एसएनसीयू में जिंदगी के लिए जूझ रहे चार बच्चे

Published at :10 Dec 2015 8:31 AM (IST)
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एसएनसीयू में जिंदगी के लिए जूझ रहे चार बच्चे

शिशु रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर छुट्टी पर नर्स के भरोसे चल रहा बच्चों का इलाज सासाराम (ग्रामीण) : सदर अस्पताल के एसएनसीयू (गहन शिशु चिकित्सा केंद्र) में भरती चार नवजात जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं. इनकी देखभाल के लिए सदर अस्पताल में कोई चिकित्सक तैनात नहीं किया गया है. इसका मुख्य कारण सदर […]

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शिशु रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर छुट्टी पर
नर्स के भरोसे चल रहा बच्चों का इलाज
सासाराम (ग्रामीण) : सदर अस्पताल के एसएनसीयू (गहन शिशु चिकित्सा केंद्र) में भरती चार नवजात जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं. इनकी देखभाल के लिए सदर अस्पताल में कोई चिकित्सक तैनात नहीं किया गया है.
इसका मुख्य कारण सदर अस्पताल के बच्चा विभाग में केवल एक ही विशेषज्ञ डॉक्टर का होना है, जो छुट्टी पर चले गये है. ऐसी स्थिति में भरती नवजात की देखभाल व आवश्यकता के अनुसार दी जाने वाली दवाइयां भी नर्सों के भरोसे है. इससे बच्चों का उचित इलाज नहीं हो रहा है. अब सवाल है कि जब चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे, तो इन बच्चों को भरती ही क्यों किया गया? हालांकि, इन सवालों के जवाब में घिरे अधिकारी कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं. दूसरी ओर बच्चे एक-एक दिन जिंदगी का गिन रहे हैं.
डीएस ने भेजा सीएस को त्राहिमाम संदेश : अस्पताल के उपाधीक्षक ने पत्रांक 1524 से मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रोहतास को एक पत्र भेज कर एसएनसीयू के लिए चार चिकित्सकों की पदस्थापना या प्रतिनियुक्ति की मांग की है. उन्होंने कहा है कि एसएनसीयू को चलाने के लिए चार चिकित्सकों की जरूरत है. लेकिन, यहां एक चिकित्सक उपलब्ध हैं इसके कारण चिकित्सीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
छह दिन बंद रहेंगा अस्थि ओपीडी : छह दिनों तक अस्थि ओपीडी बंद रहेंगे. अस्पताल प्रबंधन ने इससे संबंधित एक सूचना भी चिपका दी है, जिस पर लिखा है कि दिनांक नौ दिसंबर से 14 दिसंबर तक चिकित्सक के जयपुर कॉन्फ्रेंस में चले जाने के कारण कमरा नंबर 16 बंद रहेगा. गौरतलब है कि ओपीडी बंद हो जाने से कई मरीज लौट रहे हैं. इससे अस्पताल आनेवाले मरीजों में काफी आक्रोश है.
सार्वजनिक नहीं की गयी सूचना : बच्चा विभाग के डॉक्टर के अवकाश पर जाने के बाद अब अस्थि विभाग के चिकित्सकों के कॉन्फ्रेंस में जाने की सूचना अधिकारियों ने सार्वजनिक नहीं है.
बल्कि, एक बोर्ड पर चिपका दिया है. इसके कारण मरीज तो अस्पताल आ ही रहे हैं और उन्हें परेशानी हो ही रही है. यदि इस सूचना को सार्वजनिक कर दी जाती है, तो लोगों को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.
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