एसबीआइ के आंचलिक कार्यालय के विलय का विरोध

Updated at : 21 Feb 2020 6:59 AM (IST)
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एसबीआइ के आंचलिक कार्यालय के विलय का विरोध

पूर्णिया : भारतीय स्टेट बैंक के आंचलिक कार्यालय के विलय का मुद्दा गुजरते वक्त के साथ गहराता जा रहा है. इस मुद्दे को लेकर एक तरफ जहां सीमांचल का राजनीतिक तबका बैंक प्रबंधन के इस निर्णय का विरोध कर रहा है. वहीं दूसरी ओर नागरिकों ने इस सवाल को लेकर आंदोलन की जमीन बनानी शुरू […]

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पूर्णिया : भारतीय स्टेट बैंक के आंचलिक कार्यालय के विलय का मुद्दा गुजरते वक्त के साथ गहराता जा रहा है. इस मुद्दे को लेकर एक तरफ जहां सीमांचल का राजनीतिक तबका बैंक प्रबंधन के इस निर्णय का विरोध कर रहा है. वहीं दूसरी ओर नागरिकों ने इस सवाल को लेकर आंदोलन की जमीन बनानी शुरू कर दी है. बैंक के इस फैसले से कोई चकित है तो कोई आहत भी हो रहा है. आम लोगों का कहना है कि आंचलिक कार्यालय को पूर्णिया से हटा कर भागलपुर में विलय कर पूर्णिया के महत्व को कम करने की साजिश है.

एसबीआइ के मुख्यालय स्तर से पूर्णिया स्थित बैंक के आंचलिक कार्यालय का भागलपुर में विलय करने का निर्णय लिया है. वह भी तब जबकि भागलपुर के पास बैंक के पास न तो अपनी जमीन है और न ही मकान. वहां सारा कुछ किराए के मकान में चल रहा है. इतना ही नहीं, भागलपुर के अधीन मात्र 32 शाखाएं हैं जबकि पूर्णिया के अधीन 123 शाखाओं के अलावा अपनी जमीन, अपना भवन, स्टाफ क्वार्टर और अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र भी है.
भागलपुर को पूर्णिया में विलय किया जाना था पर उल्टे लोकल राजनीतिक दबाव के कारण पूर्णिया को ही हटाने का निर्णय ले लिया गया. हालांकि इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर बैंक के अधिकारी या कर्मचारी कुछ बोलने को तैयार नहीं पर आम नागरिकों का कहना है कि एसबीआइ का आंचलिक कार्यालय अर्थात प्रशासनिक कार्यालय को अन्यत्र विलय करने का निर्णय सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से काफी नुकसानदायक है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस आंचलिक कार्यालय से पूर्णिया की गरिमा रही है और इस गरिमा को छीनने का हक किसी को नहीं हो सकता. इइस मुद्दे को लेकर के एन ठाकुर के नेतृत्व में सामाजसवियों की टीम ने सांसद संतोष कुशवाहा से मुलाकात की और पूर्णिया की गरिमा को बचाने का आग्रह किया.
विलय के वजह पर उठ रहा सवाल
पूर्णियावासियों ने यह सवाल उठाया है कि आंचलिक कार्यालय के भागलपुर में विलय किए जाने की ठोस वजह तो होनी ही चाहिए. इस सवाल के पक्ष में यह तर्क दिया जा रहा है कि पूर्णिया में राजस्व की कमी नहीं, जगह की कमी नहीं और बैंक के उद्देश्यों की भी पूर्ति हो रही है.
पूर्णिया की तुलना में भागलपुर के पास कम ब्रांच हैं और कारोबार भी अपेक्षाकृत कम होने का अनुमान है. लोगों का कहना है कि अगर भागलपुर में कोई कमी है तो बैंक प्रबंधन उसकी भरपाई पूर्णिया को हटा कर क्यों करना चाहता है. नगरवासियों ने इसके पीछे किसी साजिश की आशंका जतायी है और बैंक प्रबंधन को सवाले के दायरे में समेटने की मुहिम शुरू कर दी है.
कटिहार सांसद ने डिप्टी सीएम को लिखा पत्र
कटिहार के सांसद दुलालचंद गोस्वामी ने बिहार के डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी को पत्र लिख कर स्टेट बैंक के आंचलिक कार्यालय को पूर्णिया से नहीं हटाने का आग्रह किया है. श्री मोदी को लिखे अपने पत्र में सांसद श्री कुशवाहा ने कहा है कि पूर्णिया का आंचलिक कार्यालय अर्थात प्रशासनिक कार्यालय स्टेट बैंक के निजी बिल्डिंग में है और कई दशकों से कार्यरत है.
उन्होंने कहा है कि 250 वर्ष पुराना पूर्णिया जिला के अंचलों में स्टेट बैंक का नेटवर्क के लिए पूर्णिया में आंचलिक कार्यालय अर्थातप्रशासनिक कार्यालय विभिन्न दृष्टिकोणों से अनूठी सुविधाओं को प्रदान करता है. उन्होंने उपरोक्त तथ्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए पूर्णिया स्थित आंचलिक कार्यालय अर्थात प्रशासनिक कार्यालय को अन्यत्र कहीं भी विलय नहीं करने का निर्णय शीघ्रता एवं तीव्रता के साथ लेने का अनुरोध डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री से किया है.
नहीं करें कार्यालय का विलय: मनोज झा
राज्य सभा सांसद मनोज झा ने पूर्णिया के आंचलिक कार्यालय के विलय पर कड़ी आपत्ति जतायी है. उन्होंने वित्त मंत्री एवं भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन को अलग-अलग पत्र लिख कर इस फैसले को स्थगित करने का अनुरोध किया है. कहा है कि पूर्णिया जिला के अंचलों में स्टेट बैंक का नेटवर्क के लिए पूर्णिया में आंचलिक कार्यालय अर्थात प्रशासनिक कार्यालय विभिन्न दृष्टिकोणों से अनूठी सुविधाओं को प्रदान करता है.
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