नियमित रेलगाड़ियों में नो रूम और विशेष ट्रेनों में 50 प्रतिशत आरक्षित सीटें खाली
Updated at : 06 Nov 2019 8:14 AM (IST)
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सहरसा : पर्व से पहले और पर्व के समाप्ति के बाद समस्तीपुर डिवीजन के सहरसा जंक्शन सहित दरभंगा, जयनगर और मुजफ्फरपुर से बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनें दी गयी हैं. लेकिन यात्री अब भी विशेष ट्रेनों को छोड़कर नियमित ट्रेनों में आरक्षण के लिए मारामारी कर रहे हैं. सहरसा जंक्शन से खुलने वाली अधिकांश महत्वपूर्ण […]
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सहरसा : पर्व से पहले और पर्व के समाप्ति के बाद समस्तीपुर डिवीजन के सहरसा जंक्शन सहित दरभंगा, जयनगर और मुजफ्फरपुर से बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनें दी गयी हैं. लेकिन यात्री अब भी विशेष ट्रेनों को छोड़कर नियमित ट्रेनों में आरक्षण के लिए मारामारी कर रहे हैं. सहरसा जंक्शन से खुलने वाली अधिकांश महत्वपूर्ण नियमित ट्रेनों में नो रूम का बोर्ड लगा है.
किसी भी लंबी दूरी की किसी भी ट्रेनों में बर्थ उपलब्ध नहीं है. यहां तक कि वेटिंग टिकट भी यात्रियों को उपलब्ध नहीं हो रहा है. वहीं सहरसा जंक्शन से दिल्ली, आनंद विहार के लिए स्पेशल ट्रेन में एसी और स्लीपर की अधिकांश सीटें खाली जा रही है.
इस बात को रेल अधिकारी भी मान रहे हैं और लगातार मीडिया के जरिए स्पेशल ट्रेनों में बर्थ खाली होने की जानकारी दे रहे हैं. खासकर सुविधा स्पेशल में पर्याप्त संख्या में आरक्षित सीटें खाली जा रही है. रेल अधिकारियों की माने तो स्पेशल ट्रेन के सहारे यात्री अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच सकते हैं.
स्पेशल ट्रेन में अभी भी मिल सकती है सीट: छठ पर्व समाप्ति के बाद प्रदेशों में काम पर लौटने वाले की भीड़ सहरसा जंक्शन पर बढ़ती जा रही है. समस्तीपुर डिवीजन के अधिकारी भीड़ के नियंत्रण के लिए कैंप कर चुके हैं. अधिकांश यात्री स्पेशल ट्रेन को छोड़कर नियमित ट्रेनों में बर्थ खोज रहे हैं. लेकिन अधिकांश नियमित ट्रेनों में नो रूम का बोर्ड लगा है.
बता दें कि बीते 4 नवंबर को सहरसा से आनंद विहार के लिए स्पेशल ट्रेनों में एसी और स्लीपर में कुल 50 प्रतिशत सीटें खाली रह गयी. वहीं 5 नवंबर को सहरसा से दिल्ली के लिए के लिए स्पेशल ट्रेन चलायी गयी. 7 नवंबर को सहरसा से आनंद विहार के लिए स्पेशल ट्रेन चलायी जायेगी.
इसमें आरक्षित सीटों का स्थिति यह है कि एसी 3 में 55 सीटें और स्लीपर में 362 बर्थ उपलब्ध है. इसके अलावा 5 नवंबर को दिल्ली से दरभंगा गयी स्पेशल ट्रेन में एसी में 52 बर्थ खाली रह गयी. इसके अलावा 14 नवंबर को बरौनी से बांद्रा जाने वाली स्पेशल ट्रेन में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षित सीटें खाली हैं.
तत्काल टिकट के लिए काउंटर पर रात में ही लग जाती है लंबी लाइनें
सहरसा . छठ पर्व समाप्ति के बाद घरों से वापस प्रदेशों में काम पर लौटने वाले लोगों की काफी मुश्किलें बढ़ गयी है. रेल यात्री को नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा है. सहरसा जंक्शन पर स्थिति यह है कि तत्काल टिकट के लिए सहरसा जंक्शन पर सुबह से ही लंबी लाइन लग जाती है.
कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर हर दिन हंगामे की स्थिति बनी रहती है. हालांकि स्थिति को काबू करने के लिए आरपीएफ की टीम तैनात रहती है. कई ट्रेनों में वेटिंग टिकटों के कंफर्म होने की कोई उम्मीद नहीं देख तत्काल टिकट के लिए रेल यात्रियों को काफी पापड़ बेलना पड़ रहा है. सहरसा जंक्शन और उसके आसपास के यात्री तत्काल टिकट के लिए रात में टिकट काउंटर पर ही सो जाते हैं.
पूरी रात काउंटर पर बिताने के बाद जब सुबह काउंटर खुलता है तो मुश्किलों से 2 से 3 मिनट में ही तत्काल टिकट फुल हो जाता है. लाइन में पहले, दूसरे नंबर पर लगे व्यक्ति के बाद तीसरे व्यक्ति के काउंटर तक पहुंचते-पहुंचते वेटिंग टिकट मिलने लगता है. ऐसे में रात से ही कंफर्म टिकट की उम्मीद में बैठे यात्रियों की उम्मीद पर मिनटों में पानी फिर जाता है.
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