दमा व खांसी पीड़ित मरीजों की अस्पताल व निजी क्लिनिकों में बढ़ी भीड़
पूर्णिया. नये वर्ष के आगमन के साथ-साथ ठंड, शीतलहर और लगातार गिरते तापमान की वजह से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट और दमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गयी हैं. दिसंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर अबतक पछुवा हवा ने भी कनकनी बेहद बढ़ा दी है. इस वजह से अस्पतालों में ठंड प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. हालांकि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में सामान्य मरीजों की संख्या में कमी आयी है. इसके बावजूद सर्दी, खांसी, बुखार और श्वास की समस्या को लेकर प्रतिदिन यहां के ओपीडी में अमूमन 1000 से 1200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. दूसरी ओर जीएमसीएच के आपात चिकित्सा विभाग में दमा और स्ट्रोक वाले मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. मौसम में बढ़ी ठंड व कनकनी ने बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक की स्वास्थ्य समस्याओं में इजाफा कर दिया है. सरकारी से लेकर निजी चिकित्सकों के यहां बड़ी संख्या में ठंड प्रभावित मरीज पहुंच रहे हैं.आखिरी दिसंबर से शुरू हुई कनकनी का असर आम जनजीवन पर भी पड़ा है, जिससे शहर में चहल-पहल अन्य दिनों की तुलना में कम ही दिख रही है. सुबह में मॉर्निंग वाक करने वालों पर भी ठंड का काफी असर देखा जा रहा है. इधर तापमान का न्यूनतम पारा के नीचे चले जाने से ठंड में और भी वृद्धि हो गयी है, जिस वजह से विभिन्न अस्पतालों में काफी संख्या में ठंड से प्रभावित बच्चे, बुजुर्ग और अधेड़ अपने परिजनों के साथ नजर आ रहे हैं. बच्चों में भी ठंड की वजह से सर्दी-खासी के अलावा निमोनिया की शिकायत बढ़ रही है. बच्चों में कफ के अलावा उल्टी और दस्त की शिकायतें भी आ रहीं हैं.
रक्तचाप, डायबटीज और हार्ट के मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह
बढ़ी ठंड की वजह से जीएमसीएच की इमरजेंसी सेवा में कई तरह के मरीज पहुंच रहे हैं. बीते दिनों भी कई स्ट्रोक के मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे. इस मामले में चिकित्सकों का कहना है कि ठंड में अमूमन मानव शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिस वजह से शरीर में रक्त संचार प्रभावित होता है और ज़रा सा भी एक्सपोजर लगने से स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है. इनमें प्रभावित व्यक्ति को ब्रेन हैमरेज, हार्टअटैक और पक्षाघात भी हो सकते हैं. इस मौसम में जो भी हृदयरोगी हैं या रक्तचाप व डायबिटीज के मरीज, उन्हें बेहद सतर्क रहने की जरूरत है.रखें सावधानी
बीपी और डायबिटीज की नियमित जांच और इनकी दवा जरूर लें. हमेशा गर्म कपड़ों से शरीर को ढकें. हल्के गर्म भोजन और पानी का ही सेवन करें. अलाव या रूम हीटर वगैरह के पास से अचानक बाहर न निकलें. बाहर निकलते समय सिर, कान और नाक को भी ढंकें.सर्दी खांसी से प्रभावित व्यक्तियों से बच्चों को दूर रखें. श्वांस संबंधी परेशानी की स्थिति में चिकित्सक से सलाह जरूर लें.
बोले चिकित्सक
ठंड और कनकनी वाले इस तरह के मौसम में स्ट्रोक की समस्या आती है. ठंड से बचें और हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही करें. रक्तचाप और डायबिटीज के मरीजों को दवा हर रोज लेनी चाहिए. इन दोनों की जांच समय-समय पर करवाना भी जरूरी है. ठंड से बचाव ही सबसे बड़ी सुरक्षा है. इस ठंड को देखते हुए सुबह में टहलने से परहेज करना जरूरी है. डॉ तपन विकास सिंह, चिकित्सकडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

