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डब्ल्यूएचओ का मातृ व नवजात शिशुओं को स्वस्थ रखने पर बल

Updated at : 07 Apr 2025 5:48 PM (IST)
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डब्ल्यूएचओ का मातृ व नवजात शिशुओं को स्वस्थ रखने पर बल

विश्व स्वास्थ्य संगठन

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पूर्णिया. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) द्वारा इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस का थीम ‘स्वस्थ शुरुआत, आशापूर्ण भविष्य और मातृ एवं नवजात शिशु के स्वास्थ्य में सुधार’ पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली का लाभ उठाकर मां और होने वाले बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित रखना है. इसके लिए जीएमसीएच सहित जिले के सभी अस्पतालों में अनेक प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं संचालित की जा रही हैं जिसका लाभ बखूबी लोग उठा रहे हैं. अस्पताल में प्रसव पूर्व जांच के बाद और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हुए लाभार्थियों को सुरक्षित प्रसव सुविधा उपलब्ध करायी जाती है. प्रखंड स्तर पर संचालित अस्पतालों में गंभीर स्थिति वाले मां और नवजात शिशु को बेहतर चिकित्सा सहायता के लिए जीएमसीएच रेफर किया जाता है जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराते हुए मां और बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित किया जाता है.

अस्पताल में संचालित है एसएनसीयू

जीएमसीएच के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ प्रेम प्रकाश ने बताया कि कमजोर नवजात शिशुओं की जांच और उपचार के लिए जीएमसीएच में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) संचालित है जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 0 से 28 दिन तक के बच्चों को जांच और उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. उन्होंने बताया कि नवजात शिशु को सांस लेने में समस्या होने पर ऑक्सीजन सपोर्ट सुविधा के साथ रखा जाता है वहीं सांस लेने में ज्यादा समस्या हो तो नवजात शिशुओं को सी-पैप मशीन के साथ एसएनसीयू में रखा जाता है. इसके अलावा एसएनसीयू में शिशुओं की खून जांच, इंफेक्शन, हीमोग्लोबिन, जोइंडिस लेवल, ब्लड ग्रुप, शुगर की जांच करते शिशुओं को चिकित्सा सहायता उपलब्ध करायी जाती है. इस दौरान कंगारू मदर केयर सुविधा के साथ साथ एसएनसीयू में नवजात शिशुओं के मां के रहने और खाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है.

12 वर्ष के बच्चों के लिए बच्चा वार्ड उपलब्ध

डॉ प्रेम प्रकाश ने बताया कि जन्म के बाद विभिन्न बीमारियों से ग्रसित बच्चों का उपचार के लिए जीएमसीएच में बच्चा वार्ड में चिकित्सकों द्वारा बच्चों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है. इसमें 12 वर्ष तक के बच्चों के विभिन्न प्रकार की बीमारियों का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आसानी से उपचार सुविधा उपलब्ध है. वहीं कुपोषित बच्चों के लिए जीएमसीएच में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित किया जाता है जहां 05 साल तक के कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच और उपचार के साथ साथ आवश्यक पोषण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. इसके अलावा जीएमसीएच के ओपीडी में बच्चों को स्वास्थ्य से सम्बंधित विभाग के चिकित्सकों द्वारा जांच एवं उपचार सुविधा उपलब्ध है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATYENDRA SINHA

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By SATYENDRA SINHA

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