Patna News : गंगा से रोज 220 एमएलडी पानी की आपूर्ति, जलापूर्ति व्यवस्था की कमान अब बुडको के हाथ

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 22 May 2026 8:19 AM

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नज से जल का सांकेतिक तस्वीर

राजधानी पटना में बढ़ती आबादी और रोजाना 215 से 220 एमएलडी पानी की जरूरत को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था में बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया है.

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राजधानी पटना में बढ़ती आबादी और रोजाना 215 से 220 एमएलडी पानी की जरूरत को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था में बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया है.

Patna News : (हिमांशु देव) राजधानी पटना में बढ़ती आबादी और रोजाना 215 से 220 एमएलडी पानी की जरूरत को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था में बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर निगम क्षेत्र की सभी जलापूर्ति योजनाओं की जिम्मेदारी अब बुडको को सौंप दी है. शहर की सभी पेयजल योजनाएं अब केंद्र सरकार की अमृत-2.0 योजना के तहत पूरी की जाएंगी. इसके चलते नगर निगम द्वारा प्रस्तावित कई योजनाओं पर तत्काल रोक लगा दी गई है.

जानकारी के अनुसार पिछले महीने 44 वार्डों में 110 से अधिक हाई-कैपेसिटी बोरिंग लगाने की योजना को मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब इस योजना पर ब्रेक लग गया है. इसी तरह सभी 75 वार्डों में पांच-पांच सबमर्सिबल बोरिंग लगाने, 100 से अधिक स्थानों पर पाइपलाइन जोड़ने तथा जल नेटवर्क विस्तार से जुड़े सभी प्रोजेक्ट फिलहाल रोक दिए गए हैं. 11.70 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित 75 वार्डों की सबमर्सिबल योजना पर भी अब काम नहीं होगा.

266 हाई यील्ड बोरिंग परियोजनाओं में से 182 का काम पूरा

वहीं 266 हाई यील्ड बोरिंग परियोजनाओं में से 182 का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष 84 योजनाओं पर कार्य रोक दिया गया है. नगर विकास विभाग ने निर्देश दिया है कि जिन योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी थी लेकिन वे धरातल पर नहीं उतर सकीं, उन्हें एकीकृत कर हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल के तहत नया प्रस्ताव तैयार किया जाए. इसके लिए बुडको को 15 दिनों के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सौंपने का निर्देश दिया गया है.

शहर में रोज 202 एमएलडी भूजल का दोहन हो रहा

विभाग ने भूजल दोहन कम करने और गंगा के सतही जल के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है. वर्तमान में शहर में रोजाना 190 से 202 एमएलडी भूजल का दोहन हो रहा है. इसके अलावा करीब 30 से 40 प्रतिशत आबादी निजी सबमर्सिबल और बोरिंग पर निर्भर है. वहीं पानी के कारोबारी भी बड़े पैमाने पर भूजल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे भूजल स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

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