Tejashwi Yadav: बिहार में लोकतंत्र हारा, मशीनरी जीती- चुनाव फिक्स था तेजस्वी यादव का बड़ा आरोप

Updated at : 07 Dec 2025 7:12 AM (IST)
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Tejashwi Yadav

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Tejashwi Yadav: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के लगभग एक महीने बाद तेजस्वी यादव पहली बार खुले तौर पर बोले और सीधे कहा कि “चुनाव फिक्स था, लोकतंत्र नहीं मशीनरी जीती.”

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Tejashwi Yadav: बिहार विधानसभा चुनाव की हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहली बार खुलकर सामने आए हैं. यूरोप यात्रा के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से बातचीत में उन्होंने पूरे चुनाव को “फिक्स” बताया और कहा कि नतीजों ने बिहार के लोकतंत्र को गहरा आघात पहुंचाया है. शनिवार को तेजस्वी ने यह वीडियो साझा किया, जिसके बाद राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है.

करीब पौन घंटे चली चर्चा में तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है और इस पर राष्ट्रव्यापी बहस की जरूरत है. उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता ने बदलाव का मन बनाया था, लेकिन “मशीनरी ने जनादेश को दबा दिया.”

महागठबंधन की हार पर तेजस्वी का तीखा सवाल

तेजस्वी यादव ने कहा कि कोई भी समझ नहीं पा रहा है कि महागठबंधन कैसे 75 से सीधे 25 सीटों पर आ गया. उनके मुताबिक, जनता बदलाव चाहती थी, वोट प्रतिशत स्पष्ट रूप से बढ़ा था, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल उलट आए. उन्होंने कहा कि “यह चुनाव जनता की नहीं, मशीनरी की जीत है.”

EVM पर अदृश्य शक्तियों का आरोप

तेजस्वी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठाए और कहा कि पोस्टल बैलेट में जहां 143 सीटों पर महागठबंधन आगे था, वहीं EVM के नतीजे पूरी तरह अलग निकले. उन्होंने कहा कि “ईवीएम में अदृश्य शक्तियां काम कर रही थीं, जो बदलाव नहीं होने देना चाहती थीं.”

40 हजार करोड़ बांटे गए

तेजस्वी ने बातचीत में कहा कि चुनाव के 10 दिन पहले करीब 40 हजार करोड़ रुपये “रिश्वत की तरह” बांटे गए. उनका कहना था कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए हर संभव तरीका अपनाया. उन्होंने कहा कि पेंशन बढ़ाने और माई-बहिन मान जैसी योजनाएं महागठबंधन की थीं, लेकिन संसाधनों के दुरुपयोग से चुनावी माहौल बदल दिया गया.

तेजस्वी ने चुनाव आयोग को “बेइमान” बताते हुए पूछा कि सीसीटीवी फुटेज को सिर्फ 45 दिनों तक सुरक्षित रखने का नियम क्यों बनाया गया है. उनके मुताबिक, यदि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी है तो फुटेज को एक साल या उससे ऊपर तक सुरक्षित क्यों नहीं रखा जाता?

तेजस्वी के बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्ष इसे लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इन आरोपों को बिना सबूत का राजनीतिक बयान करार दे रहा है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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