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मुख्य पार्षद नाजिया व रीता सिन्हा को मिली नामांकन की इजाजत

पुलिस अभिरक्षा में आज नाजिया बेगम वार्ड 29 व सशक्त स्थायी समिति की सदस्य रीता सिन्हा वार्ड छह से करेंगी नामांकन सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद में हुए बहुचर्चित करोड़ों रुपये के एलइडी लाइट खरीद घोटाले में गत दिनों गिरफ्तार मुख्य पार्षद नाजिया बेगम व सशक्त स्थायी समिति सदस्य रीता सिन्हा गुरुवार को चुनाव के […]

पुलिस अभिरक्षा में आज नाजिया बेगम वार्ड 29 व सशक्त स्थायी समिति की सदस्य रीता सिन्हा वार्ड छह से करेंगी नामांकन

सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद में हुए बहुचर्चित करोड़ों रुपये के एलइडी लाइट खरीद घोटाले में गत दिनों गिरफ्तार मुख्य पार्षद नाजिया बेगम व सशक्त स्थायी समिति सदस्य रीता सिन्हा गुरुवार को चुनाव के लिए नामांकन करेंगी. नामांकन के लिए हाइकोर्ट ने बुधवार को इजाजत दे दी है.
पटना जेल से दोनों पार्षदों को लेकर पुलिस सासाराम आयेगी. पुलिस अभिरक्षा में दोनों महिला पार्षद नामांकन पर्चा दाखिल करेंगी. इसके बाद पुन: पटना बेउर जेल के लिए पुलिस उन्हें ले जाएगी. सशक्त स्थायी समिति की सदस्य रीता सिन्हा के बेटे राकेशचंद्र सिन्हा सिप्पू ने बताया कि न्यायमूर्ति धीरेंद्र कुमार की अदालत ने दोनों महिला पार्षदों को नामांकन की इजाजत दी है. दोनों महिला पार्षद 27 अप्रैल को सासाराम में नामांकन करेंगी.
जानकारों की माने तो मुख्य पार्षद नाजिया बेगम अपने वार्ड 29 के लिए और सशक्त स्थायी समिति सह वार्ड 5 की पार्षद रीता सिन्हा अपना वार्ड आरक्षित होने के कारण वार्ड 6 के लिए नामांकन पत्र दाखिल करेंगी.
गौरतलब है कि 24 अप्रैल 2017 को निगरानी की टीम ने मुख्य पार्षद नाजिया बेगम, सशक्त स्थायी समिति सदस्य रीता सिन्हा व विनोद प्रसाद को उनके घर से गिरफ्तार कर ली थी. तीनों पार्षदों निगरानी कोर्ट ने न्यायायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. नगर पर्षद के चुनाव के लिए नाजिया बेगम उसी दिन 24 अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल करना था. तैयारी पूरी हो चुकी थी कि सुबह करीब पांच बजे निगरानी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. छह में दो फरार आरोपित उप मुख्य पार्षद चंद्रशेखर सिंह व शशि पांडेय क्रमश: वार्ड 8 व 12 से नामांकन पत्र दाखिल कर चुकी हैं. वहीं, गिरफ्तार पार्षद रीता सिन्हा के बेटे राकेश चंद्र सिन्हा वार्ड 6 से तथा मुख्य पार्षद के पति मोहम्मद अली वार्ड 28 के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है.
सामग्री खरीद में हुआ था करोड़ों का घोटाला
वर्ष 2014 से 2016 तक नगर पर्षद में करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की लैपटॉप, हाई मास्ट लाइट, डेकोरेटिव पोल स्ट्रीट लाइट, एलइडी लाइट, रेडिमेड यूरिनल-शौचालय आदि की खरीद हुई थी. उस समय टेंडर से लेकर वर्क ऑर्डर तक की प्रक्रिया एक सप्ताह से कम समय में पूरी कर ली गई थी. यूरिनल आनन-फानन लगाये गये, जिसका परिणाम हुआ कि कुछ ही दिनों में अधिकांश उपयोग के लायक नहीं रहे. एलईडी बोर्ड की हालत ऐसी रही कि कुछ दिनों के बाद एक-एक कर बंद हो गई. स्ट्रीट डेकोरिटव लैंप के लिए कई जगह बेतरतीब तरीके से पुरानी जीटी रोड के बीच में डिवाइडर बना दिया गया, जो दुर्घटना के आज भी कारण बन रहे हैं. कुछ डेकरोटिव स्ट्रीट लैंप सड़क के किनारे लगा दिये गये. लैपटॉप खरीद में भी बाजार दर से अधिक के भुगतान का आरोप लगा. करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की खरीद हुई, लेकिन हो-हल्ला मचने पर भुगतान आधा ही हो सका. शहरवासियों का आधा पैसा बच गया.
Prabhat Khabar Digital Desk
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