कैंपस : पीयू : आंबेडकर चेयर के लिए फेलो के दो पदों पर दो वर्षों से नहीं हुई बहाली

पटना विश्वविद्यालय की ओर से डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए डॉ आंबेडकर चेयर की स्थापना वर्ष 2016 में भारत सरकार के सहयोग से की गयी थी.
संवाददाता, पटना पटना विश्वविद्यालय की ओर से डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए डॉ आंबेडकर चेयर की स्थापना वर्ष 2016 में भारत सरकार के सहयोग से की गयी थी. चेयर की ओर से विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पूरे साल समाज में न्याय के मौलिक सिद्धांतों को स्थापित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और सर्टिफिकेट कोर्स कराया जाता है. लेकिन चेयर में शिक्षकों की कमी की वजह से चेयर को उद्देश्य को बेहतर ढंग से पूरा नहीं किया जा रहा है. चेयर के लिए बहाल असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ हुलेश मांझी ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों से उन्हें यूटिलिटी सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है. यूटिलिटी सर्टिफिकेट नहीं मिलने की वजह से उन्हें ढाई वर्षों से वेतन भी नहीं मिला है. चेयर में फिलहाल एक प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षण और रिसर्च वर्क का भार संभाल रहे हैं. चेयर के लिए फेलो के दो पदों पर पिछले दो वर्षों से बहाली नहीं की गयी है. फेलो के पद के लिए विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष 2022 में ही विज्ञापन निकाला गया था. हाल ही में हुई सीनेट की बैठक में कुलाधिपति के समक्ष डॉ आंबेडकर चेयर की समस्याओं पर सदस्यों ने अपनी बात रखी थी. डॉ हुलेश मांझी ने कहा कि सीनेट बैठक में कुलाधिपति द्वारा इस समस्या को दूर करने की बात कही थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की अनदेखी की वजह से इस मुद्दे पर कोई विचार नहीं किया गया है.
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