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सुख में इंसान भगवान का नाम भूल जाता है : गोपालाचार्य

Updated at : 14 Mar 2019 1:46 AM (IST)
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सुख में इंसान भगवान का नाम भूल जाता है : गोपालाचार्य

नासरीगंज : प्रखंड के मंगरांव गांव में मां महामाया सह बजरंगबली व बुढ़ी मां के पावन पुनर्स्थापना के अवसर पर चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ बुधवार को पूर्णाहुति व भंडारे के साथ संपन्न हो गया. श्री प्रतिपाद भयंकर गद्दी अंतर्गत घरवासडीह मठ के मठाधीस श्री-श्री 1008 श्री जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री नारायणाचार्य जी महाराज […]

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नासरीगंज : प्रखंड के मंगरांव गांव में मां महामाया सह बजरंगबली व बुढ़ी मां के पावन पुनर्स्थापना के अवसर पर चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ बुधवार को पूर्णाहुति व भंडारे के साथ संपन्न हो गया.

श्री प्रतिपाद भयंकर गद्दी अंतर्गत घरवासडीह मठ के मठाधीस श्री-श्री 1008 श्री जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री नारायणाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में छह दिवसीय यज्ञ का आयोजन किया गया था. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन कुंड में पड़ रही आहुति से पूरा वातावरण सुगंधित हो रहा था. इसके बाद दोपहर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया.
भंडारे में आसपास के गांवों के हजारों की संख्या में साधु, महिला, पुरुष, छोटे-छोटे बच्चे-बच्चियों ने प्रसाद ग्रहण किया. पूर्णाहुति के दौरान लक्ष्मीनारायण भगवान सहित विभिन्न देवी-देवताओं की गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था.
नारायणाचार्य जी महाराज ने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ के आयोजन से न सिर्फ क्षेत्र का वातावरण शुद्ध होता है बल्कि क्षेत्र धन-धान्य से परिपूर्ण होता है. लोगों में अच्छे विचार व संस्कार का प्रादुभाव होता है. यज्ञ की समाप्ति नहीं होती है. केवल पूर्णाहुति होती है. अत: आवश्यकता है कि हम अपने अंदर के दूर्गुणों का त्याग करें.
श्री पादपीठाधीश्वर श्रीमज्जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी गोपालाचार्य वेदांतमार्तणड जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सुख व दु:ख से जुड़े प्रसंग सुनाए. कहा कि सुख में इंसान भगवान का स्मरण करना भूल जाता है. भगवान की याद परेशानियों में आती है. कुंती से भगवान ने जब वरदान मांगने को कहा तो वह बोली कि मुझे विपत्ति दीजिए. विपत्ति में प्रभु का स्मरण किया जाता है.
सुख दिया तो इंसान भगवान को याद करना भूल जाता है. अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ पर बाण चलाया तो भगवान ने ही उसकी रक्षा की थी. भीष्म को अंतिम समय में जब प्रभु के दर्शन हुए तभी उन्होंने प्राण त्यागे थे. ऐसे ही कई उदाहरण हैं जो भक्त व भगवान के संबंधों को मजबूत बनाते हैं.
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