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अतिक्रमण से पटा पड़ा है सड़क का पूरा फुटपाथ सासाराम नगर : शहर के पुराने जीटी रोड के चौड़ीकरण करने में प्रशासन को काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी. चौड़ीकरण के साथ-साथ सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड व फुटपाथ भी बनानी है. पश्चिम में कुम्हऊ गेट से लेकर पूरब में एसपी जैन कॉलेज गेट तक रोड […]

अतिक्रमण से पटा पड़ा है सड़क का पूरा फुटपाथ
सासाराम नगर : शहर के पुराने जीटी रोड के चौड़ीकरण करने में प्रशासन को काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी. चौड़ीकरण के साथ-साथ सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड व फुटपाथ भी बनानी है. पश्चिम में कुम्हऊ गेट से लेकर पूरब में एसपी जैन कॉलेज गेट तक रोड काे चौड़ीकरण करने का प्रस्ताव पास हो गया है.
इसके लिए डीपीआर तैयार किया जा रहा है. एक सप्ताह में मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जायेगा. शहर में पुराने जीटी रोड के फुटपाथ व सरकारी भूमि पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में है. कहीं स्थायी रूप से लोग अतिक्रमण किये बैठे है, तो कहीं प्रशासन का ही कब्जा है. प्रशासन थोड़ी सख्ती कर इससे तो निबट लेगी, लेकिन जहां धार्मिक स्थान है वहां क्या होगा.
धर्म की आर में सरकारी भूमि पर हुआ निर्माण
शहर में करगहर मोड़ स्थित पुराने जीटी रोड पर बीचो-बीच मजार है. यहां सड़क की चौड़ाई भी बहुत कम है. मजार से उत्तर सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक है. बगल में ही निशान सिंह की प्रतिमा स्थापित है.
इसी तरह परिषदन गेट के समीप काली जी की पुरानी मंदिर है. जब चौड़ीकरण का काम शुरू होगा उस समय प्रशासन के सामने कई जटिल चुनौतियां होंगी. धार्मिक स्थल से छेड़छाड़ पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का डर होगा. अगर किसी एक धर्म के धार्मिक स्थल से निर्माण कार्य के दौरान छेड़छाड़ किया गया, तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है. इसका जिम्मेदार भी प्रशासन है. लोगों को खुली छूट है कि सार्वजनिक भूमि पर लोग कहीं भी बिना सोचे-समझे मंदिर व मजार बना लेते है.
अगर उसी समय प्रशासन सख्ती से रोकता, तो आज यह समस्या नहीं होती. कचहरी गेट के बगल में बजरंग बली के मंदिर अभी हाल के कुछ वर्ष पहले बना है. यहीं हाल प्रभाकर मोड़ पर देखा जा रहा है. एक वर्ष के अंदर लोग वहां दुर्गा जी का मंदिर बना लिए. लोग जिद में धर्म के साथ खिलवाड़ कर रहे है. और उसका खमियाजा सबको भुगतना होता है.
महापुरुषों की प्रतिमाओं की भरमार
पुराने जीटी रोड के दोनों तरफ राजनीतिक दल व प्रशासन मनमाने ढंग से महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करा दिये है. उन प्रतिमाओं को हटा कर दूसरे जगह स्थापित करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी.
शहर में दर्जन भर महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित है. ओझा टाउन हॉल की चहारदीवारी व इससे सटे आठ दुकानें भी सड़क चौड़ीकरण के जद में आयेंगी. जो सरकारी प्रतिष्ठान है उससे तो प्रशासन सहजता से निबट लेगी, लेकिन जो व्यावसायिक प्रतिष्ठान है. उसे हटाने में प्रशासन को काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी. लोग इसका विरोध करेंगे नुकसान के लिए मुआवजा भी देना होगा.
समस्या है, तो समाधान भी निकलेगा
इसी वित्तीय वर्ष पुराने जीटी रोड का चौड़ीकरण के लिए निर्माण काम शुरू होगा. इसके दोनों तरफ काफी अतिक्रमण है. महापुरुषों कि दर्जन भर प्रतिमाएं स्थापित है. कहीं, मंदिर है, तो कहीं मजार है. समस्या है तो इसका समाधान भी निकलेगा. सरकारी भूमि से एक-एक इंच अतिक्रमण को हटाया जायेगा. महापुरुषों की प्रतिमा के लिए जगह कि खोज हो रही है. वहां प्रतिमाओं को स्थापित कर पार्क का निर्माण कराया जायेगा. एक साथ सभी प्रतिमाएं होगी तो लोगों को सुविधा होगी. कुछ ऐसे प्रतिमा है जिसे चौंक पर स्थापित किया जायेगा
धार्मिक स्थल से छेड़छाड़ नहीं किया जायेगा. ओझा टाउन हॉल के समीप जिला पर्षद की जो दुकान है उसे दूसरे जगह शिफ्ट किया जायेगा. सड़क का चौड़ीकरण होनी है, तो निश्चित रूप होगा. इससे शहर का सौंदर्य बढ़ेगा, जाम से मुक्ति मिलेगी. लोगों को काफी सहूलियत होगी.
हाशिम खां, डीडीसी
जल्द शुरू होगा काम, तैयार हो रही डीपीआर
पुराने जीटी रोड के चौड़ीकरण का काम इसी वित्तीय वर्ष में शुरू होगा. करीब 60 करोड़ की लागत से निर्माण होना है. डीपीआर तैयार किया जा रहा है.
एक सप्ताह में उसे सरकार के पास भेज दिया जायेगा. चौड़ीकरण होने से शहर कि सौंदर्यता बढ़ जायेगी. आवागमन बाधित नहीं होगा. अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है. संभवत: अक्तूबर माह से काम शुरू हो जायेगा.
सुनील कुमार सुमन, कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग
चौड़ीकरण के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित
इसी वर्ष अक्तूबर से सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू होगा. चार लेन की सड़क बनेगी. करीब 45-45 फुट सड़क चौड़ा होगा. बीच में तीन से पांच फुट चौड़ा डिवाइडर बनेगा. सड़क चौड़ीकरण के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित है.
इसके बाद दोनों तरफ ड्रेनेज बनेगा. ड्रेनेज के बाद फुटपाथ का निमार्ण होगा. सरकारी भूमि से किसी तरह का अतिक्रमण हो उसे हटाया जायेगा. इसमें कहीं कोई समझौता नहीं होगा. शहर में कई ऐसे जगह है, जहां लोग सरकारी भूमि का घेराबंदी कर पक्का निर्माण कर लिये है.
जहां सरकारी प्रतिष्ठान है उसे दूसरे जगह स्थापित किया जायेगा. जहां निजी प्रतिष्ठान है उसे उचित मुआवजा दिया जायेगा. किसी भी योजना कि शुरूआत में थोड़ी परेशानी होती है. समाधान भी उसी परेशानी से ही निकलता है. महापुरुषों कि जो प्रतिमाएं है उसे चौंक-चौराहों पर स्थापित किया जायेगा. अन्य प्रतिमाओं को पार्क में स्थापित किया जायेगा.
डाॅ अशोक कुमार सिंह, विधायक सासाराम
Prabhat Khabar Digital Desk
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