मौत के बाद भी जिंदा रहती हैं यादें, इस गांव में हर निधन पर लगाया जाता है एक पेड़

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 05 Jun 2026 7:28 AM

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मनेर रजवाहा नहर के दोनों किनारों पर लगाये गये पौधे.

Patna News : 16 वर्षों से अधिक समय में वह मनेर रजवाहा नहर के दोनों किनारों पर हजारों पौधे लगा चुके हैं. देश की नामी हस्तियों की स्मृति में भी पौधे लगाए है.

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Patna News : (मोनु कुमार मिश्रा की रिपोर्ट)

कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो… यह पंक्तियां पटना जिले के बिहटा प्रखंड की कुंजवा पंचायत स्थित मिथापुर गांव के किसान जितेंद्र शर्मा उर्फ बुटाई बाबा पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं. जहां अधिकांश लोग अपनों की यादों को तस्वीरों, स्मारकों या पत्थरों में सहेजते हैं, वहीं बुटाई बाबा ने स्मृतियों को हरियाली से जोड़कर एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम बन चुकी है.

मिथापुर गांव में जब भी किसी व्यक्ति का निधन होता है, बुटाई बाबा उसकी स्मृति में एक पौधा लगाते हैं. खास बात यह है कि प्रत्येक पेड़ पर उस दिवंगत व्यक्ति का नाम भी अंकित किया जाता है. इससे आने वाली पीढ़ियां अपने पूर्वजों और गांव के लोगों को याद रख सकें.

पिता की स्मृति से मिली प्रेरणा

बुटाई बाबा बताते हैं कि 2000 में उनके पिता रामजी सिंह का निधन हुआ था. पिता की स्मृति में उन्होंने गांव के समीप एक पीपल का पौधा लगाया. समय के साथ जब वह पौधा विशाल वृक्ष में बदल गया, तो उन्हें महसूस हुआ कि यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि उनके पिता की जीवंत स्मृति है. यहीं से उनके मन में विचार आया कि गांव में जब भी किसी का निधन हो, उसकी याद में एक पौधा लगाया जाए. इसके बाद उन्होंने इसे अपने जीवन का संकल्प बना लिया. पिछले 16 वर्षों से अधिक समय में वह मनेर रजवाहा नहर के दोनों किनारों पर हजारों पौधे लगा चुके हैं.

नहर किनारे बन गया स्मृतियों का हरित संग्रहालय

मनेर रजवाहा नहर के किनारे आज दूर-दूर तक फैली हरियाली केवल वृक्षों की कतार नहीं है. यहां लगे हजारों पेड़ गांव के दिवंगत लोगों की स्मृतियों को संजोए हुए हैं. ग्रामीण बताते हैं कि जब भी वे इन पेड़ों के बीच से गुजरते हैं, तो उन्हें अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और पूर्वजों की यादें ताजा हो जाती हैं. यही वजह है कि यह स्थान गांव की सामूहिक स्मृतियों का जीवंत संग्रहालय बन गया है.

बुटाई बाबा मुख्य रूप से पीपल और बरगद जैसे दीर्घायु एवं पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष लगाते हैं.

देश की नामी हस्तियों की स्मृति में भी लगाए पौधे

बुटाई बाबा की पहल केवल गांव तक सीमित नहीं रही. उन्होंने गांव के लोगों के अलावा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, अटल बिहारी वाजपेयी, रतन टाटा, लता मंगेशकर, डॉ. मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी, रामविलास पासवान, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, मुलायम सिंह यादव, बालासाहेब ठाकरे, जयललिता, अमरीश पुरी, ओम पुरी, इरफान खान, ऋषि कपूर, पुनीत राजकुमार, सिद्धार्थ शुक्ला, केके, पंकज उधास, बप्पी लाहिड़ी, कल्याण सिंह, जॉर्ज फर्नांडिस, कैलाशपति मिश्र और प्रमोद महाजन समेत देश की कई महान हस्तियों तथा शहीदों की स्मृति में भी पौधे लगाए हैं.उनका मानना है कि किसी व्यक्ति को सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो समाज और प्रकृति दोनों के काम आए.

हर पेड़ से जुड़ी है किसी परिवार की कहानी

नहर किनारे लगे पेड़ों पर गांव के दिवंगत लोगों के नाम अंकित हैं. इनमें सुखदेव सिंह, शिव कुमार सिंह, संजय सिंह, टुन्ना सिंह, रामप्रवेश सिंह, कैलाश सिंह, नान्हू सिंह, दिलीप सिंह, भोला सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीणों के नाम शामिल हैं.गांव वालों का कहना है कि इन पेड़ों को देखकर ऐसा लगता है मानो उनके अपने आज भी उनके बीच मौजूद हों. यही कारण है कि यह स्थान लोगों के लिए भावनात्मक रूप से बेहद खास बन गया है.

पर्यावरण संरक्षण को दिया सामाजिक सरोकार का रूप

कुंजवा पंचायत के समाजसेवी बिपिन बिहारी, राकेश कुमार सिंह,संजय कुमार सिंग ,मेदनी सिंह और मनीष कुमार कहते हैं कि बुटाई बाबा ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का काम किया है.

पूरे समाज के लिए मिसाल : मुखिया

कुंजवा पंचायत के मुखिया अमित कुमार कहते हैं कि एक ओर लोग पेड़ों की कटाई कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं बुटाई बाबा पौधारोपण के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश दे रहे हैं.

सामाजिक चेतना का अद्भुत उदाहरण : बीडीओ

प्रखंड विकास पदाधिकारी शिव जन्म राम कहते हैं कि बुटाई बाबा का कार्य केवल पौधरोपण अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है. आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे समय में किसी व्यक्ति की स्मृति को एक पेड़ से जोड़ना अत्यंत प्रेरणादायक पहल है.

बुटाई बाबा की पहल एक नजर में

16 वर्ष से अधिक समय से लगातार पौधारोपण
5000 से अधिक पेड़ लगाने का दावा
गांव में किसी की मृत्यु होने पर एक पौधा लगाने की परंपरा
प्रत्येक पेड़ पर दिवंगत व्यक्ति का नाम अंकित
पीपल और बरगद जैसे दीर्घायु वृक्षों को प्राथमिकता

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