गांवों के रास्ते भी चलायी जाएं ट्रेनें, तेज हो रही लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन की मांग

Updated at : 19 Feb 2020 7:40 AM (IST)
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गांवों के रास्ते भी चलायी जाएं ट्रेनें, तेज हो रही लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन की मांग

पूर्णिया : एक बार फिर पूर्णिया जंक्शन से लंबी दूरी के ट्रेनों के परिचालन की मांग जोड़ पकड़ने लगी है. दशकों से उपेक्षा की त्रासदी झेल रहे पूर्णिया के आम लोगों की जुबान से यही बात निकल रही है कि बहुत हो चुकी उपेक्षा, पूर्णिया ने ढाई सौ साल का सफर पूरा कर लिया, अब […]

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पूर्णिया : एक बार फिर पूर्णिया जंक्शन से लंबी दूरी के ट्रेनों के परिचालन की मांग जोड़ पकड़ने लगी है. दशकों से उपेक्षा की त्रासदी झेल रहे पूर्णिया के आम लोगों की जुबान से यही बात निकल रही है कि बहुत हो चुकी उपेक्षा, पूर्णिया ने ढाई सौ साल का सफर पूरा कर लिया, अब पूर्णिया के प्रखंडों से भी लंबी दूरी की ट्रेन चलनी ही चाहिए.

दरअसल, कटिहार-जोगबनी रेलखंड से जुड़ा पूर्णिया का यह इलाका आज भी रेलवे के क्षेत्र में काफी पीछे है. नीतीश कुमार के अलावा रामविलास पासवान और लालू प्रसाद के कार्यकाल में भी कई बेहतर परियोजनाएं आईं. इनमें कई तो पूरे हुए पर अधिकांश योजनाएं ठंडे बस्ते में बंद है. इनमें कुछ समस्याएं ऐसी है जिससे आए दिन इस क्षेत्र के रेल यात्रियों को जूझना पड़ता है.
हालांकि इन समस्याओं के समाधान के लिए वर्षों से मांगें उठायी जा रही हैं और आश्वासन भी मिलते रहे हैं पर इसके बावजूद समस्याएं जस की तस हैं. यहां उल्लेख्य है कि पूर्णिया जंक्शन से सटकर गुलाबबाग मंडी अवस्थित है और यहां से कारोबार के लिए व्यापारियों को पटना, दिल्ली और कोलकाता से सीधा सम्पर्क रखना पड़ता है. मगर विडम्बना है कि पूर्णिया से लंबी दूरी के सफर के लिए रेल सुविधा का सर्वथा अभाव है. बारंबार मांग के बावजूद एक इंटरसिटी की सेवा भी पूर्णिया को नहीं दी जा सकी.
कुल मिला कर पूर्णिया जंक्शन से दिल्ली के लिए सीमांचल व हमसफर एक्सप्रेस और कोलकाता के लिए चितपुर एक्सप्रेस है. इसमें भी कई असुविधाएं हैं. सीमांचल एक्सप्रेस में दो थ्री एसी एवं एक दो एसी बोगी लगाने, कटिहार-पटना इंटर सिटी को कटिहार की बजाय जोगबनी से चलाए जाने,महानंदा एक्सप्रेस को कटिहार की बजाय जोगबनी से चलाने और दानापुर केपिटल एक्सप्रेस का परिचालन जोगवनी से शुरू किए जाने की मांग पिछले कई वर्षों से लंबित है.
पूर्णियावासियों की चाहत है कि जिले के जलालगढ़, गढ़बनैली, कसबा, रानीपतरा आदि ग्रामीण इलाकों से भी अब लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन होना चाहिए. मगर, लोगों को इस उम्मीद की कोई मंजिल मिलती नजर नहीं आ रही.
कहते हैं स्थानीय नागरिक : पूर्णिया के कई गांवों के बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने ट्रेन देखी ही नहीं
रेल विकास के मामले में पूर्णिया अभी भी पिछड़ा रह गया है. यह बड़ी विडम्बना है कि पूर्णिया में आज भी उतनी ही रेल लाइन बिछी है जितनी अंग्रेज बिछा कर गये थे. कटिहार से खुलने वाली लंबी दूरी की सभी ट्रेनों का परिचालन कम से कम पूर्णिया से किया जाना चाहिए.
हरिओम झा, क्रिकेट कोच, पूर्णिया
यह बड़ी विडम्बना है कि पूर्णिया ने अपनी उम्र का ढाई सौ साल पूरा कर लिया पर कई गांवों के लोगों ने ट्रेन भी नहीं देखी. पूर्णिया के रुपौली, धमदाहा, भवानीपुर होते हुए पूर्णिया और यहां से डगरुआ, अमौर व बायसी होते हुए सिलीगुड़ी तक के लिए ट्रेन चलनी चाहिए. अगर ऐसा होता है, पूरे बिहार का विकास होगा.
रुस्तम खान, नेता, राजद
पूर्णिया से पटना के लिए यात्रियों की कमी नहीं है. बारंबार मांग के बावजूद पटना के लिए एक इंटरसिटी तक पूर्णिया को नहीं मिल सका है. इसके लिए जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए. इसके अलावा कोलकाता के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ायी जाने की भी जरुरत है.
धनंजय ठाकुर, समाजसेवी
रेल विकास की कई योजनाएं वर्षों से लंबित हैं. जलालगढ़ होते हुए किशनगंज और रुपौली रेल लाइन का काम भी अधर में लटक गया है. विकास के नाम पर छोटी लाइन को बड़ी लाइन में तब्दील भले ही किया गया हो पर इससे अधिक रेल क्षेत्र में पूर्णिया का विकास नहीं हो सका है.
कुमारेन्द्र, प्रबुद्ध नागरिक
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