Patna News : आइजीआइएमएस व पीएमसीएच में शुरू होगा मेंटरशिप प्रोग्राम, छात्रों को रिसर्च से जोड़ेंगे शिक्षक

Edited by ANAND TIWARY
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एनएमसी के निर्देश के अनुसार आइजीआइएमएस व पीएमसीएच के 2024 बैच के एमबीबीएस छात्रों के लिए पहले सत्र से ही रिसर्च की तरफ प्रेरित करने के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है. इसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है.

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संवाददाता, पटना : आइजीआइएमएस व पीएमसीएच के एमबीबीएस-2024 बैच के छात्रों के लिए अहम खबर है. इन छात्रों को एमबीबीएस पढ़ाई के पहले सत्र से ही रिसर्च की तरफ प्रेरित करने के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है. इसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है. इसकी जिम्मेदारी कॉलेज के सीनियर शिक्षकों को दी गयी है. बताया जा रहा है कि आइजीआइएमएस में करीब 90 शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपने के लिए सूची तैयारी की गयी है, जबकि पीएमसीएच में करीब 120 शिक्षकों को शामिल किया जायेगा. पीएमसीएच में 200 और आइजीआइएमएस में 120 एमबीबीएस सीटों पर दाखिला होता है. कॉलेज प्रशासन ने सभी छात्रों को मेंटर आवंटित करने का निर्देश जारी किया है.

एनएमसी ने दिये थे निर्देश

मेंटरशिप प्रोग्राम को लागू करने का निर्देश नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने दिया है. इसी वजह से शिक्षकों को मेंटर के तौर पर नियुक्त किया गया है. इसमें प्रोफेसर को दो-दो और असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर को एक-एक छात्रों की जिम्मेदारी मिली है. मेंटर शिक्षक कॉलेज में छात्र के पहले अभिभावक के तौर पर रहेंगे. वे छात्र के साथ उसके परिजनों से भी संपर्क में रहेंगे. विषय के शिक्षकों के अलावा मेंटर से छात्र रिसर्च के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. शिक्षक एमबीबीएस छात्रों को अपने रिसर्च से भी जोड़ सकेंगे. छात्र की रूटीन पढ़ाई में भी मदद करेंगे.

रिसर्च के गुर सिखायेंगे मेंटर, पहले पीजी के छात्रों को मिलती थी यह सुविधा

पीएमसीएच व आइजीआइएमएस में मेंटरशिप कार्यक्रम पहले से संचालित है. लेकिन, पहले पीजी के छात्रों के लिए यह सुविधा थी. उनके पेपर भी प्रकाशित हो रहे हैं. लेकिन, अब एमबीबीएस छात्रों को भी रिसर्च से जोड़ने के लिए यह कवायद शुरू होने जा रही है. मेडिकल कॉलेज में पहली बार इसे लागू किया जा रहा है. मेंटर शिक्षक के साथ छात्र का सप्ताह में एक बार संवाद जरूर होगा. छात्र की शिक्षक से मुलाकात होगी. वह शिक्षक से वाट्सएप के जरिये अपनी समस्या बता सकता है. शिक्षक रूटीन पढ़ाई के साथ उसे रिसर्च अध्ययन के लिए प्रेरित करेंगे. इसमें आइसीएमआर भी मददगार होगा. रिसर्च को अच्छे प्रोजेक्ट को फंड भी करेगा.

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