बिहार में दिखा कानून का राज, लड़कियों के खिलाफ हिंसा में कई गुना बढ़ी सजा

बीते दो साल में कमजोर वर्ग अपराध अनुसंधान विभाग ने कार्रवाई करते हुए मानव तस्करों की कमर तोड़ दी है. पुलिस मुख्यालय ने शुक्रवार को जो आंकड़े जारी किये हैं वह कमजोर वर्ग की पीठ थपथपाने वाले हैं. नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के आरोपितों पर पॉक्सो एक्ट के तहत सजा दिलायी जा रही है.
पटना. बिहार में महिला और बच्चों का उत्पीड़न करने वालों पर कार्रवाईसजा दिलाने का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है. बीते दो साल में कमजोर वर्ग अपराध अनुसंधान विभाग ने कार्रवाई करते हुए मानव तस्करों की कमर तोड़ दी है. पुलिस मुख्यालय ने शुक्रवार को जो आंकड़े जारी किये हैं वह कमजोर वर्ग की पीठ थपथपाने वाले हैं. नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के आरोपितों पर पॉक्सो एक्ट के तहत सजा दिलायी जा रही है.
2020 में बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वालों 92 आरोपितों पर पॉक्सो एक्ट लगाया गया था. मात्र 126 दोषियों को सजा हुई थी. इसके विपरीत पिछले सात महीने में 268 कांड में पॉक्सो की धाराएं लगायी गयीं. 317 को सजा हुई. चार लोगों को फांसी और 72 को आजीवन कारावास की सजा दिलायी जा चुकी है. अप्रैल 2022 से जून 2022 तक 53 महिला 136 नाबालिग पुरुषों को मुक्त कराया गया. 89 मानव तस्कर भी पकड़े गये.
कमजोर वर्ग अपराध अनुसंधान विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो पॉक्सो एक्ट वाले कांड के निष्पादन की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. 2022 के दूसरे त्रैमास में 418 कांड प्रतिवेदित हुए. निष्पादन 458 कांड का हुआ. 227 मामलों में मुआवजा भी भेजा गया. मालूम हो कि नीतीश कुमार की सरकार जब से कायम हुई है महिलाओं के सशक्तीकरण पर लगातार काम कर रही है. महिलाओं के खिलाफ हिंसा में कमी आने के साथ साथ महिलाओं के गुनहगारों को समय सीमा के तहत सजा भी मिल रही है.
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कांड 92 270 268
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सजा 126 315 317
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फांसी 01 04 04
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आजीवन कारावास 37 61 72
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दस वर्ष से अधिक कैद 38 111 86
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दस वर्ष से कम कैद 49 122 109
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By Prabhat Khabar News Desk
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