1948 में गांधीवादियों ने टीकापट्टी में किया था गांधीजी का श्राद्ध

Updated at : 06 Nov 2019 8:17 AM (IST)
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1948 में गांधीवादियों ने टीकापट्टी में किया था गांधीजी का श्राद्ध

रूपौली : 30 जनवरी 1948 की दर्दनाक घटना की खबर जब टीकापट्टी पहुंची तो गांधीवादियों में गहरा शोक छा गया. शोकाकुल गांधीवादियों ने टीकापट्टी गांधी आश्रम में गांधीजी का श्राद्धकर्म किया. श्राद्धकर्म में टीकापट्टी में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. बड़े पैमाने पर शांति भोज की व्यवस्था की गई. इतना बोलते-बोलते वयोवृद्ध सेवानिवृत शिक्षक दिनेश […]

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रूपौली : 30 जनवरी 1948 की दर्दनाक घटना की खबर जब टीकापट्टी पहुंची तो गांधीवादियों में गहरा शोक छा गया. शोकाकुल गांधीवादियों ने टीकापट्टी गांधी आश्रम में गांधीजी का श्राद्धकर्म किया.

श्राद्धकर्म में टीकापट्टी में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. बड़े पैमाने पर शांति भोज की व्यवस्था की गई. इतना बोलते-बोलते वयोवृद्ध सेवानिवृत शिक्षक दिनेश मंडल का कंठ अवरूद्ध हो गया और उनकी आंखें भर आयीं.
85 साल के शिक्षक दिनेश मंडल बताते हैं कि वे आजादी के समय हाथ मे दिये लेकर जलाए थे. दो दिशा से नदियों से घिरा टीकापट्टी का गांधी आश्रम नदी किनारे होता था. सीमांचल सहित देश के क्रांतिकारी भगैत मंडली का रूप धारण कर नदी किनारे सफर करते थे. आजादी के पूर्व लोग पैदल यात्रा करते थे. वे खुद 1951 में नेहरुजी की सभा मे पैदल पूर्णिया गये थे . पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री टीकापट्टी मे ही रहकर 15 वर्ष तक शिक्षा ग्रहण किए थे.
सन 1949 मे देशरत्न राजेंद्र बाबू की अगवानी को 12 हाथी के साथकुरसेला पहुंचकर स्वागत कर टीकापट्टी लाया गया था. इस अगवानी में मैं भी था. हालांकि उन्हें मलाल है कि आजादी के बाद टीकापट्टी के विकास अनपेक्षित रहा. वर्तमान समय में टीकापट्टी को प्रखंड का दर्जा मिलना चाहिए. चौमुखी विकास होना चाहिए.
गन्ना मंत्री ने लिया गांधी सदन का जायजा
सूबे की गन्ना विकास मंत्री व स्थानीय विधायक बीमा भारती भी मंगलवार की शाम को टीकापट्टी पहुंची. इस दौरान उन्होंने 10 नवंबर तक मुख्यमंत्री का कार्यक्रम निर्धारित होने का संकेत दिया. मंत्री ने स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की.
पेंशनर समाज के सदस्यों ने गांधी द्वार पूर्व के स्थल पर ही बनाए जाने की मांग रखी. जबकि संघर्ष समिति ने प्रखंड के निर्माण की मांग दोहरायी. इसपर मंत्री बीमा भारती ने आश्वस्त किया कि वे प्रशासन से इस मसले पर वार्ता करेंगी.
टीकापट्टी के लिए कुछ बड़ा सोच रहे मुख्यमंत्री: सांसद
पूर्णिया. पूज्य बापू मोहनदास करमचंद गांधी की कर्मस्थली टीकापट्टी में आगामी 10 नवंबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहेंगे और गांधी के सपनों के टीकापट्टी को विकास का नया रूप देंगे. हालांकि मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर वहां प्रशासनिक तैयारी काफी तेज हो गयी है. वहां के लोग आशान्वित हैं कि मुख्यमंत्री टीकापट्टी के लिए बड़ी घोषणा करेंगे.
इधर पूर्णिया के सांसद संतोष कुशवाहा ने टीकापट्टी के प्रखंड निर्माण समिति के हवाले से भेजे गये आवेदन के आधार पर कई मांगों का फेहरिस्त मुख्यमंत्री को सौंपा है. इसमें टीकापट्टी को प्रखंड का दर्जा, डिग्री कॉलेज, गांधी सदन का जीर्णोद्धार एवं टीकापट्टी को पर्यटक स्थल बनाने का आग्रह किया गया है.
सांसद श्री कुशवाहा ने बताया कि मुख्यमंत्री टीकापट्टी में गांधी के आगमन विषय पर काफी कुछ टीकापट्टी को देने की सोच रहे हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री 10 नवंबर को टीकापट्टी आयेंगे. इधर जदयू के प्रदेश महासचिव अशोक बादल ने भी कहा कि वे खुद इस मसले पर मुख्यमंत्री से मिलकर आये हैं. मुख्यमंत्री के समक्ष टीकापट्टी को प्रखंड बनाने का आग्रह रख दिया गया है और इसे मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया भी है.
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