बाबा गणिनाथ कॉलेज में भी की तोड़-फोड़

Published at :01 Jun 2017 11:11 AM (IST)
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बाबा गणिनाथ कॉलेज में भी की तोड़-फोड़

डेहरी सदर : शहर के जमुहार स्थित बाबा गणिनाथ कॉलेज के छात्रों ने बुधवार को इंटरनेट पर रोल नंबर डालने पर इंटर का रिजल्ट शो नहीं करने के कारण कॉलेज में जम कर तोड़ फोड़ किया. गुस्साये छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया. सुचना पाकर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित छात्रों को शांत […]

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डेहरी सदर : शहर के जमुहार स्थित बाबा गणिनाथ कॉलेज के छात्रों ने बुधवार को इंटरनेट पर रोल नंबर डालने पर इंटर का रिजल्ट शो नहीं करने के कारण कॉलेज में जम कर तोड़ फोड़ किया. गुस्साये छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया.

सुचना पाकर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित छात्रों को शांत करवाया. छात्रों ने बताया कि बाबा गणिनाथ की मान्यता रद्द होने के कारण नेहरू कॉलेज से इंटर का रजिस्ट्रेशन कराया गया था. फाॅर्म बाबा गणिनाथ कॉलेज से भरवाया गया था. रोल नंबर बोर्ड की वेबसाइट पर शो नहीं कर रहा था. इधर, कॉलेज के प्राचार्य रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि जो छात्र फेल कर गये हैं वही, कॉलेज में इस तरह की तोड़-फोड़ कर रहे हैं.

सासाराम सदर. किसी भी विषय के परीक्षा में असफल विद्यार्थियों को अभिभावकों को हमेशा साथ देना चाहिए. असफल हुए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि परीक्षा में असफल होने पर विद्यार्थियों के मन में नकारात्मक विचार आने लगता है. इससे वे तनावग्रस्त हो जाते है. इससे विद्यार्थी अप्रिय घटना करने के लिए तुल्य हो जाते है.

उक्त बातें बुधवार को नैदानिक मनोवैज्ञानिक चिकित्सक विप्लव सिंह ने कहीं. उन्होंने कहा कि परीक्षा में असफल विद्यार्थियों के परिजनों को धैर्य के साथ बच्चों को सहारा बनना चाहिए और आगे के भविष्य के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भुल कर भी अभिभावकों को तनावग्रस्त बच्चे को डांट-डपट या ताना नहीं मारना चाहिए. क्योंकि, किशोर अवस्था में मस्तिष्क का विकास सही रूप से परिस्थितियों के अनुकुल नहीं रहता है. इससे इस उम्र में तनावग्रस्त बच्चे गलत कदम उठाने के लिए उतारू हो जाते है. ऐसे में अभिभावकों को धैर्य के साथ बच्चे के तनाव होने वाले वजह से निबटने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

अभिभावक भी बच्चों की पढ़ाई पर दें ध्यान

रिजल्ट अच्छा नहीं आने का एक कारण स्कूल में बच्चों की उपस्थिति कम होना भी है. अभिभावक छात्रवृत्ति के लिए स्कूल में पूछने आते हैं, लेकिन बेटा-बेटी स्कूल जा रहे हैं या नहीं इसके संबंध में शायद ही कोई पूछता है.

जो सही नहीं है. हां, मैं मानती हूं कि इंटर में साइंस के शिक्षकों की कमी है. हाल के दिनों में स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है. उस अनुपात में शिक्षकों की जरूरत है. कम शिक्षक के कारण छात्र कोचिंग की ओर रूख कर रहे हैं. यह ठीक नहीं है. इस तरह के रिजल्ट से अभिभावक सचेत हो जायें. वह बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें. रिजल्ट अच्छा आ सकता है.

उर्मिला कुमारी, प्राचार्य, शेरशाह सूरी इंटरस्तरीय स्कूल,

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