Rishushri: कौन है रिशु श्री, जिसपर हुए FIR से उड़ गयी बिहार दर्जन भर नौकरशाहों की नींद

Author Ashish jha
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rishu ranjan

Rishushri: स्पेशल विजलेंस यूनिट ने केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन उसमें भी ठोस कार्रवाई होगी, इस पर शक है. कहा जाता है कि रिशु श्री ने अगर जुबान खोल दी तो वैसे लोग फंसेंगे, जिनके बारे में आमलोग कल्पना नहीं कर सकते. ऐसे में रिशु श्री के खिलाफ ठोस कार्रवाई की उम्मीद कम ही है.

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Rishushri: पटना. बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई ने मनी लॉंड्रिंग मामले में रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है. प्रवर्तन निदेशालय ने रिशु श्री के खिलाफ सबूतों का पुलिंदा काफी पहले ही बिहार सरकार को सौंप दिया था. लेकिन सरकार औपचारिकताएं निभाने में देर लगी. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सिफारिश पर यह कार्रवाई हुई. सत्ता के गलियारे में जो बातें तैर रही हैं उसके अनुसार रिशु श्री के कारनामों की अगर सही से जांच की गयी तो कम से कम एक दर्जन बड़े अफसर सलाखों के पीछे होंगे. यही कारण है कि घूसखोरी के इस हाइप्रोफाइल मामले में हुई कार्रवाई के बाद करीबी दर्जन भर अधिकारियों की नींद उड़ गयी है.

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बिहार सरकार में सबसे बड़ा लाइजनर है रिशु

रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री पर मामला दर्ज होते ही सबसे बड़ा सवाल यही था कि ये कौन है. बिहार के सचिवालय में आने जाने वाला हर इंसान रिशु श्री नाम ही नहीं बल्कि उसके रूतबे को भी जानता है. रिशु श्री कम से कम एक दर्जन बड़े अधिकारियों का सबसे खास लाइजनर माना जाता है. सत्ता के गलियारे में होने वाली चर्चाओं के अनुसार बिहार सरकार में दो बेहद अहम पदों पर काबिज एक बड़े अधिकारी के दफ्तर में कोई भी फाइल रिशु श्री की मंजूरी के बगैर नहीं हिलती थी. साहब हमेशा अहम विभागों में तैनात रहे औऱ वहां रिशु श्री का रूतबा बड़े साहब के जैसे थी. सत्ता के गलियारे का हर शख्स जानता है कि बिहार के कई और अहम विभागों का भी ऐसा ही हाल रहा है. रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री की मंजूरी के बगैर साहब फाइल पर साइन नहीं करते रहे हैं. उन विभागों के सारे ठेकेदार से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग वाले रिशु श्री से ही संपर्क करते थे.

काफी पहले हुई रेड, दबा रहा मामला

रिशु श्री के रूतबे के कई उदाहरण हैं. ईडी ने 16 जुलाई 2024 को ही रिशु श्री और उसके भाई के ठिकानों पर रेड किया था. उसी दिन आईएएस अधिकारी संजीव हंस के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई थी. ईडी को जानकारी मिली थी कि संजीव हंस ने रिशु श्री के जरिये हवाला से पैसे का लेन-देन किया था. इसके बाद ही संजीव हंस के साथ साथ रिशु श्री के ठिकानों पर रेड हुई थी. रिशु श्री के ठिकानों पर हुई रेड में चौंकाने वाले दस्तावेज बरामद हुए थे, लेकिन सरकार में गहरी पैठ रखने वाले लोग रिशु श्री को बचाने में लग गये थे. उन्हें रिशु श्री की पोल खुलने पर खुद फंसने का डर सता रहा था. उन्हीं कोशिशों का असर था कि रिशु श्री के खिलाफ लंबे अर्से से कार्रवाई नहीं हुई.

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