जरा हमारे इस ब्रिज की भी परवाह कीजिए

Published at :06 Feb 2016 8:51 AM (IST)
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जरा हमारे इस ब्रिज की भी परवाह कीजिए

उभरे हैं कई गड्ढे, हर रोज लग रहा जाम कई जगह रेलिंग टूटी, तो पुल भी क्षतिग्रस्त सासाराम(ग्रामीण) : सासाराम-आरा रोड पर बने पुराने ओवरब्रिज पर उभरे गड्ढे जानलेवा होते जा रहा हैं. पूर्वी हिस्से में पुल भी क्षतिग्रस्त हो चुका है. इससे ब्रिज का पानी नीचे टपक रहा है. कई जगहों पर रेलिंग भी […]

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उभरे हैं कई गड्ढे, हर रोज लग रहा जाम
कई जगह रेलिंग टूटी, तो पुल भी क्षतिग्रस्त
सासाराम(ग्रामीण) : सासाराम-आरा रोड पर बने पुराने ओवरब्रिज पर उभरे गड्ढे जानलेवा होते जा रहा हैं. पूर्वी हिस्से में पुल भी क्षतिग्रस्त हो चुका है. इससे ब्रिज का पानी नीचे टपक रहा है. कई जगहों पर रेलिंग भी क्षतिग्रस्त हो गया है. आये दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है. ओवरब्रिज पर कई बार बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं. इसको लेकर दो बार हंगामा हुआ व आपातकाल जैसी स्थिति बन गयी. इसके बावजूद जिला प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है.क्षतिग्रस्त पुल मौत को दावत दे रहा है, लेकिन संबंधित अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं. उभरे गड्ढों से चलना भी मुश्किल हो गया है. पुल में ढलाई के वक्त लगाये गये रड भी खराब होने को हैं.
देख-रेख का घोर अभाव: ओवरब्रिज की समुचित देखभाल नहीं किया जा रही है. यही कारण है उभरे गड्ढों को न तो भरा जाता है और न ही टूटी रेलिंग की मरम्मत की जाती है.
चुनाव में दिखता है चकाचक: जब-जब चुनाव नजदीक आता है व बीआइपी कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो उभरे गड्ढों की मरम्मत की जाती है. इसके बाद स्थिति यथावत बन जाती है. ब्रिज के अलावा अन्य सड़कें भी चुनाव के समय चकाचक दिखती हैं.
होती है ऑटो की पार्किंग: ब्रिज के दक्षिणी छोर (डाक बंगला मार्केट) पर ब्रिज के शुरुआत में टेंपो की पार्किंग की जा रहा है. दूसरी ओर गड्ढे से बचने के लिए लोग वाहनों को टेढ़ी कर के खड़ी करते है. इससे दोनों तरफ गड्ढा व बीच में गड्ढा बनता है, लिहाजा ओवरब्रिज जाम हो जाता है.
टपक रहा पानी: ओवरब्रिज पर लोग शौच भी करते हैं. पूर्वी छोर पर क्षतिग्रस्त पुल पर गढ़ा हो रहा है. यहां पानी व धूल जमा होता है, जो धीरे धीरे नीचे टपकता है. इससे लोगों को परेशानी होती है.
अभियान भी बेअसर : शहर में स्वच्छता अभियान प्रशासन व रैप के छात्रों द्वारा चलाया गया, लेकिन अभियान का असर नहीं रहा. यही कारण है कि ब्रिज पर कूड़े भी लगे रहते हैं. इससे किसी का कोई लेना-देना नहीं है.
जल संकट से जूझ रहा इंद्रपुरी बराज
रोहतास को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां किसानों की मुख्य जीविका भी यही है. इस जिले का धान राज्य के अन्य जिलों के अलावा दूसरे राज्यों को भी जाता है. लेकिन, इन दिनों यहां के किसानों पर मानो आफत आ गयी है. किसानों ने अपनी हैसियत के अनुसार धान की खेती तो की, पर मौसम ने साथ नहीं दिया. अब आसरा सरकार का था, तो वह भी धीरे-धीरे धूमिल हो रहा. किसानों को पटवन को लेकर काफी समस्या हुई. अब जब धान का मौसम गुजर गया है, तो अन्य फसलों के पटवन को लेकर भी किसानों को काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है.
सासाराम (ग्रामीण) : इंद्रपुरी बराज जल संकट से जूझ रहा है. ऐसी स्थिति में जिले के किसानों का सिंचाई कार्य प्रभावित हो रही है. इसमें किसानों में आक्रोश है. गौरतलब है कि पूर्व में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने जलापूर्ति को लेकर वाणसगर को पत्र लिखा था, लेकिन जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिला. अब केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी फैक्स कर संदेश भेजा है. उम्मीद है कि जलापूर्ति में सुधार होगा. जलापूर्ति प्रभावित होने व बराज में पानी का आवक कम होने से फिलहाल कटौती जारी है. विभाग द्वारा की जा रही पहल महज खानापूर्ति भर है, जो सिंचाई के लिए उपयुक्त नही है. ऐसी स्थिति में किसानों में आक्रोश है. जिन सोन नहरों में जलापूर्ति की जा रही है. वह उसकी क्षमता के तिहाई भी नही है. बिहिया शाखा नहर समेत अन्य कुछ नहरों में भी जलापूर्ति ठप है.
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