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कक्षा 9वीं से 12वीं के शिक्षक कला में दिखायेंगे प्रतिभा, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में लेंगे भाग

Updated at : 07 Nov 2025 8:23 PM (IST)
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कक्षा 9वीं से 12वीं के शिक्षक कला में दिखायेंगे प्रतिभा, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में लेंगे भाग

इस प्रतियोगिता में राज्य के सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों भी शामिल करने के लिए चयनित किया जा रहा है

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-राज्य के सरकारी स्कूलों में भी कला में रुचि रखनेवाले शिक्षकों की बनायी जा रही टीम

संवाददाता, पटना

जिले के सरकारी स्कूलों के वैसे शिक्षक, जो कला के क्षेत्र में रुचि रखते हैं, उनका मनोबल बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीइआरटी) शिक्षकों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित करेगा. इसमें सरकारी, निजी, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय आदि के शिक्षक शामिल हो सकते हैं. इस प्रतियोगिता में राज्य के सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों भी शामिल करने के लिए चयनित किया जा रहा है. इस प्रतियोगिता में कक्षा 9वीं से 12वीं के शिक्षक भाग लेंगे. इसके लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने कला में रुचि रखने वाले शिक्षकों की चयन प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है. कार्यक्रम का नाम ””समृद्धि”” रखा गया है. कार्यक्रम के तहत दो शिक्षकों की टीम बनायी गयी है, जिसमें माध्यमिक कक्षाओं के किसी भी विषय के शिक्षक और कला संवर्ग के शिक्षक शामिल किये गये हैं.

पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ जोड़ना है

इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम पर आधारित उन कला समेकित पद्धतियों को प्रदर्शित करना है, जिन्हें शिक्षकों द्वारा विकसित व प्रयुक्त किया गया है. शिक्षकों को स्थानीय कलाकारों व शिल्पकारों के साथ जुड़कर पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ जोड़ना है. विद्यार्थियों के पूर्व अनुभव व ज्ञान पर आधारित शिक्षण, कलाओं द्वारा व्यावहारिक अधिगम रुचिकर बनाना, एक-दूसरे से सीखने के अवसर प्रदान करना और स्व-मूल्यांकन व सहपाठियों द्वारा मूल्यांकन पर बल देना है.

बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को मिलेगी पुरस्कार राशि

राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इस प्रतियोगिता में विजेताओं को नकद पुरस्कार राशि दी जायेगी. प्रथम विजेता को 25 हजार, द्वितीय को 20 हजार, तृतीय को 15 हजार और विशिष्ट पुरस्कार पांच हजार रुपये दिये जायेंगे. एनसीइआरटी ने कहा है कि इस प्रतियोगिता में क्षेत्रीय कला को बढ़ावा दिया जायेगा. प्रत्येक राज्य की अलग-अलग कला होती है. इसमें मूर्तिकला, वास्तुकला, काष्ठ कला में काठ-कुनी, पत्थर की नक्काशी, लिखाई, चित्रकारी, मधुबनी चित्रकला, शंख, सीप व मछली के आकार की कलाकृतियों का निर्माण, विभिन्न प्रदेशों की अलग-अलग संगीत-नृत्य आदि जैसी प्रतियोगिताओं को शामिल किया गया है.

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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