Patna News : IGIC में बिहार के 19 बच्चों को मिली नई जिंदगी, बिना चीर-फाड़ हुआ हृदय का सफल ऑपरेशन
Published by : Rajeev Kumar Updated At : 22 May 2026 10:35 AM
इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान मौजूद डॉक्टरों की टीम
इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में बाल हृदय योजना के तहत दो दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया. इस दौरान गरीब परिवारों के बच्चों को काफी ज्यादा राहत मिली. करीब 19 बच्चों का बिना चीरा-फाड़ की आधुनिक तकनीक डिवाइस क्लोजर के माध्यम से सफल ऑपरेशन किया गया.
Patna News : (आनंद तिवारी) मुख्यमंत्री बिहार और स्वास्थ्य मंत्री बिहार की महत्वाकांक्षी बाल हृदय योजना तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आइजीआइसी में 20 और 21 मई को विशेष शिविर आयोजित किया गया. इस दौरान कुल 19 बच्चों का बिना चीर-फाड़ की आधुनिक तकनीक डिवाइस क्लोजर के माध्यम से सफल ऑपरेशन किया गया. संस्थान प्रशासन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया नि:शुल्क की गई, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली.
जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए यह तकनीक सुरक्षित और प्रभावी
ऑपरेशन संस्थान के निदेशक डॉ सुनील कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. विशेषज्ञों ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए यह तकनीक काफी सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है, क्योंकि इसमें ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती और मरीज जल्द स्वस्थ हो जाता है. विशेष शिविर में बच्चों का ऑपरेशन नई दिल्ली के प्रसिद्ध बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ नीरज अवस्थी तथा आईजीआईसी, पटना की डॉ पूजा कुमारी की टीम ने किया. चिकित्सकों ने अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों की मदद से सभी प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया.
अब दूसरे राज्य जाने की जरूरत नहीं
बिहार से अब दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं. इस अभियान को सफल बनाने में संयुक्त निदेशक सह नोडल पदाधिकारी डॉ विरेंद्र कुमार सिंह, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ सिमता सिंह और डॉ अभिषेक नंदन भारद्वाज की अहम भूमिका रही. वहीं, ओटी बैकअप सीटीवीएस टीम के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भी लगातार सहयोग दिया. संस्थान प्रशासन ने बताया कि राज्य सरकार की इस योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद बच्चों को समय पर बेहतर हृदय उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक अभाव के कारण किसी बच्चे का इलाज प्रभावित न हो.
बाल हृदय योजना गरीब परिवारों के लिए जीवनदायी
इस प्रकार के विशेष शिविरों से अब प्रदेश के बच्चों को राज्य के बाहर जाने की आवश्यकता भी कम हो रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, जन्मजात हृदय रोग के मामलों में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है. ऐसे में बाल हृदय योजना गरीब परिवारों के लिए जीवनदायी साबित हो रही है. आइजीआइसी में लगातार बढ़ रही सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं के कारण अब बिहार में ही जटिल हृदय रोगों का इलाज संभव हो पा रहा है.
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