बिहार : क्षमता से चार गुना ज्यादा टिकट कटा, 3 दिनों से हजारों यात्री फंसे स्टेशन पर हालात विस्फोटक
Updated at : 08 Oct 2017 11:19 AM (IST)
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सहरसा : 15 हजार यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ पाने के कारण मंझधार में फंस गये हैं. इन यात्रियों में रोजी-रोटी की तलाश में परदेस जाने वाले मजदूरों की संख्या ज्यादा है. ये लोग सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, खगड़िया आदि जिलों के हैं. सभी स्टेशन पर ही तीन दिनों से रात-दिन जमे हुए हैं. स्थिति […]
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सहरसा : 15 हजार यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ पाने के कारण मंझधार में फंस गये हैं. इन यात्रियों में रोजी-रोटी की तलाश में परदेस जाने वाले मजदूरों की संख्या ज्यादा है.
ये लोग सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, खगड़िया आदि जिलों के हैं. सभी स्टेशन पर ही तीन दिनों से रात-दिन जमे हुए हैं. स्थिति विस्फोटक है. लोगों का कहना है कि ट्रेन पर चढ़ने के दौरान भगदड़ की स्थिति हो जाती है. इसके कारण बड़ा हादसा हो सकता है.
शनिवार को हालात बेकाबू हो गया था, लेकिन पुलिस बल के कारण अप्रिय घटना होने से बचा. शनिवार की सुबह मजदूरों का धैर्य टूट गया, जिसके बाद ट्रेन रोकी दी. ट्रेन में एक बार में 26 सौ के बदले लगभग चार हजार यात्री ट्रेन पर सवार हो पाते हैं, लेकिन जितने लोग चढ़ते हैं, उससे ज्यादा नये यात्री बाहर से आ जाते हैं.
लोगों का धैर्य टूटा, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो जायेगा. सहरसा से अमृतसर के लिए रोजाना खुलने वाली जनसेवा एक्सप्रेस का हाल काफी बुरा है. 22 बोगियों वाली इस रेलगाड़ी में बमुश्किल 26 सौ लोगों के बैठने की सीट होती है. लेकिन पलायन के इस सीजन में इस पर रोज 15 हजार से अधिक यात्री सवार हो सफर कर रहे हैं.
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