बिहार में 40 फुट से अधिक चौड़ी सड़क पर बिल्डिंग की ऊंचाई पर अब कोई प्रतिबंध नहीं, जानें बदले हुए नियम

बिहार बिल्डिंग बायलॉज (बिहार भवन उप विधि)-2014 में संशोधन की मंजूरी दे दी गयी.अब 40 फुट एवं उससे अधिक चौड़ी सड़क पर बनने वाली बिल्डिंग में ऊंचाई के प्रतिबंध को खत्म कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को राज्य कैबिनेट की हुई बैठक में बिहार बिल्डिंग बायलॉज (बिहार भवन उप विधि)-2014 में संशोधन की मंजूरी दे दी गयी. संशोधित बायलॉज में 40 फुट एवं उससे अधिक चौड़ी सड़क पर बनने वाली बिल्डिंग में ऊंचाई के प्रतिबंध को खत्म कर दिया गया है. अब 25 फुट चौड़ी सड़क पर जी प्लस 4 अधिकतम ऊंचाई 16 मीटर के भवन की अनुमति का प्रावधान रहेगा. जबकि 30 फुट चौड़ी सड़क पर जी प्लस 5 अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर के पूर्व के प्रावधानों में संशोधन करते हुए जी प्लस 6 अधिकतम ऊंचाई 22 मीटर के भवन निर्माण की अनुमति रहेगी.
बहुमंजिला भवन परिसर में खुले जगह में वृद्धि लाने और ग्रीन एरिया को बढ़ाने के दृष्टिकोण से 19 मीटर से ऊपर की ऊंचाई के भवनों के लिए ग्राउंड कवरेज अधिकतम 40% रखा गया है. इसके तहत अब किसी भी बहुमंजिली इमारत वाले परिसर के आगे और पीछे खाली जगह छोड़नी होगी. केंद्र सरकार के मॉडल बिल्डिंग बायलॉज की परिभाषाएं जोड़ी गयीं.
नये बायलॉज में प्रस्तावित संशोधन के कुछ प्रमुख बिंदुओं जैसे अपार्टमेंट, प्राधिकार,भवन की ऊंचाई, फर्श क्षेत्र अनुपात (एफएआर), विरासत प्रक्षेत्र, मिश्रित भूमि उपयोग, प्राचीर, रजिस्ट्रीकृत वास्तुविद्, बिल्डर्स, अभियंता, सड़क चौड़ाई एवं सर्विस फ्लोर आदि बिंदुओं की परिभाषाओं में स्पष्टता लायी गयी है.
इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार के मॉडल बिल्डिंग बायलॉज-2016 के आलोक में कुछ परिभाषाओं को जोड़ा गया है. अब किसी भी बहुमंजिली इमारत में बिल्डिंग एनवेलप, व्यक्ति, भूमि व परिसरों का मुख्य उपयोग, केबिन, लिफ्ट, लॉबी, प्रतिषिद्ध क्षेत्र, लेआउट संरक्षित स्मारक, खुला क्षेत्र एवं साइट प्लान रखना अनिवार्य होगा.
बिल्डिंग बायलॉज में गंगा और अन्य नदियों के किनारे निर्माण पर प्रतिबंध से संबंधित प्रावधानों में भी संशोधन किये गये हैं. गंगा नदी के किनारे शहर सुरक्षा दीवार से शहरी इलाके की ओर 15 मीटर भूमि के अंदर और गंगा नदी के किनारे तटबंध के निचले किनारे से शहरी इलाके की ओर 25 मीटर की भूमि के अंदर निर्माण की अनुमति नहीं होगी. अन्य नदियों के मामले में अधिकतम आसिलेटेड किनारे से 30 मीटर की भूमि पट्टी के अंदर भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी जायेगी.
नये बिल्डिंग बायलॉज से ऊंची इमारतों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और कम क्षेत्रफल में शहर की बढ़ती आबादी की आवासीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. नदियों का किनारा अक्षुण्ण रहे और उसकी अविरलता और निर्मलता बरकरार रखने के लिए बायलॉज में आवश्यक प्रबंध किये गये हैं.
-तारकिशोर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री
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By Prabhat Khabar News Desk
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