Tanishq Showroom Robbery Case: लूटे गये 3.70 करोड़ के गहनों को आसमान खा गया या धरती निगल गयी, इस वजह से उठ रहे सवाल

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 18 May 2025 8:25 PM

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तनिष्क शोरूम

Tanishq Showroom Robbery Case: आरा के तनिष्क शोरूम में हथियार बंद अपराधियों ने जिस प्रकार से लूट की घटना को अंजाम दिया, वह वैसी ही थी, जिस प्रकार पूर्णिया के तनिष्क शोरूम में लूट की घटना हुई थी. इस घटना में भी फरार चल रहे चुनमुन झा की संलिप्तता उजागर हुई थी.

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Tanishq Showroom Robbery Case: पुलिस मुठभेड़ में चुनमुन झा की मौत और नालंदा से धर्मेन्द्र कुमार उर्फ बाबा की गिरफ्तारी के बाद यह राज भी दफन हो गया कि पूर्णिया तनिष्क शोरूम में लूटे गये गहने कहां गये ? गत वर्ष 26 जुलाई को तनिष्क शोरूम में हुई 3.70 करोड़ रुपये के गहने लूट के बाद अनुसंधान में यह संभावना जतायी जा रही थी कि इस कांड में फरार चल रहे अररिया जिले का चुनमुन झा के पास लूटे गये गहने हैं. लेकिन बीते 22 मार्च को पुलिस मुठभेड़ में चुनमुन झा की हुई मौत के बाद लूटे गये गहनों का पता नहीं चल सका. इस घटना से पूर्व 12 मार्च को आरा में तनिष्क शोरूम में 10 करोड़ 50 लाख रुपये मूल्य के गहने लूटे गये थे.

पुलिस मुठभेड़ में मौत हुए चुनमुन झा की फाइल फोटो

STF ने किया था गिरफ्तार

आरा के तनिष्क शोरूम में हुए लूट की घटना के बाद बीते गुरुवार को इस घटना के एक अप्राथमिक अभियुक्त नालंदा जिले के चंडी थाना अंतर्गत चिश्तिपुर का धर्मेन्द्र कुमार उर्फ बाबा को एसटीएफ के सहयोग से गिरफ्तार किया गया. पूर्णिया के तनिष्क शोरूम लूटकांड के अनुसंधानकर्ता के अनुसार आरा के तनिष्क शोरूम लूटकांड में वैशाली जिले के बिदुपुर का गौतम कुमार की गिरफ्तारी हुई थी.

उसने पुलिस को बताया था कि चंदन प्रिंस के कहने पर पूर्णिया में लूटे गये गहने धर्मेन्द्र उर्फ बाबा को रखने दिया गया था. लेकिन बाबा ने अपनी गिरफ्तारी के बाद पुलिस के समक्ष बताया कि वह पूर्णिया में हुए तनिष्क शोरूम के लूटे गये गहनों के बारे में कुछ नहीं जानता है. उसे गौतम कुमार ने गहने नहीं दिये थे.

आरा के तनिष्क शोरूम लूटकांड में शामिल गौतम कुमार पूर्णिया के तनिष्क शोरूम लूटकांड में शामिल था. जबकि पश्चिम बंगाल के जेल में बंद चंदन प्रिंस पूर्णिया के तनिष्क शोरूम लूटकांड का मास्टर माइंड था. सोना लूट सरगना सुबोध सिंह जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल के जेल में है, पूर्णिया के तनिष्क शोरूम लूटकांड की पटकथा उसी ने लिखी थी. गिरफ्तार धर्मेन्द्र उर्फ बाबा नालंदा जिले के जिस गांव का रहनेवाला है, उसी गांव का सुबोध सिंह भी रहनेवाला है.

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गहनों को कहां ठिकाना लगाया गया

पुलिसिया जानकारी के अनुसार सुबोध सिंह एवं धर्मेन्द्र उर्फ बाबा छत्तीसगढ़ के जेल में एक साथ रहा था और वह सुबोध सिंह का करीबी माना जाता है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि लूटे गये गहनों को कहां ठिकाना लगाया गया है. चुनमुन झा की मौत से पहले पुलिस टीम ने कुल 21 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है. इनमें पांच वैसे अपराधियों की गिरफ्तारी हुई, जिन्होंने पूर्णिया के तनिष्क शोरूम में लूट की घटना को अंजाम दिया था.

गिरफ्तार किये गये इन पांचों अपराधियों से पुलिस यह उगलवा नहीं सकी कि लूटे गये गहने आखिर किसके हवाले किये गये ? मुठभेड़ में चुनमुन झा के मारे जाने के बाद पुलिस के तुरुप का अंतिम पत्ता गिरफ्तार हुए धर्मेन्द्र उर्फ बाबा था, उसने भी लूटे गये गहने रखने से इंकार कर दिया है. इस लूटकांड में इतनी संख्या में गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस द्वारा गहनों का पता नहीं लगाया जा सका.

नालंदा से गिरफ्तार धर्मेन्द्र उर्फ बाबा

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दोनों को लिया जायेगा रिमांड पर

अब पुलिस आरा के तनिष्क शोरूम लूटकांड में गिरफ्तार हुए गौतम कुमार एवं सूरज मंडल को पूछताछ के लिए जल्द ही रिमांड पर लिया जायेगा. ये दोनों वर्तमान में आरा के जेल में बंद है. रिमांड पर लेने के बाद पूछताछ में गौतम कुमार एवं सूरज मंडल के द्वारा लूटे गये गहनों की जानकारी देने से मुकर गया तो यह राज ही रह जायेगा ?

बहरहाल तनिष्क शोरूम लूटकांड के गहने कहां रखे गये या फिर किसे दिये गये, यह पहेली ही बन गयी है. खानापूर्ति के नाम पर पूर्णिया की पुलिस टीम पश्चिम बंगाल के मालदा जिला अंतर्गत कलियाचक में छापेमारी कर महज एक हीरे की अंगूठी ही बरामद की है.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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