पूर्णिया एयरपोर्ट की घोषणा के बाद गौवासी मौजा की जमीन पर ब्रोकरों की नजर
- डीएवी चौक के कोशी नदी के उस पार जमीन की कीमत चार गुणा बढ़ी
– डीएवी चौक के कोसी नदी के उस पार जमीन की कीमत चार गुणा बढ़ी
पूर्णिया. पूर्णिया एयरपोर्ट बनने की घोषणा के बाद से इस इलाके की जमीन की कीमत चढ़ने लगी है. लोग बताते हैं कि पूर्व की अपेक्षा अब यहां की जमीन की कीमत चार गुणा बढ़ गयी है. स्थानीय और बाहर के बहुत सारे लोग यहां जमीन खरीदने में रूचि दिखा रहे हैं. एक अनुमान के अनुसार जो जमीन पहले 10 लाख रुपये बीघा लेने को कोई तैयार नहीं होता था, वह अब बढ़ कर 40 लाख प्रति बीघा हो गया है.एयरपोर्ट के आसपास की सभी जमीन गोवासी मौजा अंतर्गत आता है. इनमें बादरपुर चौनी, बमडम गैट, मतियारी, बक्साघाट, डीएवी चौक से आगे का इलाका व चूनापुर शामिल है. इसके अलावा मुगलटोली, आदमपुर, माता स्थान का इलाका, बनभाग हरदा स्थित कोलाघाट की जमीन पर भी खरीदारों की नजर है. इस इलाके के जमीन मालिकों से कई ब्रोकरों ने संपर्क साधना शुरू कर दिया है. यहां बहुत से भूखंडों की बिक्री पहले हो चुकी है. यहां अधिकांश जमीन मालिक स्थानीय हैं तो कुछ बाहरी भी हैं. यहां अधिकांश जमीन मालिकों की जमीन को वर्षों से दूसरे किसान जोत रहे थे. जमीन की कीमत कम रहने की वजह से जमीन मालिकों में गंभीरता नहीं थी. लेकिन जैसे ही एयरपोर्ट बनने की घोषणा हुई जमीन मालिकों की रूचि अपने-अपने भूखंडों के प्रति जगने लगी है.जमीन मालिक से ब्रोकर कर रहे संपर्क
आलम यह है कि विगत एक वर्ष के दौरान जमीन मालिक ब्रोकरों से सीधा डील कर रहे हैं. ऐसा इसलिए कि इनकी जमीन वर्षों से स्थानीय कुछ समुदाय के लोगों द्वारा कब्जा कर जोत आबाद किया जाता रहा था. अब ब्रोकरों से डील होते ही जमीन को कब्जा मुक्त कराने की जिम्मेदारी उनकी हो जाती है. यही वजह है कि इस इलाके में भू विवाद बढ़ रहा है. गौवासी मौजा अंतर्गत जितनी भी जमीन है, यहां की पैमाइश शहरी क्षेत्र के अपेक्षा अधिक है. यहां 4 डिसमिल 150 वर्ग कड़ी का होता है, जबकि शहरी क्षेत्र में 2 डिसमिल जमीन एक वर्ग कड़ी का होता है. इसी वजह से यहां कट्ठा की खरीदारी पर भी बड़ा भूखंड मिल जाता है.
व्यवसाय की दृष्टिकोण से फायदेमंद है जमीन
पूर्णिया नगर निगम का क्षेत्र रहमतनगर अंतर्गत डीएवी चौक तक ही है. जबकि बक्साघाट का इलाका एवं कारी कोशी का इलाका केनगर अंचल में पड़ता है. यही वजह है कि पूर्व में जमीन खरीदारों की नजर डीएवी चौक तक ही सीमित था. अब डीएवी चौक से आगे कारी कोशी नदी के उस पार खरीदारों की नजर है. वर्ष 2010 में डीएवी चौक से चूनापुर जाने वाले रास्ते में पुल भी बन चुका है. एयरपोर्ट के आने जाने का रास्ता भी बनना शुरू हो चुका है. स्थानीय लोग बताते हैं कि एयरपोर्ट बनने से इस इलाके के लोगों को डबल फायदा हो गया है. लोग बताते हैं कि भविष्य में यह इलाका भी शहर की तरह हो जायेगा. व्यवसाय की दृष्टिकोण से भी इस इलाके की जमीन फायदेमंद रहेगा.जमीन को लेकर बढ़ा विवाद
छह माह पूर्व जमीन के एक बड़े ब्रोकर ने इस इलाके में 60 से 70 एकड़ जमीन किसानों से खरीदा है. जबकि एयरपोर्ट के लिए सरकार द्वारा 52 एकड़ जमीन के बाद 15 एकड़ जमीन अतिरिक्त खरीदा गया है. जमीन बेचने वाले यहां के 70 से 80 प्रतिशत किसान स्थानीय है जबकि 20 प्रतिशत बाहरी जमींदार हैं. हाल ही में केनगर अंचल अंतर्गत गौवासी मौजा में पड़ने वाले बादरपुर चौनी स्थित जमीन के एक भूखंड पर हुए विवाद के बाद गोलीबारी की घटना आजकल चर्चा में है. इस मामले में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प में एक पक्ष के एक व्यक्ति को गोली लगी तो दूसरे पक्ष के तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गये. इस घटना के बाद इस इलाके की जमीन चर्चा में है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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