ePaper

Patna News: मुंह और नाक दबाकर छींकने से घायल हो रहे कान के परदे, पटना मेडिकल कॉलेज ने स्क्रीनिंग कर तैयार की रिपोर्ट

Updated at : 27 Feb 2025 12:09 AM (IST)
विज्ञापन
Patna Medical College Hospital

सांकेतिक तस्वीर

Patna News: पीएमसीएच के इएनटी विभाग में बीते एक साल के अंदर कान से संबंधित दिक्कत लेकर आये करीब 20 से 58 साल की उम्र तक के लगभग 600 मरीजों की स्क्रीनिंग की गयी.

विज्ञापन

आनंद तिवारी, Patna News: कई बार हमारी छोटी या मामूली दिखने वाली आदतें, हमारे लिए घातक साबित हो जाती हैं. ऐसी ही एक आदत है छींक रोकना या मुंह व नाक दबाकर छींकना. अक्सर लोग जब किसी सार्वजनिक स्थान पर होते हैं तो छींक आने पर उसे दबा लेते हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो तुरंत संभल जाएं. यह आदत आफत बनकर कान के परदे पर असर डाल रही हैं और परदे घायल हो रहे हैं और इसकी भनक तक नहीं लग रही है. कान के परदे में दिक्कत वाले मरीजों की पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने स्क्रीनिंग कर रिपोर्ट तैयार की, तो मामले समाने आये.

20 से 58 उम्र के मरीज लंबे समय से मुंह, नाक दबाकर छींकते थे

पीएमसीएच के इएनटी विभाग में बीते एक साल के अंदर कान से संबंधित दिक्कत लेकर आये करीब 20 से 58 साल की उम्र तक के लगभग 600 मरीजों की स्क्रीनिंग की गयी. इसमें करीब 25 प्रतिशत मरीजों ने बताया कि उनकी परेशानी की वजह मुंह, नाक दबाकर छींकने की या रोकने की पुरानी आदत थी. विशेषज्ञों का मानना है कि मुंह दबाकर छींकने से कान के परदे पर बेवजह दबाव पड़ रहा है. नतीजतन परदे कमजोर हो रहे हैं. वहीं जानकारों की मानें, तो मरीजों को जागरूक व बेहतर इलाज को लेकर इस रिपोर्ट को अस्पताल प्रशासन को सौंपा जायेगा. इसके बाद पीएमसीएच की ओर से प्रकाशित होने वाली पेशेंट जनरल बुक में प्रकाशित किया जायेगा.

बैठे-बैठे कान में कुछ भी डालना नुकसानदेह

पीएमसीएच इएनटी विभाग में विभागाध्यक्ष पद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए डॉ विनीत सिन्हा ने बताया कि पीएमसीएच आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग में ऐसे केस देखने को मिले, जिनको बैठे-बैठे कान में कुछ भी डालने की आदत है. मसलन माचिस की तीली, चाबी, पेन डालकर धीरे-धीरे खुजलाना भी कान व परदे की सेहत के लिए खतरनाक है. इसके अलावा कान में चोट व संक्रमण से भी परदे कमजोर होते हैं. उन्होंने बताया कि पीएमसीएच में आने वाले ऐसे मरीज जो छींक रोकने या मुंह व नाक दबाकर छींकते हैं उनके कान के परदे में सिकुड़न होने के बाद इलाज किया जा रहा है.

इनका कहना है-

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आईएस ठाकुर ने बताया कि छींकते समय मुंह, नाक बंद या छींक रोकना बेहद खतरनाक हो सकता है. स्क्रीनिंग में इस तरह के केस सामने आ चुके हैं, जिनके परदे पर असर देखने को मिला. उन्होंने बताया कि छींक आना भी बॉडी की सामान्य प्रक्रिया है. नाक में इन्फेक्शन और डस्ट जाने व एलर्जी की वजह से छींकें आती हैं. छींक को रोका जाये तो यह प्रेशर अंदर ही डेवलप होता रहता है. यह बाहर नहीं निकल पाता है. प्रेशर अंदर डवलप होने से कानों और गले पर असर डालता है. प्रेशर रिलीज नहीं होने के कारण कान के परदे में सिकुड़न हो सकती है.

Also Read: Patna: शिवमय हुई बिहार की राजधानी, शिव दर्शन से धन्य हुए भक्त, राज्यपाल-मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम ने उतारी आरती

क्या है लक्षण

  • कान में अचानक तेज दर्द होना
  • कान में मवाद का लगातार बहना
  • सीटी जैसी आवाज महसूस होना
  • कान में तेज खुजली व सिर चकराना

आप ये तरीका अपनाएं

  • कान की सफाई नियमित करें
  • कोई भी वस्तु डालने से बचें
  • तेज संगीत व आवाज से बचें
  • श्रवण सुरक्षा का उपयोग जरूरी

Also Read: Bihar News: ड्रेस पसंद नहीं आयी तो दुल्हन ने तोड़ दी शादी, दूल्हा सहित बारातियों को बनाया गया बंधक

विज्ञापन
Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन