LPG संकट ने छीनी बिहार के मजदूरों की रोजी-रोटी, ट्रेनों में धक्के खाकर लौट रहे घर

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 28 Mar 2026 6:05 PM

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स्टेशन पर बैठे यात्री

LPG Crisis: मिडिल ईस्ट संकट के चलते एलपीजी की किल्लत ने देशभर में कामकाज पर असर डाला है. दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों से हजारों बिहारी मजदूर रोजगार छिनने के बाद मजबूर होकर अपने गांव लौट रहे हैं.

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LPG Crisis: ईरान और मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के मजदूरों पर भी साफ दिखने लगा है. एलपीजी संकट के चलते दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और पंजाब जैसे शहरों में काम करने वाले हजारों बिहारी प्रवासी मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गई है. हालात ऐसे हो गए हैं कि बड़ी संख्या में मजदूर ट्रेनों से वापस अपने गांव लौट रहे हैं.

ट्रेनों में बढ़ी भीड़, हर कोई घर लौटने को मजबूर

दानापुर, गया और मुजफ्फरपुर जैसे स्टेशनों पर लौटने वाले मजदूरों की भारी भीड़ देखी जा रही है. पुणे-दानापुर स्पेशल, जनसाधारण एक्सप्रेस, अमृत भारत और लोकमान्य तिलक टर्मिनल-भागलपुर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में लोग भर-भरकर लौट रहे हैं. हर किसी के चेहरे पर चिंता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता साफ नजर आ रही है.

महंगी गैस और भूखे बच्चे बने मजबूरी

पुणे से लौटे मजदूरों ने बताया कि पहले जो गैस 50-60 रुपये किलो मिलती थी, वह अचानक 300-400 रुपये किलो तक पहुंच गई. कई दिनों तक लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया, लेकिन जब लकड़ी भी मिलना बंद हो गया तो हालात और बिगड़ गए. बच्चों के लिए खाना जुटाना मुश्किल हो गया, इसलिए गांव लौटने का फैसला लेना पड़ा.

कंपनियों ने निकाला, मजदूरी भी अधूरी

कई मजदूरों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्रियों ने उन्हें अचानक काम से निकाल दिया और पूरी मजदूरी भी नहीं दी. पुणे, हैदराबाद और दिल्ली में काम कर रहे श्रमिकों का कहना है कि गैस की किल्लत से उत्पादन ठप हो गया, जिससे कंपनियों ने कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया.

दिल्ली में बंद हुए कारखाने

कई मजदूरों ने बताया कि दिल्ली के पंजाबी बाग में चल रहा उनका सैंडल बनाने का कारखाना भी बंद करना पड़ा. पहले ब्लैक में महंगी गैस लेकर काम चलाया, लेकिन बाद में गैस मिलना ही बंद हो गया. मजबूरी में सालों पुराना काम छोड़कर वापस गांव लौटना पड़ा.

होटल-ढाबे भी हुए बंद, बढ़ा संकट

गैस की कमी का असर सिर्फ घरों तक नहीं, बल्कि होटल और ढाबों पर भी पड़ा है. कई छोटे होटल बंद हो चुके हैं और जहां खुले हैं, वहां खाना काफी महंगा हो गया है. रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल हो गया है.

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By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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