Tejpratap Yadav: तेज प्रताप यादव को मालदीव जाने के लिए कोर्ट से क्यों लेनी पड़ी अनुमति? जानिए पूरा मामला

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Tej Pratap Yadav की फाइल फोटो

Tejpratap Yadav: आरजेडी नेता तेज प्रताप यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने उन्हें 17 से 23 मई तक मालदीव यात्रा की अनुमति दे दी है. जमीन के बदले नौकरी घोटाले में आरोपी तेज प्रताप को यह इजाजत 25 हजार रुपये की जमानत राशि जमा करने की शर्त पर दी गई है.

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Tejpratap Yadav: दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने आरजेडी नेता और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव को मालदीव यात्रा की सशर्त अनुमति दे दी है. अदालत ने आदेश में कहा कि आरोप गंभीर हो सकते हैं, लेकिन किसी भी जमानतशुदा आरोपी को विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार से केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता.

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विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने तेज प्रताप को 25 हजार रुपये की जमानत राशि जमा करने की शर्त पर 17 से 23 मई के बीच मालदीव यात्रा करने की इजाजत दी है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा अवधि में किसी भी तरह का विस्तार नहीं किया जाएगा और न ही तेज प्रताप इस अनुमति का दुरुपयोग करेंगे.

अदालत ने मांगी तेज प्रताप से ये जानकारी

अदालत ने तेज प्रताप को यात्रा से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां जैसे ठहरने का स्थान, स्थानीय संपर्क नंबर और यात्रा कार्यक्रम कोर्ट में जमा कराने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह भी कहा गया है कि वे किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे.

जमीन के बदले नौकरी घोटाले में हैं आरोपी

गौरतलब है कि तेज प्रताप यादव रेलवे भर्ती में ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले के आरोपियों में शामिल हैं. सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में यह आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहे लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में ग्रुप डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से उनके नाम पर जमीनें ली गईं. इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियां और कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है.

17 मई से 23 मई के बीच जा सकेंगे मालदीव

तेज प्रताप को अदालत ने 11 मार्च को समन के जवाब में पेश होने के बाद नियमित जमानत दी थी. अब अदालत की अनुमति के बाद वे 17 मई से 23 मई के बीच मालदीव जा सकेंगे, लेकिन सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा. कोर्ट के इस फैसले को लेकर सियासी हलकों में हलचल मची है, क्योंकि मामला हाई-प्रोफाइल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील है.

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