सम्राट चौधरी के CM बनते ही 13 जिलों की जेलों में एक साथ छापेमारी, हाई सिक्योरिटी वार्ड तक खंगाले गए

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गोपालगंज जेल की तस्वीर

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Bihar News: बिहार में नई सरकार बनते ही पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. राज्य के 13 जिलों की जेलों में एक साथ छापेमारी कर सघन तलाशी ली गई, जिससे प्रशासन की सख्ती साफ नजर आ रही है.

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Bihar News: सम्राट चौधरी के सीएम बनते ही बिहार पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है. शुक्रवार सुबह राज्य के 13 जिलों- नालंदा, समस्तीपुर, औरंगाबाद, भोजपुर, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर समेत कई जगहों की जेलों में एक साथ छापेमारी की गई. इस कार्रवाई से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया.

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हर कोने की तलाशी, कुख्यात अपराधियों पर खास नजर

छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने जेलों के बैरक, किचन, शौचालय और हाई सिक्योरिटी वार्ड तक की गहन जांच की. खास तौर पर कुख्यात अपराधियों के वार्डों पर विशेष ध्यान दिया गया. तलाशी अभियान का उद्देश्य जेल के अंदर से संचालित आपराधिक नेटवर्क पर नकेल कसना था.

नालंदा में सुबह 4 बजे से ऑपरेशन

नालंदा के बिहारशरीफ मंडल कारा में सुबह 4 बजे करीब 100 पुलिस जवानों की टीम ने छापेमारी शुरू की. डीएम कुंदन कुमार और एसपी भारत सोनी भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए. करीब तीन घंटे चली कार्रवाई में किसी भी आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी नहीं हुई.

मुजफ्फरपुर में डीएम-एसएसपी के नेतृत्व में सर्च ऑपरेशन

मुजफ्फरपुर की शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में डीएम सुब्रत कुमार सेन और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सुबह 4:30 बजे से तलाशी अभियान शुरू हुआ. जेल के हर वार्ड, बिस्तर और शौचालय तक की जांच की गई, लेकिन यहां भी कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला.

औरंगाबाद में 230 जवानों के साथ छापेमारी

औरंगाबाद मंडल कारा में जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा और एसपी अंबरीष राहुल के नेतृत्व में करीब 230 पुलिस जवानों ने संयुक्त रूप से छापेमारी की. पुरुष और महिला वार्ड के साथ-साथ किचन और अस्पताल परिसर की भी बारीकी से जांच की गई.

मोतिहारी और समस्तीपुर में भी चला अभियान

मोतिहारी सेंट्रल जेल में सुबह 5 बजे पुलिस टीम ने दो घंटे तक तलाशी ली, जबकि समस्तीपुर मंडल कारा में गुरुवार रात 10:15 बजे से छापेमारी शुरू हुई. दोनों जगहों पर भी कोई आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ.

जेल के बाहर कड़ी सुरक्षा, बड़े अधिकारियों की मौजूदगी

इस अभियान में एडीएम, एसडीओ, एएसपी, डीएसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे. जेल परिसरों के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. पुलिस और प्रशासन के काफिले में बसों और कई गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया.

कानून-व्यवस्था पर सख्ती का संदेश

हालांकि पुलिस ने आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद की गई है. इस बड़े ऑपरेशन को राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

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