पटना: प्रधानमंत्री किसान निधि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर 1.20 लाख की साइबर ठगी, मोबाइल हैक कर उड़ाए पैसे

Author Nitish kumar|Edited by Nikhil Anurag
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सांकेतिक तस्वीर

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Patna cyber fraud: साइबर अपराधियों ने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों को ठगने का नया तरीका अपनाया है. मुजफ्फरपुर और पटना में लाखों की ठगी हुई है. जानें कैसे बचें इस जालसाजी से.

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Patna cyber fraud: साइबर अपराधियों ने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों को ठगने का नया तरीका अपनाया है. मुजफ्फरपुर के गायघाट निवासी राजीव कुमार से प्रधानमंत्री किसान निधि योजना की राशि दिलाने के नाम पर एक लाख रुपये की ठगी कर ली गई. वहीं आलमगंज निवासी साज आलम के मोबाइल फोन को हैक कर साइबर बदमाशों ने उनके खाते से तीन बार में 1.20 लाख रुपये की निकासी कर ली. दोनों मामलों में पीड़ितों ने पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है.

केवाईसी के नाम पर खाते से उड़ा लिए रुपये

राजीव कुमार ने साइबर थाने में दर्ज शिकायत में बताया है कि उन्हें एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को प्रधानमंत्री किसान निधि योजना कार्यालय का अधिकारी बताया. बदमाश ने कहा कि उनके नाम से प्रधानमंत्री किसान निधि योजना की आठ हजार रुपये की राशि आई हुई है, लेकिन इसके लिए केवाईसी कराना अनिवार्य है.

इसके बाद साइबर अपराधियों ने उन्हें फोन-पे एप खोलने और कुछ कोड डालने के लिए कहा. राजीव कुमार ने उनकी बातों में आकर निर्देशों का पालन किया. इसके तुरंत बाद उनके बैंक खाते से एक लाख रुपये की निकासी हो गई. ठगी का अहसास होने पर उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई.

मोबाइल हैक कर खाते से निकाले 1.20 लाख रुपये

दूसरे मामले में आलमगंज निवासी साज आलम के मोबाइल फोन को साइबर अपराधियों ने हैक कर लिया. इसके बाद उनके बैंक खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1.20 लाख रुपये निकाल लिए गए. पीड़ित को जब खाते से रुपये निकासी की जानकारी मिली, तब उन्होंने तत्काल साइबर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

साइबर पुलिस कर रही मामले की जांच

दोनों मामलों में साइबर थाने की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी के लिए किन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी सरकारी योजना के नाम पर फोन कर केवाईसी, ओटीपी, यूपीआई पिन या कोड साझा करने से बचें और संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने को दें.

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