नक्सलियों की मांद में अपराधियों ने दी दस्तक

Published at :15 Jan 2016 3:43 AM (IST)
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नक्सलियों की मांद में अपराधियों ने दी दस्तक

नौहट्टा/डेहरी ऑन सोन : सोन नदी व कैमूर पहाड़ी की तलहटी में बसे बलथुआं के लोग बुधवार की रात सोने की तैयारी कर ही रहे थे कि अचानक चली गोलियों की आवाज से सहम गये. कुछ लोग इधर उधर भागे तो पता चला कि गांव के ही जितेंद्र मिश्रा को किसी ने गोली मार दी. […]

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नौहट्टा/डेहरी ऑन सोन : सोन नदी व कैमूर पहाड़ी की तलहटी में बसे बलथुआं के लोग बुधवार की रात सोने की तैयारी कर ही रहे थे कि अचानक चली गोलियों की आवाज से सहम गये. कुछ लोग इधर उधर भागे तो पता चला कि गांव के ही जितेंद्र मिश्रा को किसी ने गोली मार दी. जयराम मिश्रा का पुत्र घायल पड़ा था, जिसे लोगों ने इलाज के लिए जिला मुख्यालय से सटे नारायण मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे.
लेकिन, रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी. नौहट्टा के थानाध्यक्ष सत्येंद्र सत्यार्थी पुलिस बल से साथ घटना स्थल पर पहुंचे और अपराधियों की गिरफ्तारी का प्रयास शुरू कर दिया. इस हत्या कांड को भूमि विवाद से जोड़ कर देखा जा रहा है.
पुलिस कर रही अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास : पुलिस को घटनास्थल के पास से जूता व गोली के खोगा मिला है. पुलिस बल के साथ कुत्ता स्कवायड भी कुछ शुरुआती सबूतों के आधार पर अपराधी तक पहुंचने का प्रयास किया. गुरुवार को भी सबूतें जुटाने में पुलिस लगी रही.
हत्या के पीछे भूमि विवाद या कुछ और : जितेंद्र मिश्र का अपने पट्टीदार अशोक मिश्रा से भूमि विवाद चल रहा है. इसको लेकर सात माह पूर्व मारपीट में अशोकमिश्रा की मां शकुंतला देवी की मौत हो गयी थी. इसका आरोपित जितेंद्र मिश्रा था. हालांकि पुलिस अन्य एैंगल पर जांच कर रही है. सच्चाई तक तो पुलिस पहुंचने का प्रयास कर रही है.
अस्पताल नजदीक होता तो बच सकती थी जान
गांववालों का कहना है कि नक्सल प्रभावित इलाका रहने की वजह से क्षेत्र में कई तरह की बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. समुचित चिकित्सा व्यवस्था के लिए करीब 50-60 किलोमीटर दूर डेहरी या जिला मुख्यालय सासाराम जाना पड़ता है. घटना के बाद नजदीक अस्पताल रहता तो वहां समुचित इलाज संभव होता तो शायद मृतक की जान बच कसती थी.
पहले नक्सलियों के दरबार में निबटते थे ऐसे मामले
प्रभावित रहे इस इलाके पर कभी नक्सलियों की समानांतर सरकार हुआ करती थी. सामाजिक झगड़े या भूमि विवाद की समस्या जनता दरबार लगा कर ऑन द स्पॉट निबटाया जाता था और दोषी को तत्काल सजा होती थी. नक्सली अक्सर अपने चहेतों के पक्ष में फैसले दिया करते थे. लेकिन, अब वर्तमान पुलिस व प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत न्याय होता है और लोग खुश हैं.
अलग घर बना कर रहता था जितेंद्र
मृतक जितेंद्र मिश्रा की पहली शादी अपने ही समाज के सावित्री देवी से हुई थी. उनके दो दो पुत्र आरजू मिश्र, विकास मिश्रा व एक लड़की प्रीति कुमारी है. इस के बावजूद जितेंद्र मिश्रा ने गांव के ही रहनेवाली मीना देवी से कोर्ट में दूसरी शादी की थी.
मीना देवी भी शादीशुदा थी. मीना के पहले पति का नाम रामजीवन साह है. वह कोलकाता में रह कर काम करता है. मीना देवी का रामजीवन साह से दो लड़की सीमा व प्रतिमा है. दोनों की शादी हो चुकी है. दो लड़की की मां से शादी करने के बाद जितेंद्र मिश्रा अपना अलग घर बना कर रह रहा था.
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