कार्ड नहीं, 24 सौ लाइसेंस फंसे

Published at :28 Jun 2016 7:41 AM (IST)
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कार्ड नहीं, 24 सौ लाइसेंस फंसे

शहर में जिधर देखों नाबालिगों के हाथ में वाहन दिख रहा है़ इस पर परिवहन विभाग की नजर नहीं पड़ रही है़ विभाग की तरफ जांच अभियान चलाने की जानकारी नहीं है़ पुलिस के जांच अभियान से ही उनका काम चल रहा है़ विभाग की सुस्ती के कारण ही लाइसेंस नहीं बन रहा है़ विभाग […]

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शहर में जिधर देखों नाबालिगों के हाथ में वाहन दिख रहा है़ इस पर परिवहन विभाग की नजर नहीं पड़ रही है़ विभाग की तरफ जांच अभियान चलाने की जानकारी नहीं है़ पुलिस के जांच अभियान से ही उनका काम चल रहा है़ विभाग की सुस्ती के कारण ही लाइसेंस नहीं बन रहा है़ विभाग में रोज करीब डेढ़ सौ आवेदन जमा होता है़
सासाराम (रोहतास) : परिवहन विभाग की सुस्ती के कारण जिले में यातायात व्यवस्था का हाल खराब है़ विभाग न तेजी में ड्राइविंग लाइसेंस बना रहा है और न ही कभी फर्जी चालकों को पकड़ने के लिए कोई कदम ही उठा रहा है़ आंकड़ों के अनुसार जिले में 24 हजार से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड के आभाव में फंसे हैं. युवा चालक सादे कागज का लाइसेंस ले कर बेखौफ वाहन चला रहे हैं.
विभाग की इस सुस्ती का फायदा शहर में युवा उठाने में लगे हैं. हर जगह कम उम्र के युवा दो पहिया व तीन पहिया चलते दिख जा रहे हैं. शहर में स्कूली छात्रों लहरिया कट बाइक चलाने के कारण तो रोज कहीं न कही घटना होती रहती है़ यह बगल से ऐसे गुजरते हैं कि जैसे हवा हों. इस पर रोक लगाने को लेकर परिवहन विभाग की सुस्ती भी साफ झलक रही है. पुलिस विभाग के तरफ से भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है़ लाइसेंस बनाने को लेकर भी किसी तरह के नियमों का पालन नहीं हो रहा है़
आवेदक लगा रहे डीटीओ कार्यालय का चक्कर: जिला परिवहन पदाधिकारी कार्यालय का हाल भी गजब है. प्रतिदिन लगभग 150 लोग लाइसेंस के लिए आवेदन जमा करते हैं. पिछले करीब छह माह से विभाग में लाइसेंस कार्ड का अभाव बना हुआ है. इसके कारण करीब 24 हजार आवेदक डीटीओ कार्यालय का लाइसेंस के लिए चक्कर लगा रहे हैं.
सादे कागज पर लाइसेंस डाल रहा परेशानी में : कार्ड के अभाव में डीटीओ कार्यालय आवेदकों को सादे कागज पर लाइसेंस बना कर देता है.
यही लाइसेंस ले कर वाहन चालक घूमते हैं. शहरवासी अमित कुमार, नीरज सिन्हा, प्रताप सिंह आदि ने बताया कि सादे कागज के लाइसेंस दूसरे जिलों या प्रदेशों में मान्य नहीं किये जा रहे हैं. वहां हमें फजीहत उठानी पड़ती है. यही हाल है कि कई माह से कार्ड ही नहीं है. परिवहन विभाग पैसा जमा करा लिया है. लेकिन कार्ड देने में आनाकानी कर रहा है.
बोले वार्ड पार्षद
वार्ड पार्षद विनोद कुमार कहते हैं कि फजलगंज में दोपहिया व तीन पहिया वाहनों से कई बार दुर्घटनाएं हुई है. तमाम दुर्घटनाओं में शामिल वाहनों के चालक नाबालिग होते हैं. शहरवासी दशरथ प्रसाद ने विभाग पर ही सवालिया निशान उठाते हुए कहा है कि लाइसेंस निर्गत करने का विभाग क्या मापदंड है? अगर नाबालिग बिना लाइसेंस वाहन चला रहे हैं, तो विभाग की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ रही है.
लाइसेंस जांचने का जिम्मा पुलिस के पास
जिला परिवहन पदाधिकारी जय कुमार द्विवेदी भी यह बताने में असमर्थ दिखे की आखिरी बार कब लाइसेंस के लिए वाहन चालकों की जांच हुई थी़ उन्होंने इतना ही कहा कि सभी थानों को ड्राइविंग लाइसेंस व वाहन लाइसेंस जांच करने का निर्देश दिया गया है. उनका कहना है कि पुलिस की तरफ से नियमित जांच हो रही है़ इसमें चार माह में चार लाख रुपये वसूले गये हैं.
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