16 माह बाद भी फर्जी शिक्षकों की सेवा नहीं की गयी समाप्त
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Aug 2017 6:00 AM (IST)
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जिले के विभिन्न प्रखंडों में हैं पदस्थापित, उठा रहे हैं मानदेय 2016 में सत्यापन के बाद डीइओ ने स्पष्टीकरण पूछते एफआइआर की कही थी बात सहरसा/सौरबाजार : जिले में फर्जी शिक्षकों के सत्यापन के बावजूद अधिकारियों की मौन सहमति से विभिन्न विद्यालयों में पदस्थापित ऐसे शिक्षक सरकार से लाखों रुपये की राशि का भुगतान ले […]
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जिले के विभिन्न प्रखंडों में हैं पदस्थापित, उठा रहे हैं मानदेय
2016 में सत्यापन के बाद डीइओ ने स्पष्टीकरण पूछते एफआइआर की कही थी बात
सहरसा/सौरबाजार : जिले में फर्जी शिक्षकों के सत्यापन के बावजूद अधिकारियों की मौन सहमति से विभिन्न विद्यालयों में पदस्थापित ऐसे शिक्षक सरकार से लाखों रुपये की राशि का भुगतान ले रहे हैं. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक अब्दुल खालिक ने 2016 में फर्जी शिक्षकों का सत्यापन कर स्पष्ट किया था कि जिले के विभिन्न विद्यालयों में पदस्थापित ऐसे शिक्षकों के प्रस्तुत किये सत्यापन कागजात में त्रुटि पायी गयी है.
20 अप्रैल 2016 को मांगा था स्ष्टीकरण: डीइओ ने 20 अप्रैल 2016 को उन सभी शिक्षकों से स्ष्टीकरण की मांग करते कहा था कि आपके नियुक्ति पत्र संबंधी शर्तों के कंडिका सात व आपके द्वारा प्रस्तुत शपथ-पत्र के विरुद्ध क्यों नहीं आप सबों की सेवा समाप्त करते हुए वेतन मद में ली गयी कुल राशि एक मुश्त वसूली करने के लिए संबंधित थाना में आप सबों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जाय. पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर अपना स्पष्ट प्रतिवेदन अधोहस्ताक्षरी को समर्पित करें,
अन्यथा यह समझा जाएगा कि इस संबंध में आपको कुछ नहीं कहना है. उसके बाद भी तीन दिन ही नहीं, बल्कि बर्षों बीत जाने के बावजूद फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति विभिन्न विद्यालयों में हैं व अधिकारियों की मौन सहमति से वे वेतन का भी उठाव कर रहे हैं. इस अवधि में डीपीओ नंद किशोर राम ने भी दो बार अलग-अलग ज्ञापांक व दिनांक से पत्राचार कर चुके हैं.
उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड में रमेश प्रसाद साहू, रेखा कुमारी, अजय कुमार सिंह, हाफिज मोहम्मद अलाउद्दीन, नौशाद आलम, रेखा कुमारी व रामनरेश कुमार, सोनवर्षाराज प्रखंड में देवेंद्र प्रसाद यादव, सुनीता कुमारी, कुमारी रेणु, सौर बाजार प्रखंड में गजेंद्र प्रसाद यादव, परितोष कुमार दास, विजय कुमार पासवान, शंभू प्रसाद, रामचन्द्र रजक, सत्येंद्र कुमार रंजन, ब्रह्मदेव प्रसाद यादव, कुमारी आशा रानी, मो ग्यासउद्दीन, कुमारी मालती झा, सुधाकांत झा, गणेश रजक, पतरघट प्रखंड में जगन्नाथ मोची, वसंत कुमार यादव, कल्पना कुमारी, निर्मला कुमारी, अमरेश कुमार, कुमारी प्रेमलता, सत्तरकटैया में विद्यानंद यादव, वीरेंद्र कुमार बिराना, चन्द्र माधव सिंह, शमीम अहमद कहरा (सहरसा सदर) में रेणु कुमारी, मनोज कुमार, अखिलेश कुमार, अनीता कुमारी, सीता कुमारी, शकील अहमद, दिनेश यादव, राघवेन्द्र खां व मो नाजीम, महिषी में रामेश्वर प्रसाद यादव, शिव कुमार यादव, दामोदर यादव, सुनील कुमार, देवेंद्र कुमार, ब्रह्मदेव कुमार, बेचन साहू, अब्दुल करीम, अंबिका प्रसाद ब्रह्मचारी,
मनोज कुमार ठाकुर, वीणा कुमारी, नवहट्टा में सुशील कुमार, मीना कुमारी, रमेश प्रसाद साह, विनोद कुमार साह, बीबी शमसा बेगम, सलखुआ में दिलीप कुमार ऐसे शिक्षक हैं जो अब भी पदस्थापित हैं व सरकार के निर्धारित मानदेय का लाभ उठा रहे हैं. अगर बारिकियों से फर्जीवाड़े के खेल की जांच की जाय तो यह भी शिक्षा विभाग के लिए बहुत बड़ा घोटाला हो सकता है. यह बात दीगर है कि आरंभ काल में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान त्रुटि को लेकर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. लेकिन नियुक्ति नहीं होने के कारण उच्च न्यायालय ने जमानत देकर अभ्यर्थियों को राहत दे दी थी.
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी ओमप्रकाश से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
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