पटना : पहचान पत्र खरीदकर ठगी करने वाले आनंद मोदक का खाता फ्रीज, पुलिस को खाते में मिले 11 लाख रुपये
आनंद मोदक के गिरोह के कई सदस्यों के बारे में पता चला है जिसकी तलाश की जा रही है. जानकारी के अनुसार पुलिस को आकाश और दीपक नाम के साइबर फ्रॉड की तलाश है. आकाश ने पटना में आनंद मोदक रहने के लिए जगह दिलवायी थी. वहीं दीपक ने आनंद साइबर ठगी की ट्रेनिंग नालंदा में दी थी.
पटना के पत्रकार नगर थाने की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये साइबर फ्रॉड गिरोह के साइबर शातिर झड़िया, धनबाद निवासी मधु मोदक का बेटा आनंद मोदक के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस ने खाते का डिटेल निकाल कर उसके खाते से 11 लाख रुपये को फ्रीज कर दिया. थानाध्यक्ष मनोरंजन भारती ने बताया कि इस गिरोह के कई सदस्यों के बारे में पता चला है जिसकी तलाश की जा रही है. जानकारी के अनुसार पुलिस को आकाश और दीपक नाम के साइबर फ्रॉड की तलाश है. आकाश ने पटना में आनंद मोदक रहने के लिए जगह दिलवायी थी. वहीं दीपक ने आनंद साइबर ठगी की ट्रेनिंग नालंदा में दी थी.
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पुलिस ने साइबर फ्रॉड के खातों का डिटेल लिया तो पता चला कि जितने भी पासबुक व एटीएम कार्ड बरामद किये गये हैं, वह सभी कमीशन देकर खुलवाये गये खाते हैं. साइबर शातिर खाता खुलवाकर पैसा देने का लालच देकर उसका एटीएम और पासबुक अपने पास रख लेता था. इसके बाद एटीएम से पैसा निकाल कर खाताधारक को कमीशन देता था. थानाध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल सभी खाता को बंद करवा दिया गया है.
जानकारी के अनुसार पुलिस ने साइबर फ्रॉड के मोबाइल को खंगाला तो उसके व्हाट्सएप से कई सारी जानकारियां मिली हैं. व्हाट्सएप में एक ग्रुप मिला, जिस पर पुलिस को शक है कि यह ग्रुप साइबर शातिरों का है. इसमें पैसा और नंबर के बारे में कई सारे मैसेज मिले हैं. यही नहीं टारगेट तीन लाख रुपये भी लिखा है. वहीं साइबर शातिरों ने आधा से ज्यादा पैसों को निकाल लिया है.
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आनंद मोदक के गिरोह के शाातिरों का ठगी का तरीका अलग है. वे फोटो कॉपी, साइबर कैफे व अन्य डिजिटल दुकानदारों व डिजिटल वर्क करने वाले लोगों से लोगों के आधार कार्ड व पैन कार्ड की फोटो कॉपी खरीदते हैं. पूछताछ में मोदक ने बताया कि आधार कार्ड की फोटो कॉपी 100 रुपये और पैन कार्ड की फोटो कॉपी 200 रुपये खरीदता था. इसके बाद उससे पूरा डिटेल निकाल कर संबंधित व्यक्ति को फोन करता है. केवाइसी, खाते में सुधार व अन्य जरूरी काम को लेकर झांसा देता है. जब आमलोगों को शक होता है, तो उसे दूर करने के लिए उनका आधार कार्ड और पैन कार्ड का नंबर भी बता देता है. इसके बाद उन्हें लिंक भेजकर उनके खातों से पैसे की निकासी कर लेता है.
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