पिता का साया नहीं था, मां का भरोसा था, 22 लाख की नौकरी छोड़ बेटे ने बनकर दिखाया SDM
अपनी मां के साथ शुभम कुमार
Success Story: 22 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर शुभम कुमार ने अपने सपने को चुना. पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. मां ने हर कदम पर उनका साथ दिया. कड़ी मेहनत का नतीजा रहा कि उन्होंने BPSC 70वीं परीक्षा में 88वीं रैंक हासिल कर SDM बनने का सपना पूरा कर लिया.
Success Story: कई लोग अच्छी नौकरी मिलने के बाद अपने करियर को सुरक्षित मान लेते हैं. लेकिन शुभम कुमार ने एक अलग रास्ता चुना. उनके पास सालाना 22 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी का अवसर था. आर्थिक रूप से यह एक मजबूत फैसला हो सकता था, लेकिन शुभम का सपना प्रशासनिक अधिकारी बनना था.
उन्होंने नौकरी के बजाय अपने सपने को चुना. यही फैसला आज उनकी पहचान बन गया है. BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उन्होंने 88वीं रैंक हासिल की और बिहार प्रशासनिक सेवा (SDM) के लिए चयनित हुए.
पिता का साया नहीं था, मां बनीं सबसे बड़ी ताकत
शुभम की सफलता के पीछे उनकी मां का बड़ा योगदान है. उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. वे एक वकील थे. पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी बेटे को कमजोर नहीं पड़ने दिया. हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया. जब शुभम ने 22 लाख रुपये का पैकेज छोड़ने का फैसला लिया, तब भी मां ने उन पर सवाल नहीं उठाया.
उनकी मां ने बताया कि मुझे अपने बेटे पर पूरा भरोसा था. मुझे पता था कि वह एक दिन जरूर अधिकारी बनेगा.
दोस्तों ने भी नहीं टूटने दिया हौसला
सफलता की इस यात्रा में शुभम के दोस्त भी उनके साथ खड़े रहे. अभिषेक और रितेश ने हर मुश्किल समय में उनका मनोबल बढ़ाया. जब तैयारी के दौरान दबाव बढ़ा, तब दोस्तों ने उन्हें लक्ष्य याद दिलाया. उन्होंने शुभम को हार नहीं मानने दी.
पहले प्रयास में मिली बड़ी सफलता
शुभम ने पूरी लगन और अनुशासन के साथ तैयारी की. उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी ध्यान नहीं हटाया. मेहनत का परिणाम यह हुआ कि पहले ही प्रयास में BPSC परीक्षा पास कर ली. 88वीं रैंक के साथ उनका चयन बिहार प्रशासनिक सेवा में हो गया. यह पल उनके परिवार के लिए गर्व और खुशी लेकर आया.
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युवाओं के लिए प्रेरणा
शुभम कुमार की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है. यह भरोसे, संघर्ष और सपनों की कहानी है.
एक बेटे ने मां के विश्वास को सच साबित किया. एक युवा ने सुरक्षित करियर छोड़कर अपने सपने का पीछा किया. आज उनकी सफलता हजारों युवाओं को यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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