सिवान का हसनपुरा अंचल कार्यालयों की रैंकिंग में बना टॉपर, टॉप टेन में बांका और वैशाली का जलवा

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 25 Dec 2024 6:53 PM

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राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बिहार

Circle Offices Rainking: राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्रालय ने बिहार के सभी अंचल कार्यालयों की एक रैंकिंग जारी की है. आइये जानते यह रैंकिंग किस आधार पर तय की जाती है.

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Circle Offices Rainking:  बिहार सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर विभाग ने अंचल कार्यालयों से लेकर जिलों तक किये जा रहे राजस्व कार्यों की समीक्षा की जा रही है. इसी कड़ी में विभाग द्वारा राज्य के सभी 534 अंचल कार्यालयों की समीक्षा कर उनकी नवंबर माह की रैंकिंग जारी की गई है. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि आम जनता को भूमि सर्वे सहित अन्य प्रकार के राजस्व कार्यों में किसी तरह की परेशानी ना हो, इसके लिये मुख्यालय स्तर से अंचल कार्यालयों की समीक्षा की जा रही है. अंचल कार्यालयों की रैंकिंग जारी होने और उनके कार्यों की लगातार समीक्षा से कार्यप्रणाली में काफी सुधार हुआ है.

टॉप-3 अंचल कार्यालय के अंक

रैंकिंग में सिवान के हसनपुरा अंचल कार्यालय को पहला, बांका के फुल्लीडुमर को दूसरा एवं वैशाली के पातेपुर को तीसरा स्थान मिला है. अक्टूबर में पहले स्थान पर फुल्लीडुमर और दूसरे स्थान पर हसनपुरा अंचल कार्यालय था. टॉपर हसनपुरा को 100 में 85.83 अंक मिले हैं तो दूसरे नंबर पर रहे फुल्लीडुमर को 85.77 अंक और तीसरे नंबर पर रहे पातेपुर को 82.72 अंक मिले हैं.

टॉप टेन में बांका और वैशाली के तीन -तीन अंचल कार्यालय

टॉप टेन में बांका के तीन और वैशाली के तीन अंचल कार्यालय ने स्थान पाया है. इस माह की रैंकिंग में मुजफ्फरपुर का पारू अंचल कार्यालय लंबी छलांग लगाते हुए पिछले माह के 21 स्थान से 82.36 अंक लाकर चौथे स्थान पर पहुंच गया है. वैशाली का महुआ पिछले माह के चौथे से 81.21 अंक के साथ पांचवें स्थान पर पहुंच गया है. छठे स्थान पर बांका का बरहट, सातवें स्थान पर औरंगाबाद का हसपुरा, आठवें स्थान पर वैशाली का जंदाहा, नौवें स्थान पर बांका का शंभुगंज एवं दसवें स्थान पर सुपौल का मरौना अंचल कार्यालय है.

टॉप-25 अंचल कार्यालयों के नाम

11वें नंबर पर सिवान का नौतन, 12वें नंबर पर बांका का बौंसी, 13वें नंबर पर शेखपुरा का चेवाड़ा, 14वें नंबर पर पश्चिमी चंपारण का बगहा दो, 15वें नंबर पर समस्तीपुर का कल्याणपुर, 16वें नंबर पर शेखपुरा का घाट कुसुम्भा, 17वें नंबर पर शेखपुरा का ही बरबीघा, 18वें नंबर पर सुपौल का निर्मली, 19वें नंबर पर जहानाबाद का घोसी, 20वें नंबर पर मुंगेर का संग्रामपुर, 21वें नंबर पर पूर्णिया का धमदाहा, 22वें नंबर पर शेखपुरा का शेखोपुरसराय, 23वें नंबर पर सारण का एकमा, 24वें नंबर पर बांका धौरिया एवं 25वें नंबर पर बांका का बांका सदर अंचल कार्यालय का स्थान है.

टॉप 40 में रहने वाले अंचल कार्यालय

बेहतर काम करने में 26वें नंबर पर सारण का रिविलगंज, 27वें नंबर पर जहानाबाद का रतनी फरीदपुर, 28वें नंबर पर जहानाबाद का काको, 29वें नंबर पर रोहतास का सूर्यपुरा, 30वें नंबर पर पूर्णिया का श्रीनगर, 31वें नंबर पर सिवान का आंदर, 32वें नंबर पर सिवान का हुसैनगंज, 33वें नंबर पर बांका का रजौन, 34वें नंबर पर कटिहार का मानसी, 35वें नंबर पर बांका का बेलहर, 36वें नंबर पर पूर्वी चंपारण का कल्याणपुर, 37वें नंबर पर बांका का चांदन, 38वें नंबर पर सुपौल का प्रतापगंज, 39वें नंबर पर मुंगेर का टेटिया बम्बर और 40वें स्थान पर सुपौल का पिपरा अंचल कार्यालय ने जगह बनाया है.

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टॉप 50 में इन अंचलों को मिला स्थान

41वें स्थान पर पूर्णिया का जलालगढ़, 42वें स्थान पर औरंगाबाद का कुटुंबा, 43वें स्थान पर सारण का नगरा, 44वें स्थान पर शेखपुरा का शेखपुरा सदर, 45वें स्थान पर बांका का अमरपुर, 46वें स्थान पर सीतामढ़ी का सुप्पी, 47वें स्थान पर जहानाबाद का मोदनगंज, 48वें स्थान पर मधुबनी का कलुआही, 49वें स्थान पर पश्चिमी चंपारण का ठकराहन एवं 50वें स्थान पर गोपालगंज का पंचदेवरी अंचल कार्यालय आया है.

कैसे मिलता है अंक

बता दें कि रैंकिंग में अंचल कार्यालयों को म्यूटेशन पर 20 अंक दिये जाते हैं. परिमार्जन प्लस पर 25 अंक, अभियान बसेरा पर 15 अंक, आधार सीडिंग पर 2.5 अंक, ऑनलाइन एलपीसी पर 2.5 अंक, ई-मापी पर 15 अंक, अतिक्रमण निपटारे पर पांच अंक, जमाबंदी पर पांच अंक और सरकारी जमीन की एंट्री और वेरिफिकेशन पर 10 अंक दिये जाते हैं.

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Paritosh Shahi

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By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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