बीज ग्राम के किसानों को नहीं मिला बीज

Published at :13 Dec 2015 12:21 AM (IST)
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बीज ग्राम के किसानों को नहीं मिला बीज

अनदेखी. अधिकारियों की लचर व्यवस्था से बढ़ी परेशानी डेहरी ऑन सोन : प्रखंड क्षेत्र में धान की कटनी के बाद गेहूं की बुआई चल रही है. इस वर्ष भी सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के तहत किसानों के बीच अनुदानित दर पर बीज का वितरण किया गया. लेकिन, किसानों की संख्या व वितरित बीज की मात्रा […]

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अनदेखी. अधिकारियों की लचर व्यवस्था से बढ़ी परेशानी
डेहरी ऑन सोन : प्रखंड क्षेत्र में धान की कटनी के बाद गेहूं की बुआई चल रही है. इस वर्ष भी सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के तहत किसानों के बीच अनुदानित दर पर बीज का वितरण किया गया. लेकिन, किसानों की संख्या व वितरित बीज की मात्रा ऊंट के मुंह में जीरे के समान रहा. सबसे मायूस करने वाली बात यह रही कि प्रखंड में चयनित दो बीज ग्राम के सैकड़ों चयनित किसान को एक छटांक भी बीज मयसर नहीं हुआ.
इसका कारण प्रखंड को बीज ग्राम योजना में बीज नहीं प्राप्त होने बताया जाता है. मायूस किसान अंतत: ऊंचे दामों पर बाजार से बीज खरीदने को मजबूर हैं. वहीं, प्रखंड में तेलहन के लिए मशहूर पंचायत पतपुरा, बरांव कलां, मझियांव व चकनहा के किसान अनुदानित दर पर बीज नहीं मिलने से मायूस है.
दलहन की खेती करनेवाले किसानों की संख्या प्रखंड क्षेत्र में पांच सौ से अधिक बतायी जाती है. प्रखंड में दलहन की बुआई सर्वाधिक मझियांव, बरांव कलां, पतपुरा व दहाउर पंचायतों के किसानों द्वारा की जाती है. पांच सौ से अधिक किसानों के बीच वितरित करने के लिए दलहन कार्यक्रम के तहत चना प्रत्यक्षण के लिए केवल 23 पैकेट व अतिरिक्त दलहन कार्यक्रम के तहत जीरो टिलेज से चना प्रत्यक्षण के लिए केवल 68 पैकेट बीज का प्राप्त होना ऊंट के मुंह में जीरा समान नहीं, तो और क्या है.
गेहूं के बीज का हुआ कम वितरण : प्रखंड के किसानों के बीच अनुदानित दर पर बहुत कम गेहूं बीज का वितरण किये जाने से भी किसान काफी दुखी है. जीरो टिलेज प्रत्यक्षण से राज्य योजना के तहत किसानों के बीच वितरण के लिए केवल 253 किट बीज ही प्राप्त हुआ, जो काफी कम माना जा रहा है.
इसी प्रकार हरित क्रांति योजना से 119 किट, अनुदानित दर पर 180 क्विंटल व बरांव कलां कलस्टर को 50 किट बीज उपलब्ध कराया गया. प्रखंड क्षेत्र में किसानों के बीच इतने कम मात्रा में बीज का उपलब्ध कराया जाना काफी चर्चा का विषय बना बना हुआ है. किसान आखिर करें, तो क्या करें. बाजार से ऊंचे दाम पर बीज खरीदने को मजबूर किसान आखिर फरियाद किस से करें. उनकी समझ में नहीं आता.
किसान करे, तो क्या करे : किसान अरुण कुमार गुप्ता उर्फ लल्लू जी कहते हैं कि एक तरफ सरकार जहां किसानों के उत्पादित फसल धान की खरीद में बोनस देने की घोषणा से कतरा रही है, वहीं दूसरी तरफ अनुदानित दर पर हमें बीज भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है. एेसी स्थिति में किसान करे, तो क्या करे. वहीं, राम प्रवेश सिंह कहते हैं कि बीज ग्राम के रूप में चयनित गांवों में बीज का उपलब्ध नहीं कराया जाना कृषि विभाग की विफलता है. सरकार को चाहिए कि इसकी जांच करा कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करें.
उधर, सुरेंद्र राय कहते हैं कि आर्थिक रूप से टूट चुके किसानों को खेती करने में मदद करने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए. गेहूं दलहन तेलहन के उच्च कोटि के बीज के साथ खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करा कर सरकार किसानों की मदद कर सकती है. मुन्ना दूबे ने बताया कि कृषि को उन्नत व किसानों को मजबूत बनाने का सरकार का दावा इस प्रखंड में खोखला साबित हो रहा है. किसान आर्थिक रूप से टू चुके हैं.
बांट दिया गया है बीज : इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी शैलेंद्र प्रसाद कहते हैं कि बीज ग्रामों के लिए बीज उपलब्ध नहीं होने के कारण बीज नहीं दिया जा सका. प्रखंड कार्यालय को उपलब्ध बीज को किसानों के बीच बांट दिया गया है.
प्रखंड क्षेत्र के दो गांवों तंडवा व बेरकप को बीज ग्राम के रूप में कृषि विभाग द्वारा चयनित किया गया है. मझियांव पंचायत के टंड़वा में चने की खेती करने व बेरकप गांव में मसूर की खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने की योजना थी.
कार्यक्रम के तहत उक्त गांवों में प्रत्येक गांव के एक सौ किसानों को चयन कर उन्हें अनुदानित दर पर बीज उपलब्ध करा उक्त फसलों का उत्पादन बढ़ाना व किसानों को अधिक मुनाफा पहुंचाना ही मुख्य उद्देश्य था. योजना के तहत दोनों गांवों के सौ-सौ किसानों का चयन कर प्रखंड कृषि कार्यालय द्वारा सूची बना ली गयी थी, ऐसा सूत्र बताते हैं.
चना बीज ग्राम टंडवा के प्रत्येक किसान को अनुदानित दर पर 32 किलो बीज उपलब्ध कराना था. वहीं, मसूर बीज ग्राम बेरकप के प्रत्येक किसान को 16 किलो बीज उपलब्ध कराना था. प्रखंड कृषि कार्यालय की योजना से उक्त गांवों के किसान आस लगाये बैठे थे, लेकिन जिले से बीज प्राप्त नहीं होने के कारण उन्हें बीज उपलब्ध नहीं कराया जा सका. इससे उनके बीच मायूसी छा गयी.
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