असम में गरजीं कल्पना सोरेन, कहा- बदलाव के लिए तैयार है जनता, लगा दी वादों की झड़ी
Published by : Sameer Oraon Updated At : 06 Apr 2026 9:01 PM
कल्पना सोरेन की फाइल फोटो
Kalpana Soren: असम विधानसभा चुनाव 2026 के रण में झामुमो की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन ने मोर्चा संभाल लिया है. सोमवार को मजबत और औरंगाजुली में जनसभाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने चाय बागान श्रमिकों के लिए 500 रुपये न्यूनतम मजदूरी और महिलाओं के लिए 2500 रुपये मासिक सम्मान राशि का ऐतिहासिक वादा किया. पढ़ें, उनके भाषण की बड़ी बातें.
Kalpana Soren, रांची (सुनील चौधरी की रिपोर्ट): झारखंड मुक्ति मोर्चा की कद्दावर नेता और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने सोमवार को असम के चुनावी समर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी के मद्देनजर उन्होंने सोमवार को मजबत और औरंगाजुली विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी रैलियों को संबोधित किया. इस दौरान कल्पना सोरेन ने दावा किया कि असम की जनता वर्तमान व्यवस्था से त्रस्त है और अब राज्य में परिवर्तन की लहर साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने मंच से आह्वान किया कि मतदाता अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुके हैं और इस बार का मतदान केवल प्रत्याशी चुनने के लिए नहीं, बल्कि असम के भविष्य को नई दिशा देने के लिए होगा.
आदिवासी अस्मिता और सम्मान का मुद्दा
कल्पना सोरेन ने अपने संबोधन के दौरान ‘आदिवासी कार्ड’ खेलना नहीं भूलीं और इस चुनाव को हक और सम्मान की लड़ाई करार दिया. उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि झामुमो हमेशा से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है और असम के आदिवासी समाज का गौरव वापस लौटाना उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता का अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है और इस भरोसे की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार हैं.
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चुनावी वादों का पिटारा: मजदूरी और सम्मान राशि पर फोकस
पार्टी के विजन को जनता के समक्ष रखते हुए कल्पना सोरेन ने जनकल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करना नहीं भूली. उन्होंने वादा किया कि यदि जनता झामुमो को शक्ति प्रदान करती है, तो चाय बागान के श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 500 रुपये की जाएगी. इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रति माह 2500 रुपये की सम्मान राशि, हर परिवार को पक्का आवास, बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये घोषणाएं महज चुनावी जुमले नहीं हैं, बल्कि ये जनता के वे बुनियादी अधिकार हैं जिन्हें अब तक उनसे दूर रखा गया है.
एकजुटता और बदलाव की निर्णायक अपील
रैली के अंत में कल्पना सोरेन ने असम के विभिन्न समुदायों से एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि जब तक जनता संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद नहीं करेगी, तब तक उनका शोषण जारी रहेगा. 9 अप्रैल को होने वाले मतदान को लेकर उन्होंने मतदाताओं को जागरूक करते हुए कहा कि उनका एक-एक वोट बदलाव की इस महाक्रांति में नींव का पत्थर साबित होगा.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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