2008 के रास्ते ही बाढ़ मचा रहा तबाही

Published at :20 Aug 2017 6:26 AM (IST)
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2008 के रास्ते ही बाढ़ मचा रहा तबाही

बाढ़. सोनवर्षा, पतरघट व बनमा के सभी तो सौरबाजार के आठ पंचायत प्रभावित कुसहा त्रासदी के ठीक नौ वर्षों बाद फिर उसी रास्ते जिले में तबाही आयी है. बाढ़ के कारण गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है. एक दर्जन से अधिक पुलिये टूट गये हैं. बाढ़ की विभीषिका को देख लोगों को डर लग […]

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बाढ़. सोनवर्षा, पतरघट व बनमा के सभी तो सौरबाजार के आठ पंचायत प्रभावित

कुसहा त्रासदी के ठीक नौ वर्षों बाद फिर उसी रास्ते जिले में तबाही आयी है. बाढ़ के कारण गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है. एक दर्जन से अधिक पुलिये टूट गये हैं. बाढ़ की विभीषिका को देख लोगों को डर लग रहा है.
सहरसा : कुसहा त्रासदी के ठीक नौ वर्षों बाद जिले के उन्हीं प्रभावित प्रखंडों व गांवों में बाढ़ की वही तसवीर दुहरा गयी है. अभी नौ वर्ष पुरानी तबाही का निशान मिटा भी नहीं कि कोसी ने फिर से पुराने रास्ते को अख्तियार किया है. सौरबाजार के 17 में आठ पंचायत बाढ़ की विभीषिका को झेल रहे हैं, तो सोनवर्षा व पतरघट के सभी 22 व बनमा इटहरी के सभी सात पंचायतों में सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है. बाढ़ का यह पानी सुरसर, तिलावे सहित क्षेत्र से बहने वाली अन्य कोसी की सहायक नदियों के उफान से आया है,
जबकि बनमा में इन नदियों के अलावे सलखुआ में तटबंध से आजाद होने के बाद कोसी का पानी भी प्रवेश कर तबाही में अपना योगदान दे रहा है. इन सभी बाढ़ प्रभावित पंचायत व गांवों का हाल काफी बुरा हो गया है. जहां लगभग दो लाख लोग रोज बाढ़ से दो-चार हो रहे हैं.
सड़क, पुलिया व बह गये एप्रोच
सबसे भयावह स्थिति सोनवर्षा प्रखंड की है. लगभग एक लाख 10 हजार की आबादी प्रभावित है. जहां लोगों के घरों में दो फीट या उससे भी अधिक पानी प्रवेश कर गया है. प्रखंड की तीन मुख्य सड़क पर बाढ़ का पानी चढ़ चुका है और वह लगातार उस सड़क को खंगालने में लगा हुआ है. बाढ़ अंदर गांवों के संपर्क पथ को बहा ले गयी है. लगभग दर्जन भर पुलिया ध्वस्त हो गए हैं. एप्रोच कट चुका है. बाढ़ के दौरान लोगों के समक्ष मवेशियों के चारे समेत बाजार से खाद्यान्न, दवा खरीदने व अन्य कई तरह की परेशानियां सामने खड़ी है. इससे निबटने के लिए उन्हें नाव की आवश्यकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से इन प्रभावित पंचायतों को अब तक पर्याप्त नाव मुहैया नहीं कराया गया है. हालांकि प्रशासन 16 नाव पानी में उतारने की बात कर रहा है, लेकिन क्षेत्र में बमुश्किल आधा दर्जन नाव दिख रहा है. जबकि परवाना अभी तक एक का भी नहीं बना है. बाढ़ पीड़ित तीन दिनों से लगातार सड़क जाम कर नाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन पर ऐसे जाम का कोई असर होता नहीं दिख रहा है. प्रखंड के देहद के मोहनपुर, विराटपुर के बैठ मुसहरी एवं हरिपुर बासा में बाढ़ राहत शिविर चलाये जा रहे हैं.
एनएच बंद, लौहपुल पर मंडरा रहा है खतरा
इधर पतरघट प्रखंड में धबौली-पामा व पतरघट टेकनमा मुख्य पथ पर पानी काफी वेग से बह रहा है, जबकि मधेपुरा से उदाकिशुनगंज जाने वाले एनएच 107 पर पस्तपार बाजार में बड़े पुल पर नदी का पानी ओवरफ्लो कर रहा है. इससे यह सड़क टूट रही है और इस सड़क पर यातायात पूर्णत: बंद हो गया है. इसके अलावे सौरबाजार से पतरघट आने के रास्ते में शीतलपट्टी स्थित लोहे के पुल पर भी खतरा मंडराने लगा है. नदी के बहाव में आये जलकुंभी के कारण इस पुल पर नदी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. पानी में डूब रहे गांव के लोग अपने माल-मवेशियों के साथ बैजनाथपुर अथवा सहरसा शहर की ओर कूच कर चुके हैं. प्रखंड की 80 हजार आबादी बाढ़ की चपेट में है. अत्यधिक प्रभावित होने के बाद भी यहां अब तक एक भी राहत शिविर शुरू नहीं किया गया है.
माल-मवेशी के साथ पलायन कर गये लोग
सात पंचायत वाला बनमा इटहरी भी बाढ़ से पूरी तरह बेहाल है. यहां सुरसर, तिलावे के अलावे सलखुआ में तटबंध टूटने के बाद कोसी का पानी प्रवेश कर बाढ़ का कारण बन रहा है. यहां भी गांव के गांव बाढ़ के पानी में प्लावित हो गये हैं. प्रखंड के गांवों को दूसरे गांव से जोड़ने वाली सड़कें ध्वस्त हो गयी हैं या उन पर पानी का रेत बह रहा है. खेत के खेत पानी में डूबे हुए हैं. इससे मवेशियों का चारा कहीं नजर नहीं आता है. प्रभावित लोग ऊंचे स्थलों पर शरण ले चुके हैं. कुछ स्कूलों में अपना डेरा-डंडा बसाये हुए हैं. जबकि कुछ लोग प्रशासन द्वारा सुगमा व सहुरिया में शुरू किये गये बाढ़ राहत शिविर में शरण ले रहे हैं. इधर सौरबाजार के कुल 17 में से आठ पंचायत और वहां की लगभग 12 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं. क्षेत्र में मात्र चार नावें चल रही हैं. बाढ़ पीड़ित जान-माल के साथ या तो नहर पर टेंट बना शरण ले रहे हैं या फिर अन्यत्र पलायन कर चुके हैं. यहां सौरबाजार में दो व कढ़ैया पंचायत में एक बाढ़ राहत शिविर खोला गया है.
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