Patna News: मुंह और नाक दबाकर छींकने से घायल हो रहे कान के परदे, पटना मेडिकल कॉलेज ने स्क्रीनिंग कर तैयार की रिपोर्ट
सांकेतिक तस्वीर
Patna News: पीएमसीएच के इएनटी विभाग में बीते एक साल के अंदर कान से संबंधित दिक्कत लेकर आये करीब 20 से 58 साल की उम्र तक के लगभग 600 मरीजों की स्क्रीनिंग की गयी.
आनंद तिवारी, Patna News: कई बार हमारी छोटी या मामूली दिखने वाली आदतें, हमारे लिए घातक साबित हो जाती हैं. ऐसी ही एक आदत है छींक रोकना या मुंह व नाक दबाकर छींकना. अक्सर लोग जब किसी सार्वजनिक स्थान पर होते हैं तो छींक आने पर उसे दबा लेते हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो तुरंत संभल जाएं. यह आदत आफत बनकर कान के परदे पर असर डाल रही हैं और परदे घायल हो रहे हैं और इसकी भनक तक नहीं लग रही है. कान के परदे में दिक्कत वाले मरीजों की पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने स्क्रीनिंग कर रिपोर्ट तैयार की, तो मामले समाने आये.
20 से 58 उम्र के मरीज लंबे समय से मुंह, नाक दबाकर छींकते थे
पीएमसीएच के इएनटी विभाग में बीते एक साल के अंदर कान से संबंधित दिक्कत लेकर आये करीब 20 से 58 साल की उम्र तक के लगभग 600 मरीजों की स्क्रीनिंग की गयी. इसमें करीब 25 प्रतिशत मरीजों ने बताया कि उनकी परेशानी की वजह मुंह, नाक दबाकर छींकने की या रोकने की पुरानी आदत थी. विशेषज्ञों का मानना है कि मुंह दबाकर छींकने से कान के परदे पर बेवजह दबाव पड़ रहा है. नतीजतन परदे कमजोर हो रहे हैं. वहीं जानकारों की मानें, तो मरीजों को जागरूक व बेहतर इलाज को लेकर इस रिपोर्ट को अस्पताल प्रशासन को सौंपा जायेगा. इसके बाद पीएमसीएच की ओर से प्रकाशित होने वाली पेशेंट जनरल बुक में प्रकाशित किया जायेगा.
बैठे-बैठे कान में कुछ भी डालना नुकसानदेह
पीएमसीएच इएनटी विभाग में विभागाध्यक्ष पद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए डॉ विनीत सिन्हा ने बताया कि पीएमसीएच आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग में ऐसे केस देखने को मिले, जिनको बैठे-बैठे कान में कुछ भी डालने की आदत है. मसलन माचिस की तीली, चाबी, पेन डालकर धीरे-धीरे खुजलाना भी कान व परदे की सेहत के लिए खतरनाक है. इसके अलावा कान में चोट व संक्रमण से भी परदे कमजोर होते हैं. उन्होंने बताया कि पीएमसीएच में आने वाले ऐसे मरीज जो छींक रोकने या मुंह व नाक दबाकर छींकते हैं उनके कान के परदे में सिकुड़न होने के बाद इलाज किया जा रहा है.
इनका कहना है-
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आईएस ठाकुर ने बताया कि छींकते समय मुंह, नाक बंद या छींक रोकना बेहद खतरनाक हो सकता है. स्क्रीनिंग में इस तरह के केस सामने आ चुके हैं, जिनके परदे पर असर देखने को मिला. उन्होंने बताया कि छींक आना भी बॉडी की सामान्य प्रक्रिया है. नाक में इन्फेक्शन और डस्ट जाने व एलर्जी की वजह से छींकें आती हैं. छींक को रोका जाये तो यह प्रेशर अंदर ही डेवलप होता रहता है. यह बाहर नहीं निकल पाता है. प्रेशर अंदर डवलप होने से कानों और गले पर असर डालता है. प्रेशर रिलीज नहीं होने के कारण कान के परदे में सिकुड़न हो सकती है.
क्या है लक्षण
- कान में अचानक तेज दर्द होना
- कान में मवाद का लगातार बहना
- सीटी जैसी आवाज महसूस होना
- कान में तेज खुजली व सिर चकराना
आप ये तरीका अपनाएं
- कान की सफाई नियमित करें
- कोई भी वस्तु डालने से बचें
- तेज संगीत व आवाज से बचें
- श्रवण सुरक्षा का उपयोग जरूरी
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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