Patna News: बैंक की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग सख्त
Published by : Vivek Pandey Updated At : 22 May 2026 12:39 PM
Patna News: एक्सिस बैंक को 75 हजार रुपये मुआवजा और वाद व्यय देने का आदेश
Patna News: (अनुपम कुमार) पटना जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक्सिस बैंक को सेवा में लापरवाही का दोषी मानते हुए उपभोक्ता को 75 हजार रुपये मुआवजा और वाद व्यय देने का आदेश दिया है. आयोग ने बैंक को 60 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है.
2009 में एक्सिस बैंक से गृह ऋण लिया था
मामला पटना निवासी जितवाशण शर्मा द्वारा वर्ष 2016 में दायर उपभोक्ता वाद से जुड़ा है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी पुष्पा राय ने वर्ष 2009 में एक्सिस बैंक से गृह ऋण लिया था. बैंक द्वारा 9.04 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था, जिसमें “प्रॉपर्टी एवं लाइफ इंश्योरेंस” शामिल होने का उल्लेख स्वीकृति पत्र में किया गया था. शिकायतकर्ता का कहना था कि बैंक ने बीमा मद में 27,572 रुपये काट लिए, लेकिन उनकी पत्नी की वर्ष 2013 में कैंसर से मृत्यु के बाद भी ऋण का बीमा दावा नहीं निपटाया गया. शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि पत्नी की मृत्यु के बाद भी बैंक ने बकाया राशि जमा करने का दबाव बनाया और उन्हें 1.68 लाख रुपये अतिरिक्त जमा करने पड़े. उन्होंने बैंक पर मानसिक, आर्थिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की थी.
3.49 लाख रुपये की बकाया राशि माफ कर दी गई थी
वहीं, बैंक की ओर से कहा गया कि ऋण राशि में केवल संपत्ति बीमा कराया गया था और जीवन बीमा के लिए कोई प्रीमियम नहीं लिया गया. बैंक ने दावा किया कि उधारकर्ता ने स्वेच्छा से जीवन बीमा लेने से इनकार कर दिया था. बैंक ने यह भी बताया कि मानवीय आधार पर 3.49 लाख रुपये की बकाया राशि माफ कर दी गई थी. सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि स्वीकृति पत्र में “लाइफ इंश्योरेंस” का उल्लेख था. आयोग ने कहा कि यदि ग्राहक ने जीवन बीमा लेने से इनकार किया था, तो बैंक को उसका लिखित प्रमाण प्रस्तुत करना चाहिए था, जो बैंक नहीं कर सका.
50 हजार रुपये मानसिक
आयोग ने बैंक की इस दलील को अस्वीकार करते हुए माना कि सेवा में लापरवाही हुई है. आयोग के सदस्य राजनीश कुमार और अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा की पीठ ने बैंक को शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपये मानसिक पीड़ा एवं शारीरिक कष्ट के लिए तथा 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया. आयोग ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय में राशि का भुगतान नहीं किया गया तो उस पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा.
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By Vivek Pandey
विवेक पाण्डेय टीवी चैनल के माध्यम से पिछले 7 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हूं . करियर की शुरुआत Network 10 National News Channel से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहा हूं. देश और राज्य की राजनीति, कृषि और शिक्षा में रुचि रखता हूं.
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