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खुश्कीबाग ओवरब्रिज पर हर रोज ठहर जाती है वाहनों की रफ्तार

Updated at : 23 Nov 2025 6:11 PM (IST)
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खुश्कीबाग ओवरब्रिज पर हर रोज ठहर जाती है वाहनों की रफ्तार

ओवरब्रिज बर्दाश्त नहीं कर पा रहा सिक्स लेन रोड का लोड

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ओवरब्रिज बर्दाश्त नहीं कर पा रहा सिक्स लेन रोड का लोड, परेशान हैं लोग

पूर्वी हिस्से में हो रहे निर्माण कार्य को लेकर और सिकुड़ गयी है ओवरब्रिज

फोटो—

पूर्णिया. शहर के खुश्कीबाग स्थित रेलवे ओवरब्रिज पर एक बार तीन दिनों से लगातार सुबह और शाम वाहनों की रफ्तार ठहर जाती है. रेंगते हुए तमाम वाहन ओवरब्रिज पार करते हैं. नतीजतन पांच मिनट के बजाय कभी बीस तो कभी पच्चीस मिनट का समय ओवरब्रिज पार करने में लग जाता है. हालांकि यहां पुलिस के जवान सक्रिय नजर आते हैं, पर जाम हटाने में पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. वैसे, यहां पहले से जाम की समस्या रही है, जिसका यातायात पुलिस ने काफी हद तक निदान निकाला है, लेकिनइधर एक बार फिर यह समस्या गहराने लगी है. यह अलग बात है कि स्टेशन जानेवाले टर्निंग प्वाइंट पर वाहनों के चौतरफा दबाव के कारण अभी भी शाम के समय परेशानी हो रही है.

दरअसल, ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के कारण तत्काल भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है और इसे रोकने के लिए ओवरब्रिज के पूर्वी हिस्से में बैरिकेडिंग के लिए ठोस निर्माण कार्य किया जा रहा है. इसके कारण टू-लेन ओवरब्रिज का पूर्वी हिस्सा और सिकुड़ गया है. आलम यह है कि सिक्सलेन रोड से टू-लेन के ओवरब्रिज पर आते ही वाहनों के काफिले को अचानक ब्रेक लग जाता है. जानकारों का कहना है कि वाहनों का यह दबाव दोनों तरफ से रहता है, जिसके कारण ओवरब्रिज पर आते ही रफ्तार ठहर जाती है. खास तौर पर शाम के समय इस पर दोनों तरफ से वाहनों की लंबी कतार लग जाती है. लोगों का कहना है अगर वाहन अपने साइड से निकलें, तो बहुत परेशानी नहीं होगी, लेकिन ऑटो-टोटो और बाइक सवार द्वारा ओवरटेक करने के कारण जाम लंबा हो जाता है.

ओवरब्रिज की चौड़ाई बढ़ाने की उठ रही मांग

गौरतलब है कि गुलाबबाग जीरोमाइल से मरंगा के बीच फोरलेन सड़क बनी हुई है. बीच में खुश्कीबाग हाट के समीप रेलवे का फ्लाइओवर बना हुआ है, जिसके नीचे से जोगबनी, कटिहार और सहरसा के लिए ट्रेनें गुजरती हैं. होता यह है कि दोनों तरफ से सिक्स लेनवाली चौड़ी सड़क से छोटी-बड़ी गाड़ियां फैल कर आती हैं और इस फ्लाइओवर के समीप सिमटना पड़ता है. चूंकि वाहनों का दबाव दोनों तरफ से होता है, इसलिए स्वाभाविक रूप से फ्लाइओवर पर दबाव बन जाता है. इससे जाम की नौबत आ जाती है. बाहर से देखने पर लोग इसे ट्रैफिक की समस्या बता जाते हैं, पर गहराई से देखने पर आने-जानेवाले लोग ही यह कहने से गुरेज नहीं करते कि यह टू लेन फ्लाइओवर सिक्सलेन रोड का लोड बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है. यही वजह है कि इसकी चौड़ाई बढ़ाए जाने की मांग मुखर रूप से उठायी जा रही है.

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आंकड़ों पर एक़ नजर

1977 में मिली थी फ्लाइओवर निर्माण योजना को स्वीकृति27 करोड़ की लागत से हुआ फ्लाईओवर का निर्माण2008 में किया गया फ्लाइओवर का उद्घाटन2012 में आयी थी एयरक्रेक की शिकायत2025 में ओवरब्रिज को क्षतिग्रस्त घोषित किया गया

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH CHANDRA

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By AKHILESH CHANDRA

AKHILESH CHANDRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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