजन था डेढ़ किलो एमसीएच के पीओ ने की चार नवजातों के मौत की जांचकहा, ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण अभियान में है लापरवाही प्रतिनिधि, सहरसा शहर रविवार की देर रात सदर अस्पताल में हुई चार बच्चों की मौत को लेकर विभाग ने जांच शुरू कर […]

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तीन बच्चों की हुई थी स्टील डेथ व एक का वजन था डेढ़ किलो एमसीएच के पीओ ने की चार नवजातों के मौत की जांचकहा, ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण अभियान में है लापरवाही प्रतिनिधि, सहरसा शहर रविवार की देर रात सदर अस्पताल में हुई चार बच्चों की मौत को लेकर विभाग ने जांच शुरू कर दी है. मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के एमसीएच के स्टेट प्रोगाम ऑफिसर पुलेश्वर झा ने मामले की घंटों जांच की. पीओ पुलेश्वर ने अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, प्रसव वार्ड व एनआइसीयू का गहन जांच की. इस दौरान उन्होंने सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार सिंह, उपाधीक्षक डॉ अनिल कुमार, डीआइओ डॉ संजय कुमार सिंह, डीटीओ डॉ अरविंद कुमार से जानकारी ली. पीओ ने बताया कि मीडिया में खबर आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लिया. जांच रिपोर्ट विभागीय अधिकारी को सौंपी जायेगी. मामले में जो भी दोषी होंगे, कार्रवाइ की जायेगी. मालूम हो कि प्रभात खबर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद प्रशासन व विभागीय अधिकारी हरकत में आया. –तीन बच्चों की हुई थी स्टील डेथ जांच के दौरान पीओ ने प्रसव वार्ड में रविवार की रात हुई प्रसव की पूरी जानकारी ली. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान तीन नवजात की मौत स्टील बर्थ से हुई थी. जिसमें एक नवजात पूर्व से ही मरा हुआ था. एक मरीज प्राइवेट से आया था, जिसका वजन डेढ़ किलो ही था. जिसे बचाना संभव नहीं था. उन्होंने बताया कि नौ दिन में नौ नवजात की मौत हुई है. भारत में प्रति वर्ष प्रति हजार 22 बच्चे व बिहार में प्रति हजार 2.15 बच्चे की मौत होती है. –फील्ड में नहीं होता है काम सरकार द्वारा चलाये जा रहे अभियान यहां सफल नहीं होना पाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए एएनएम, आशा व ममता को जिम्मेवारी है कि वह अपने क्षेत्र के गर्भवती महिला का कार्ड बनाकर ससमय सभी सुविधा व टीका उपलब्ध करायें, लेकिन इस मामले में पाया गया कि किसी गर्भवती का न ही कोई कार्ड बना है और न ही कोई टीका ही दी गयी है. मरीज बाहर में किसी जगह टेटभेक का इंजेक्शन ली है, जो लापरवाही को दर्शाता है. उन्होंने जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ संजय कुमार सिंह को निर्देश देते कहा कि सरकार इमुनाइजेशन पर काफी पैसा खर्च कर रही है, लेकिन उसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है. उन्होंने डीआइओ को लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया. फोटो- जांच 16- प्रसव वार्ड में सीएस व अन्य अधिकारियों के साथ बच्चों के मौत की जांच करते स्वास्थ्य अधिकारी—चार कर्मियों को किया गया निलंबित पैसे लेने की हुई पुष्टि सहरसा सिटी. रविवार की रात सदर अस्पताल में हुई एक साथ चार नवजातों की मौत मामले में प्रसव वार्ड में कार्यरत चार कर्मियों को सिविल सर्जन ने निलंबित कर दिया. सीएस डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि मामले की जांच की गयी. जांच में कुछ कर्मियों द्वारा लापरवाही बरतने की पुष्टि हुई, जिसके बाद लापरवाही के आरोप में ए ग्रेड नर्स सुमित्रा कुमारी, विनीता चौधरी, कक्ष सेविका उर्मिला देवी व सफाई कर्मी सीता देवी को निलंबित कर दिया गया है. सीएस ने कहा कि लापरवाही बरदाश्त नहीं की जायेगी. –पैसे लेने की हुई पुष्टि एक दिन एक साथ चार बच्चों की हुई मौत के बाद जिला प्रशासन से लेकर विभागीय अधिकारी सजग हुए. मामले की जांच के लिए पहुंचे एमसीएच के स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर पुलेश्वर झा ने मामले की गंभीरता को देख मरीज के घर जाकर मामले की जांच करने की बात कही. जिसके बाद जांच टीम चारों मरीजों के घर पहुंच मामले की जांच की तो अधिकारियों के होश उड़ गये. महिषी प्रखंड के महपुरा निवासी नीनू देवी के परिजनों ने अधिकारियों के सामने सात सौ रुपया लेने की बात कही, जिसके बाद जांच टीम व अधिकारियों ने कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की.

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