मनीष रंजन को नहीं मिली जमानत, NEET छात्रा मौत मामले में कोर्ट ने फिर CBI को लगाई फटकार
Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 11 Mar 2026 4:13 PM
शंभू गर्ल्स हॉस्टल और मनीष रंजन की तस्वीर
Patna NEET Student Death Case: पटना नीट छात्रा मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को जमानत नहीं मिली है. पॉक्सो कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने फिर CBI को फटकार लगाते हुए कई सवाल पूछे.
Patna NEET Student Death Case: पटना नीट छात्रा मौत मामले में जेल में बंद शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को मंगलवार को भी जमानत नहीं मिली. पॉक्सो कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन फैसला नहीं हो पाया. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए कल की तारीख तय की है. फिलहाल मनीष रंजन बेउर जेल में ही बंद रहेंगे.
CBI कोर्ट में लेकर पहुंची जांच रिपोर्ट
आज की सुनवाई के दौरान CBI कोर्ट में अपनी जांच से जुड़े दस्तावेज लेकर पहुंची. बताया जा रहा है कि एजेंसी चार बंडलों में केस से संबंधित रिपोर्ट और अन्य कागजात कोर्ट के सामने पेश करने के लिए लाई थी. कोर्ट ने इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड में लिया और मामले पर आगे की सुनवाई की.
कोर्ट ने CBI से क्या पूछा?
मिली जानकारी के अनुसार, करीब ढाई घंटे तक सुनवाई चली. इस दौरान कोर्ट ने फिर CBI को फटकार लगाते हुए पूछा, 20 दिनों से CBI मूकदर्शक बनी है. जब आपको केस हैंडओवर किया गया, तब आपको इसकी जानकारी थी या नहीं कि मनीष कस्टडी में है?
ये क्यों नहीं माना जाए कि आपकी लापरवाही की वजह से वो 14 फरवरी से 11 मार्च तक गैरकानूनी तरीके से जेल में है? इसका कॉम्पनसेशन कौन देगा?
बचाव पक्ष ने की जमानत की मांग
सुनवाई के दौरान मनीष रंजन के वकील ने कोर्ट से जमानत देने की अपील की. उन्होंने दलील दी कि जांच एजेंसी को अब उनकी जरूरत नहीं है. इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए. हालांकि, पीड़ित परिवार के वकील एसके पांडेय ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए.
कोर्ट ने एजेंसियों से किया था सवाल
इस मामले में पहले भी कोर्ट ने पटना पुलिस और CBI से सवाल किया था. दोनों एजेंसियों ने कोर्ट को बताया था कि उन्हें मनीष रंजन की जरूरत नहीं है. इस पर कोर्ट ने पूछा था कि अगर जांच में जरूरत नहीं है, तो फिर वह अब तक जेल में क्यों बंद हैं. इस मामले की पिछली सुनवाई 2 मार्च को हुई थी. उसी दिन अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई थी. इसी कारण मनीष रंजन को इस बार होली भी बेउर जेल में ही बितानी पड़ी.
बाद में जोड़ी गई पॉक्सो एक्ट की धारा
जब इस केस की जांच CBI ने अपने हाथ में ली थी, तब उसमें पॉक्सो एक्ट की धारा शामिल नहीं थी. इसे लेकर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी. बाद में सरकार की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया. इसके आधार पर CBI ने अपने केस में पॉक्सो एक्ट की धारा को जोड़ दिया. अब इस मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में ही होगी.
जांच में नहीं मिले ठोस सबूत
CBI ने केस अपने हाथ में लेने के बाद कई जगहों पर जांच की. पटना और जहानाबाद में कई लोगों से पूछताछ की गई. हॉस्टल समेत कई जगहों की तलाशी भी ली गई. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक अब तक एजेंसी को कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं. जांच की दिशा भी काफी हद तक पटना पुलिस की SIT की तरह ही रही है.
पीड़ित परिवार ने जताई नाराजगी
पीड़ित परिवार और उनके वकील लगातार CBI की जांच पर सवाल उठाते रहे हैं. उनका आरोप है कि मामले की जांच में लापरवाही बरती जा रही है. सुनवाई के दौरान जब जांच की कुछ खामियां सामने आईं, तब कोर्ट ने भी इस पर सख्त टिप्पणी की थी. फिलहाल सभी की नजर अब अगली सुनवाई पर टिकी है.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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