पटना की तुलना में अन्य जिलों का विकास हुआ कम, नीति आयोग जिला केंद्रित योजना बनाने की अब कर रहा पहल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Dec 2022 1:13 AM
द्वितीय राष्ट्रीय मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस के केंद्र में जिलों के बीच विसंगतियों का मुद्दा रहेगा. यह कॉन्फ्रेंस पांच-सात जनवरी के बीच नयी दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है. नीति आयोग ने राज्यों को भेजे निर्देश में कहा कि योजना डिस्ट्रिक्ट ऐज अ फूलक्रम ऑफ डेवलपमेंट के आधार पर बनायी जाए.
विकास के पैमाने पर राज्यों के बीच ही नहीं, बल्कि राज्य के अंदर जिलों के बीच भी विसंगतियां है. अगर बात बिहार की करें, तो पटना, मुजफ्फरपुर, बेगसराय और भागलपुर जैसे जिलों की तुलना में शिवहर, अररिया, बांका और नवादा का विकास कम हुआ है. प्रति व्यक्ति आय से लेकर दूसरे पैमानों पर गौर करें तो काफी अंतर है. इन विसंगतियों को दूर करने के लिए नीति आयोग अब जिला केंद्रित योजना बनाने की पहल कर रहा है. राज्यों को जिला को आधार बनाकर योजना बनाने का निर्देश दिया है.
द्वितीय राष्ट्रीय मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस के केंद्र में यह मुद्दा रहेगा. यह कॉन्फ्रेंस पांच-सात जनवरी के बीच नयी दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है. इसकी तैयारी शुरू हो गयी है. नीति आयोग ने राज्यों को भेजे निर्देश में कहा कि योजना डिस्ट्रिक्ट ऐज अ फूलक्रम ऑफ डेवलपमेंट के आधार पर बनायी जाए. आयोग ने इस संबंध में राज्य के हितधारकों (स्टेकहोल्डर) के साथ कई राउंड की वर्चुअल बैठक की है.
राज्यों के साथ दो पालियों में हुई मीटिंग के पहले सत्र में सस्टेनबल इकोनॉमिक डेवलपमेंट और दूसरे सत्र में इनक्लूसिव सोशल डेवलपमेंट एजेंडा था. हालांकि, इससे पहले भी नीति आयोग ने देश के पिछड़े जिलों को लेकर आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम) चला रहा है, लेकिन अब आयोग के एजेंडा सभी जिलों को शामिल करने की रणनीति है.
12 जिले कटिहार, बेगूसराय, शेखपुरा, अररिया, खगड़िया, पूर्णिया, औरंगाबाद, बांका, गया, जमुई, मुजफ्फरपुर और नवादा शामिल हैं. केंद्र की इस घोषणा से बिहार के इन 12 जिलों के प्रखंडों में विशेष सहायता मिलती है. इन जिलों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, वित्तीय स्थिति और आधारभूत अवसंरचना जैसे प्रमुख क्षेत्रों को विकसित करने पर ध्यान दिये जाते हैं. शिक्षा क्षेत्र के लिए मुख्य रूप से स्कूल में पढ़ाई और लाइब्रेरी की सुविधा, स्कूलों में आधारभूत संरचना, जिनमें टॉयलेट व पेयजल मुख्य हैं.
अर्थशास्त्री डॉ सुधांशु कुमार कहते हैं कि जिलों के बीच की विषंगतियों को देखते हुए क्षेत्रीय असमानता को नीतिगत स्तर पर दूर करने के लिए जिला केंद्रित प्रयास किये जा रहे हैं. ऐसा करने से विकास की बाधा बनी स्थानीय चुनौतियों का निवारण सही तरीके से हो सकता है. यह विकास के लिए नीतिगत प्रयासों के विकेंद्रीकरण का ही एक स्वरूप है.
हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों में देखें, तो देश में सत्ता के विकेंद्रीकरण के तहत केंद्र, राज्य, और पंचायती राज्य तीनों को सरकार का दर्जा दिया गया है, जिससे की सरकारी प्रयासों के विकेंद्रीकरण का लाभ स्थानीय जरूरतों के हिसाब से मिल सके. वर्तमान में जिलों को ध्यान में रख कर कई प्रयासों की शुरुआत केंद्र सरकार के स्तर पर हो रही है, उसमे एक एस्पिरेशनल जिला योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं.
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