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Pitru Paksha 2025: गयाजी में उमड़े देश-विदेश से श्रद्धालु, 5500 पुलिस बल और ड्रोन से हाईटेक सुरक्षा

Updated at : 07 Sep 2025 9:55 AM (IST)
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High-tech security arrangements at Pitrupaksha Mahasangam

High-tech security arrangements at Pitrupaksha Mahasangam

Pitru Paksha 2025: आस्था, परंपरा और सुरक्षा… गयाजी के पितृपक्ष मेले में इस बार तीनों का संगम देखने को मिल रहा है. लाखों श्रद्धालु जहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान कर रहे हैं, वहीं प्रशासन ने “परिंदा भी पर न मार सके” जैसी सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया है.

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Pitru Paksha 2025: बिहार के गया में पितृपक्ष महासंगम 2025 का भव्य उद्घाटन शनिवार को हुआ. पारंपरिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच त्रिपाक्षिक पिंडदान की शुरुआत की गई. फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर परिसर में जुटे श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए आहुतियां देने लगे.

माना जाता है कि गया में पिंडदान करने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है. यही कारण है कि यह मेला न केवल बिहार बल्कि पूरे देश और विदेश के तीर्थयात्रियों को अपनी ओर खींचता है.

5500 पुलिस जवान तैनात

श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस बार प्रशासन ने 5500 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की है. इनमें बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी) की 15 कंपनियां शामिल हैं. विष्णुपद मंदिर, पुनपुन घाट और सभी पिंड वेदियों पर चौकसी बढ़ा दी गई है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार ने कहा—
“सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत की गई है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा. सभी पुलिस पदाधिकारी पूरी मुस्तैदी से काम करेंगे.”

हाईटेक सुरक्षा: 150 सीसीटीवी और ड्रोन

पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. कंट्रोल रूम में 24 घंटे पुलिस और डिजिटल विशेषज्ञ नजर रखेंगे. इसके अलावा ड्रोन और वीडियोग्राफी से भी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाएगी. भीड़भाड़ वाले इलाकों और संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखने के लिए सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है.

मेले में एक अस्थाई थाना स्थापित किया गया है, जहां पुरुष और महिला पुलिस बल दोनों तैनात हैं. थाना अध्यक्ष से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के अधिकारी यहां ड्यूटी पर रहेंगे. इसके साथ ही रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और प्रमुख घाटों पर हेल्प डेस्क बनाए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को समय पर जानकारी और सहायता मिल सके.

17 सुपर जोन, 324 सेक्टर में बंटा मेला क्षेत्र

जिला प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को 17 सुपर जोन, 43 जोन और 324 सेक्टर में बांटा है. हर सेक्टर में दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी और महिला पुलिस बल मौजूद हैं. जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा—
“तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. सभी सेक्टरों में पर्याप्त बल और अधिकारी तैनात हैं.”

गया में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है. इसके लिए वन-वे ट्रैफिक, पार्किंग जोन और पब्लिक एड्रेस सिस्टम की व्यवस्था की गई है.

रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में आरपीएफ और जिला पुलिस का फ्लैग मार्च जारी है. यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात है.

श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं

प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई इंतजाम किए हैं. तालाबों और नदी किनारे बैरिकेडिंग, साइन बोर्ड, गोताखोर और एसडीआरएफ की टीम लगाई गई है. दुर्घटना की स्थिति से निपटने के लिए लाइफ जैकेट और मेडिकल टीमें भी मुस्तैद हैं.

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पंकज दराद ने बताया—
“395 पुलिस पदाधिकारी, 1600 कॉन्स्टेबल और 800 होमगार्ड जवान मेले में ड्यूटी पर हैं. इसके अलावा बीएसएपी की पांच कंपनियां भी तैनात की गई हैं.”

गया और पुनपुन दोनों जगहों पर श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि यहां पिंडदान से पितरों को शांति मिलती है और परिवार पर पुण्य की वर्षा होती है. यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां आते हैं.

इस बार प्रशासन ने न केवल सुरक्षा बल्कि श्रद्धालु सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन पर भी पूरा जोर दिया है. पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार घोषणाएं की जा रही हैं और हेल्प डेस्क यात्रियों को हर संभव सहयोग दे रहे हैं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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